2 अक्टूबर 2026
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ज्ञानेश कुमार विवाद पर अनिल शास्त्री: 'आज कोई नैतिक आधार पर इस्तीफा देने वाला नहीं'

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ज्ञानेश कुमार विवाद पर अनिल शास्त्री: 'आज कोई नैतिक आधार पर इस्तीफा देने वाला नहीं'

सारांश

लाल बहादुर शास्त्री की 122वीं जयंती पर उनके पुत्र अनिल शास्त्री ने ज्ञानेश कुमार विवाद को नैतिक राजनीति के पतन से जोड़ा। SIR नोटिस और 14 आपत्तियों का हवाला देते हुए उन्होंने वह सवाल उठाया जो सबसे तीखा है — क्या आज कोई नेता जवाबदेही की उस परंपरा को जीवित रख सकता है?

मुख्य बातें

अनिल शास्त्री ने 2 अक्टूबर 2026 को कहा कि आज कोई नेता नैतिक आधार पर इस्तीफा देने का साहस नहीं रखता, जैसा लाल बहादुर शास्त्री ने रेल दुर्घटना के बाद किया था।
उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दो अन्य आयुक्तों की 14 आपत्तियों को सार्वजनिक करने की माँग की।
SIR (विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण) के तहत लाल कृष्ण आडवाणी और सोनिया गांधी समेत कई नेताओं को नोटिस जारी किए जाने पर चिंता जताई।
ऑपरेशन सिंदूर को उचित बताया और 1965 के युद्ध में शास्त्री जी की सैन्य नीति से उसकी तुलना की।
जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बताते हुए कहा कि पाकिस्तान कभी उसे अलग नहीं कर सकता।
विजय घाट पर 122वीं जयंती समारोह में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने श्रद्धांजलि अर्पित की।

पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के पुत्र अनिल शास्त्री ने 2 अक्टूबर 2026 को उनकी 122वीं जयंती के अवसर पर कहा कि आज के राजनीतिक परिदृश्य में कोई भी नेता उस नैतिक साहस का परिचय नहीं देता जो उनके पिता ने 1956 की रेल दुर्घटना के बाद इस्तीफा देकर दिया था। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की विपक्षी माँग पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने यह बयान दिया।

मुख्य बयान और ज्ञानेश कुमार विवाद

अनिल शास्त्री ने कहा, 'हमने जो सुना और पढ़ा है, उससे लगता है कि कुछ गलतियाँ हुई हैं, क्योंकि दूसरे चुनाव आयुक्तों ने 14 आपत्तियाँ उठाई हैं और कई बार वे सीईसी ज्ञानेश कुमार से सहमत नहीं थे।' उनका कहना था कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि वे 14 मुद्दे कौन-से थे जिन पर मतभेद उभरे।

उन्होंने विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी को भी नोटिस जारी हुआ, जो वर्षों से दिल्ली में मतदान कर रहे हैं। सोनिया गांधी सहित अनेक लोगों को ऐसे नोटिस मिलने पर उन्होंने चिंता जताई।

शास्त्री और मोदी की सोच में समानता

अनिल शास्त्री ने राष्ट्रीय सुरक्षा के सवाल पर लाल बहादुर शास्त्री और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीति में एकरूपता पाई। उन्होंने कहा कि जब पाकिस्तान ने छंब सेक्टर में अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर हमला किया, तो शास्त्री जी ने सेना को जवाबी कार्रवाई का निर्देश दिया था और भारतीय सेना लाहौर की ओर बढ़ी थी।

उन्होंने इसकी तुलना हालिया 'ऑपरेशन सिंदूर' से करते हुए कहा कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना ने सीमा पार आतंकवादी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक की और 'काफी चोट पहुँचाई।' उनके शब्दों में, 'इस मामले में मेरा मानना है कि दोनों की सोच एक जैसी रही है।'

जम्मू-कश्मीर पर कड़ा रुख

अनिल शास्त्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और पाकिस्तान कभी भी उसे भारत से अलग नहीं कर सकता — चाहे वह चीन, अमेरिका या किसी अन्य देश की मदद ले। उन्होंने माँग की कि पाकिस्तान वह क्षेत्र भारत को लौटाए जिस पर उसने अवैध रूप से कब्जा कर रखा है। उनका कहना था, 'हम ईंट का जवाब पत्थर से और हथियारों का जवाब हथियारों से देंगे।'

शास्त्री की सादगी और आज का दौर

शास्त्री जी की सादगी का स्मरण करते हुए अनिल शास्त्री ने कहा कि उनके पिता खादी की धोती और कुर्ता पहनते थे, लेकिन उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि 'समय बदलता है और समय के साथ सोच भी बदलती है।' उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से शास्त्री जी और उनके नारे 'जय जवान, जय किसान' को याद करते हैं।

122वीं जयंती: श्रद्धांजलि और संदेश

2 अक्टूबर को विजय घाट पर आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और समाज के विभिन्न वर्गों के लोग उपस्थित रहे। अनिल शास्त्री ने आह्वान किया कि इस जयंती पर हम शास्त्री जी को केवल एक व्यक्ति के रूप में नहीं, बल्कि उनकी ईमानदारी, प्रतिबद्धता और आदर्शों के प्रतीक के रूप में याद करें। उन्होंने कहा कि 'जय जवान, जय किसान' का नारा आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना उस समय था।

आने वाले समय में यह देखना होगा कि ज्ञानेश कुमार विवाद और SIR नोटिस मामले में चुनाव आयोग की ओर से कोई स्पष्टीकरण सामने आता है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन चुनाव आयोग की कार्यशैली पर सवाल उठाते हैं। यह राजनीतिक संतुलन उस कांग्रेस परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है जो 'राष्ट्रहित में सहमति, शासन में जवाबदेही' के दोहरे मानदंड पर चलती है। ज्ञानेश कुमार की 14 आपत्तियों वाला सवाल असल में उस बड़े संकट की ओर इशारा करता है जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नजरअंदाज करती है — चुनाव आयोग के भीतर आंतरिक असहमति और उसकी पारदर्शिता का सवाल। शास्त्री जी की नैतिक विरासत को आज की राजनीति से जोड़ना प्रेरक है, लेकिन असली कसौटी यह है कि क्या उनके आदर्शों को केवल जयंती भाषणों में नहीं, बल्कि संस्थागत जवाबदेही की व्यवहारिक माँगों में भी जीवित रखा जा रहा है।
RashtraPress
2 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अनिल शास्त्री ने ज्ञानेश कुमार के बारे में क्या कहा?
अनिल शास्त्री ने कहा कि ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें या न दें, आज कोई नेता नैतिक आधार पर इस्तीफा देने की वह परंपरा नहीं निभाता जो लाल बहादुर शास्त्री ने रेल दुर्घटना के बाद निभाई थी। उन्होंने यह भी माँग की कि दो अन्य चुनाव आयुक्तों द्वारा उठाई गई 14 आपत्तियाँ सार्वजनिक की जाएँ।
SIR नोटिस विवाद क्या है जिसका अनिल शास्त्री ने उल्लेख किया?
विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) के तहत BJP नेता लाल कृष्ण आडवाणी और सोनिया गांधी समेत कई वरिष्ठ नेताओं को नोटिस जारी किए गए हैं। अनिल शास्त्री ने इसे चुनाव आयोग की कार्यशैली पर उठाए जा रहे सवालों के संदर्भ में उद्धृत किया।
अनिल शास्त्री ने ऑपरेशन सिंदूर की तुलना किससे की?
उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर की तुलना 1965 के भारत-पाक युद्ध में लाल बहादुर शास्त्री की उस नीति से की जब भारतीय सेना ने छंब सेक्टर में पाकिस्तानी हमले के जवाब में अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर लाहौर की ओर कूच किया था। उनका मानना है कि दोनों नेताओं की राष्ट्रीय सुरक्षा सोच में समानता है।
लाल बहादुर शास्त्री की 122वीं जयंती पर क्या कार्यक्रम हुए?
2 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के विजय घाट पर श्रद्धांजलि समारोह आयोजित हुआ जिसमें राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और समाज के विभिन्न वर्गों के लोग शामिल हुए। दिल्ली में कई अन्य कार्यक्रम भी हुए।
अनिल शास्त्री का जम्मू-कश्मीर पर क्या रुख है?
अनिल शास्त्री ने स्पष्ट कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और पाकिस्तान — चाहे चीन या अमेरिका की मदद ले — उसे कभी भारत से अलग नहीं कर सकता। उन्होंने माँग की कि पाकिस्तान वह क्षेत्र भारत को वापस लौटाए जिस पर उसने अवैध कब्जा कर रखा है।
राष्ट्र प्रेस
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