2 अक्टूबर 2026
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लाल बहादुर शास्त्री जयंती 2 अक्टूबर: राजनाथ सिंह, योगी, गडकरी समेत दर्जनों नेताओं ने किया नमन

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लाल बहादुर शास्त्री जयंती 2 अक्टूबर: राजनाथ सिंह, योगी, गडकरी समेत दर्जनों नेताओं ने किया नमन

सारांश

2 अक्टूबर को लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर राजनाथ सिंह, योगी आदित्यनाथ, नितिन गडकरी, भजनलाल शर्मा, मोहन यादव और नीतीश कुमार समेत दर्जनों नेताओं ने उनके सादगीपूर्ण जीवन, दृढ़ नेतृत्व और 'जय जवान, जय किसान' की विरासत को याद किया।

मुख्य बातें

2 अक्टूबर 2026 को पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर देशव्यापी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक्स पर पोस्ट कर शास्त्री जी को सादगी, दृढ़ संकल्प और अदम्य आत्मबल का प्रतीक बताया।
नितिन गडकरी, पीयूष गोयल और मनोहर लाल समेत केंद्रीय मंत्रियों ने 'जय जवान, जय किसान' की प्रासंगिकता रेखांकित की।
यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता, एमपी के सीएम मोहन यादव, राजस्थान के सीएम भजनलाल शर्मा और अन्य मुख्यमंत्रियों ने भी नमन किया।
नीतीश कुमार ने शास्त्री जी की विरासत से प्रेरणा लेकर राष्ट्रीय एकता को मजबूत बनाने का आह्वान किया।

2 अक्टूबर 2026 को पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर देशभर के वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से लेकर कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों और केंद्रीय मंत्रियों ने शास्त्री जी के सादगी, ईमानदारी और दृढ़ संकल्प से भरे जीवन को याद किया। 'जय जवान, जय किसान' के उनके ऐतिहासिक नारे की प्रासंगिकता को एक बार फिर रेखांकित किया गया।

राजनाथ सिंह का संदेश

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि ईमानदारी, उच्च आदर्शों, उदात्त निष्ठा और असाधारण कर्तव्यबोध के लिए जनमानस में सम्मानित शास्त्री जी का जीवन सादगी और दृढ़ संकल्प का अनुपम उदाहरण था। उन्होंने आगे कहा कि स्वभाव से विनम्र शास्त्री जी के व्यक्तित्व में अद्भुत साहस और अदम्य आत्मबल था।

राजनाथ ने यह भी जोड़ा कि 'जय जवान, जय किसान' का मंत्र आज भी भारत की सुरक्षा, कृषि और राष्ट्रनिर्माण के प्रति हमारे संकल्प को प्रेरणा देता है, और शास्त्री जी के आदर्श आने वाली पीढ़ियों को ईमानदारी, कर्तव्यबोध और राष्ट्र के प्रति समर्पण की प्रेरणा देते रहेंगे।

केंद्रीय मंत्रियों की श्रद्धांजलि

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक्स पर लिखा कि 'जय जवान-जय किसान' के नारे के साथ देश के जवानों और किसानों को राष्ट्र की चेतना बनाने वाले भारतीय स्वाभिमान के प्रतीक शास्त्री जी को कोटि-कोटि नमन। उन्होंने शास्त्री जी की सादगी और व्यक्तित्व को सदैव वंदनीय बताया।

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शास्त्री जी को 'जय जवान, जय किसान' का प्रणेता और सादगी व दृढ़ संकल्प की प्रतिमूर्ति बताते हुए कहा कि राष्ट्रसेवा के प्रति उनका समर्पण, विषम परिस्थितियों में अडिग नेतृत्व और देशवासियों के प्रति संवेदनशीलता सदैव प्रेरणा देती रहेगी।

आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल ने 'गुदड़ी के लाल' शास्त्री जी को याद करते हुए कहा कि उनके नारे ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में देश के जवानों और किसानों में नई ऊर्जा का संचार किया। उन्होंने सादगी, ईमानदारी और त्याग के प्रतीक शास्त्री जी के देश के विकास में अद्वितीय योगदान को रेखांकित किया।

मुख्यमंत्रियों की प्रतिक्रिया

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शास्त्री जी के दृढ़ नेतृत्व, ईमानदारी और सादगीपूर्ण जीवन को देशवासियों के लिए युगों-युगों तक अनुकरणीय बताया।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक्स पर कहा कि सादगी उनका स्वभाव था और राष्ट्रसेवा उनका संकल्प। उन्होंने लिखा कि 'जय जवान, जय किसान' के मंत्र से शास्त्री जी ने सीमा पर डटे जवान और खेत में जुटे किसान, दोनों के परिश्रम को देश का गौरव बनाया।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भारत रत्न शास्त्री जी को सादर नमन करते हुए कहा कि उनका 'जय जवान, जय किसान' का संदेश देश की सुरक्षा और समृद्धि में जवानों और अन्नदाताओं के योगदान को सम्मान देने की प्रेरणा देता है।

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि शास्त्री जी ने दृढ़ नेतृत्व और अमर मंत्र से विषम परिस्थितियों में भी देश के स्वाभिमान और सुरक्षा को नई दिशा दी। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने उनके सरल जीवन, उच्च आदर्श और कर्तव्य के प्रति अटूट निष्ठा को प्रत्येक देशवासी के लिए प्रेरणास्रोत बताया।

हरियाणा के मुख्यमंत्री ने कहा कि सत्यनिष्ठा, सादगी, साहस और राष्ट्रसेवा से परिपूर्ण उनका जीवन भारतीय राजनीति और सार्वजनिक जीवन के लिए अनुकरणीय आदर्श है।

बिहार के नेताओं का नमन

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शास्त्री जी की जयंती पर नमन करते हुए कहा कि सादगी, दृढ़ संकल्प और राष्ट्रसेवा के प्रति उनका समर्पण सदैव देशवासियों को प्रेरणा देता रहेगा। जनता दल (यूनाइटेड) नेता और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी पोस्ट में शास्त्री जी को 'सादगी और राष्ट्र प्रेम का उत्कृष्ट उदाहरण' बताते हुए राष्ट्रीय एकता को मजबूत बनाने का संकल्प लेने का आह्वान किया।

शास्त्री जी की विरासत और आज की प्रासंगिकता

गौरतलब है कि लाल बहादुर शास्त्री भारत के दूसरे प्रधानमंत्री थे और उन्होंने 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान देश का नेतृत्व किया था। 'जय जवान, जय किसान' का नारा उन्होंने युद्ध और खाद्य संकट की दोहरी चुनौती के बीच दिया था, जो आज भी भारतीय चेतना का अभिन्न हिस्सा है। यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय नेता उनकी विरासत को न केवल स्मरण कर रहे हैं, बल्कि उसे समकालीन नीतिगत संदर्भों से जोड़ भी रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जय किसान' के नारे की गूँज विशेष रूप से सुनाई दी, जो संभवतः किसान और सैन्य बजट पर चल रही नीतिगत बहसों की पृष्ठभूमि में अधिक सार्थक है। यह सवाल उठाना जरूरी है कि क्या यह सिर्फ औपचारिक स्मरण है, या नेता वास्तव में उस नीतिगत साहस को दोहराने की इच्छाशक्ति रखते हैं जो शास्त्री जी ने दिखाई थी — खाद्य संकट के बीच खुद सप्ताह में एक दिन उपवास रखकर। सादगी की बात करने वाले और सार्वजनिक जीवन में उसे जीने वाले नेताओं के बीच की खाई आज भी उतनी ही बड़ी है।
RashtraPress
2 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लाल बहादुर शास्त्री की जयंती कब मनाई जाती है?
लाल बहादुर शास्त्री की जयंती प्रतिवर्ष 2 अक्टूबर को मनाई जाती है। यह दिन महात्मा गांधी की जयंती के साथ भी संयोगवश मेल खाता है, इसलिए इसे गांधी जयंती के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर स्मरण किया जाता है।
'जय जवान, जय किसान' का नारा किसने दिया और इसका क्या महत्व है?
'जय जवान, जय किसान' का नारा पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान दिया था। उस समय देश एक साथ सैन्य चुनौती और खाद्य संकट का सामना कर रहा था, और यह नारा सेना व किसान दोनों के योगदान को एकसाथ सम्मान देने का प्रतीक बना।
2026 की शास्त्री जयंती पर किन प्रमुख नेताओं ने श्रद्धांजलि दी?
2 अक्टूबर 2026 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी व पीयूष गोयल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने श्रद्धांजलि दी।
लाल बहादुर शास्त्री को भारत रत्न कब मिला?
लाल बहादुर शास्त्री को मरणोपरांत 1966 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया। वे भारत के दूसरे प्रधानमंत्री थे और उन्होंने 1964 से 1966 तक देश का नेतृत्व किया।
शास्त्री जी को 'गुदड़ी के लाल' क्यों कहा जाता है?
'गुदड़ी के लाल' वह लोकप्रिय संबोधन है जो अत्यंत साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर देश के शीर्ष पद तक पहुँचने वाले लाल बहादुर शास्त्री के लिए प्रयोग किया जाता है। यह उनकी सादगी, संघर्ष और जमीन से जुड़े व्यक्तित्व का प्रतीक है, जिसका उल्लेख केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने 2 अक्टूबर 2026 की श्रद्धांजलि में भी किया।
राष्ट्र प्रेस
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