लाल बहादुर शास्त्री जयंती 2 अक्टूबर: राजनाथ सिंह, योगी, गडकरी समेत दर्जनों नेताओं ने किया नमन
सारांश
मुख्य बातें
2 अक्टूबर 2026 को पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर देशभर के वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से लेकर कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों और केंद्रीय मंत्रियों ने शास्त्री जी के सादगी, ईमानदारी और दृढ़ संकल्प से भरे जीवन को याद किया। 'जय जवान, जय किसान' के उनके ऐतिहासिक नारे की प्रासंगिकता को एक बार फिर रेखांकित किया गया।
राजनाथ सिंह का संदेश
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि ईमानदारी, उच्च आदर्शों, उदात्त निष्ठा और असाधारण कर्तव्यबोध के लिए जनमानस में सम्मानित शास्त्री जी का जीवन सादगी और दृढ़ संकल्प का अनुपम उदाहरण था। उन्होंने आगे कहा कि स्वभाव से विनम्र शास्त्री जी के व्यक्तित्व में अद्भुत साहस और अदम्य आत्मबल था।
राजनाथ ने यह भी जोड़ा कि 'जय जवान, जय किसान' का मंत्र आज भी भारत की सुरक्षा, कृषि और राष्ट्रनिर्माण के प्रति हमारे संकल्प को प्रेरणा देता है, और शास्त्री जी के आदर्श आने वाली पीढ़ियों को ईमानदारी, कर्तव्यबोध और राष्ट्र के प्रति समर्पण की प्रेरणा देते रहेंगे।
केंद्रीय मंत्रियों की श्रद्धांजलि
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक्स पर लिखा कि 'जय जवान-जय किसान' के नारे के साथ देश के जवानों और किसानों को राष्ट्र की चेतना बनाने वाले भारतीय स्वाभिमान के प्रतीक शास्त्री जी को कोटि-कोटि नमन। उन्होंने शास्त्री जी की सादगी और व्यक्तित्व को सदैव वंदनीय बताया।
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शास्त्री जी को 'जय जवान, जय किसान' का प्रणेता और सादगी व दृढ़ संकल्प की प्रतिमूर्ति बताते हुए कहा कि राष्ट्रसेवा के प्रति उनका समर्पण, विषम परिस्थितियों में अडिग नेतृत्व और देशवासियों के प्रति संवेदनशीलता सदैव प्रेरणा देती रहेगी।
आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल ने 'गुदड़ी के लाल' शास्त्री जी को याद करते हुए कहा कि उनके नारे ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में देश के जवानों और किसानों में नई ऊर्जा का संचार किया। उन्होंने सादगी, ईमानदारी और त्याग के प्रतीक शास्त्री जी के देश के विकास में अद्वितीय योगदान को रेखांकित किया।
मुख्यमंत्रियों की प्रतिक्रिया
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शास्त्री जी के दृढ़ नेतृत्व, ईमानदारी और सादगीपूर्ण जीवन को देशवासियों के लिए युगों-युगों तक अनुकरणीय बताया।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक्स पर कहा कि सादगी उनका स्वभाव था और राष्ट्रसेवा उनका संकल्प। उन्होंने लिखा कि 'जय जवान, जय किसान' के मंत्र से शास्त्री जी ने सीमा पर डटे जवान और खेत में जुटे किसान, दोनों के परिश्रम को देश का गौरव बनाया।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भारत रत्न शास्त्री जी को सादर नमन करते हुए कहा कि उनका 'जय जवान, जय किसान' का संदेश देश की सुरक्षा और समृद्धि में जवानों और अन्नदाताओं के योगदान को सम्मान देने की प्रेरणा देता है।
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि शास्त्री जी ने दृढ़ नेतृत्व और अमर मंत्र से विषम परिस्थितियों में भी देश के स्वाभिमान और सुरक्षा को नई दिशा दी। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने उनके सरल जीवन, उच्च आदर्श और कर्तव्य के प्रति अटूट निष्ठा को प्रत्येक देशवासी के लिए प्रेरणास्रोत बताया।
हरियाणा के मुख्यमंत्री ने कहा कि सत्यनिष्ठा, सादगी, साहस और राष्ट्रसेवा से परिपूर्ण उनका जीवन भारतीय राजनीति और सार्वजनिक जीवन के लिए अनुकरणीय आदर्श है।
बिहार के नेताओं का नमन
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शास्त्री जी की जयंती पर नमन करते हुए कहा कि सादगी, दृढ़ संकल्प और राष्ट्रसेवा के प्रति उनका समर्पण सदैव देशवासियों को प्रेरणा देता रहेगा। जनता दल (यूनाइटेड) नेता और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी पोस्ट में शास्त्री जी को 'सादगी और राष्ट्र प्रेम का उत्कृष्ट उदाहरण' बताते हुए राष्ट्रीय एकता को मजबूत बनाने का संकल्प लेने का आह्वान किया।
शास्त्री जी की विरासत और आज की प्रासंगिकता
गौरतलब है कि लाल बहादुर शास्त्री भारत के दूसरे प्रधानमंत्री थे और उन्होंने 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान देश का नेतृत्व किया था। 'जय जवान, जय किसान' का नारा उन्होंने युद्ध और खाद्य संकट की दोहरी चुनौती के बीच दिया था, जो आज भी भारतीय चेतना का अभिन्न हिस्सा है। यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय नेता उनकी विरासत को न केवल स्मरण कर रहे हैं, बल्कि उसे समकालीन नीतिगत संदर्भों से जोड़ भी रहे हैं।