लाल बहादुर शास्त्री जयंती: PM मोदी ने एक्स पर दी श्रद्धांजलि, कहा — 'बाहर से विनम्र, भीतर से चट्टान'
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 अक्टूबर 2026 को पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री की 122वीं जयंती पर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि शास्त्री जी की सादगी और देश के प्रति उनका समर्पण आज भी करोड़ों भारतीयों के लिए प्रेरणास्रोत बना हुआ है।
मोदी का भावपूर्ण संदेश
प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा, 'लाल बहादुर शास्त्री जी को श्रद्धांजलि, जिनकी सादगी और देश के प्रति समर्पण आज भी बेहद प्रेरणादायक है।' एक अन्य संदेश में उन्होंने कहा कि शास्त्री जी ने 'जय जवान-जय किसान' का मंत्र देकर हिंदुस्तान के किसान को उठ खड़े होने की शक्ति दी।
मोदी ने यह भी कहा, 'शास्त्री जी का नाम आते ही हम भारतवासियों के मन में एक असीम श्रद्धा का भाव उमड़ पड़ता है। लाल बहादुर शास्त्री की यह विशेषता थी कि वह बाहर से अत्यधिक विनम्र दिखते थे और भीतर से चट्टान की तरह दृढ़ निश्चयी थे।' उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्र के प्रति शास्त्री जी की निस्वार्थ तपस्या का ही परिणाम था कि मात्र लगभग डेढ़ वर्ष के कार्यकाल में वे देश के जवानों और किसानों को सफलता का मंत्र दे गए।
शास्त्री जी का जीवन परिचय
लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में एक साधारण ब्राह्मण परिवार में हुआ था। 1921 से ही वे कांग्रेस से जुड़ गए और 1930 में महात्मा गांधी के नमक सत्याग्रह में सक्रिय भागीदारी निभाई। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उन्होंने ब्रिटिश जेलों में कुल नौ वर्ष बिताए।
जेल में रहते हुए उन्होंने पश्चिमी दार्शनिकों, क्रांतिकारियों और समाज सुधारकों की रचनाएँ पढ़कर अपने विचारों को समृद्ध किया। जेल से बाहर आकर वे कई आंदोलनों के अगुवा बने। उनकी देशभक्ति की पहचान यह थी कि वे पद या सत्ता के लिए नहीं, बल्कि जनसेवा को अपना सर्वोच्च धर्म मानते थे।
19 महीने का ऐतिहासिक कार्यकाल
जवाहरलाल नेहरू के निधन के बाद 9 जून 1964 को शास्त्री जी भारत के दूसरे प्रधानमंत्री बने और 11 जनवरी 1966 तक इस पद पर रहे। उनका कार्यकाल मात्र 19 महीने का था, लेकिन इतिहास में अमिट छाप छोड़ने वाला रहा। 1965 में पाकिस्तान के साथ युद्ध के दौरान सीमाओं पर सैनिकों की वीरता और देश में खाद्य संकट के बीच उन्होंने 'जय जवान-जय किसान' का ऐतिहासिक नारा दिया — जो आज भी उतना ही प्रासंगिक है।
यह ऐसे समय में आया जब देश एक साथ युद्ध और अनाज की कमी से जूझ रहा था। गौरतलब है कि शास्त्री जी का यह नारा केवल एक राजनीतिक उद्घोष नहीं, बल्कि राष्ट्रनिर्माण का एक दर्शन था जिसने किसान और सैनिक — दोनों को समान सम्मान दिया।
राष्ट्रीय स्मृति में शास्त्री जी
शास्त्री जी को मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाज़ा गया। उनकी जयंती 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी की जयंती के साथ मनाई जाती है — यह संयोग इस दिन की ऐतिहासिक गरिमा को और भी बढ़ा देता है। देशभर में आज विभिन्न कार्यक्रमों के ज़रिए उन्हें याद किया जा रहा है।
शास्त्री जी की विरासत आज भी उन नीतिनिर्माताओं के लिए मार्गदर्शक है जो यह मानते हैं कि सच्चा नेतृत्व सत्ता में नहीं, सेवा में होता है।