जी20 में बड़ी सहमति: खाद्य पदार्थों को व्यापार हथियार बनाने की होगी निंदा — अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ग्रीर
सारांश
मुख्य बातें
मिल्वौकी में आयोजित जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक में 2 अक्टूबर 2026 को एक महत्वपूर्ण सहमति बनी, जिसके तहत जी20 सदस्य देश खाद्य पदार्थों और कृषि उत्पादों को व्यापारिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की सामूहिक निंदा करेंगे। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने इस सहमति की घोषणा करते हुए इसे वैश्विक खाद्य व्यापार प्रणाली की रक्षा की दिशा में एक अहम पहल बताया।
क्या है यह सहमति
जी20 सदस्य देशों ने कई दिनों की गहन चर्चा के बाद एक संयुक्त बयान पर सहमति जताई है, जिसे बैठक के दिन ही जारी किया गया। इस बयान में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि कृषि उत्पादों का इस्तेमाल किसी देश पर आर्थिक या राजनीतिक दबाव बनाने के औजार के रूप में नहीं किया जाना चाहिए।
ग्रीर ने पत्रकारों से कहा, 'कई दिनों की चर्चा और सदस्यों की तरफ से कार्रवाई करने की इच्छा के बाद, हमें यह बताते हुए खुशी हो रही है कि हम व्यापारिक कार्रवाई के ज़रिए खाने को हथियार बनाने पर जी20 के बयान पर सहमति पर पहुंच गए हैं।'
अमेरिकी अध्यक्षता में उठाया गया मुद्दा
अमेरिका वर्ष 2026 में जी20 की अध्यक्षता कर रहा है और इसी कार्यकाल में यह विषय पहली बार औपचारिक एजेंडे में शामिल किया गया। ग्रीर के अनुसार, खाद्य पदार्थों को हथियार बनाना जी20 चर्चा के लिए एक नया विषय था, लेकिन यह समस्या पुरानी है।
उन्होंने कहा, 'खाने और कृषि उत्पादों के व्यापार को आर्थिक या राजनीतिक कारणों से दबाव डालने के हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे लक्षित देशों में लोगों की रोज़ी-रोटी को खतरा होता है, प्रतिस्पर्धा बिगड़ती है और वैश्विक व्यापार प्रणाली पर भरोसा कम होता है।' गौरतलब है कि जी20 वैश्विक जीडीपी का लगभग 85 प्रतिशत और दुनिया की दो-तिहाई आबादी का प्रतिनिधित्व करता है।
जिन मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई
खाद्य पदार्थों पर बनी सहमति के विपरीत, मिल्वौकी बैठक में दो अन्य प्रमुख मुद्दों — जबरन मजदूरी और अतिरिक्त उत्पादन क्षमता — पर जी20 स्तर पर कोई संयुक्त बयान नहीं बन सका।
ग्रीर ने इसे 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताया और कहा कि वैश्विक सप्लाई चेन में जबरन मजदूरी के मुद्दे पर सहमति न बन पाने के कारण एक छोटे समूह के व्यापारिक साझेदार इस विषय पर अलग से संयुक्त बयान जारी करेंगे। अतिरिक्त उत्पादन क्षमता को स्टील, ऑटोमोबाइल, बैटरी, सोलर पैनल, केमिकल और अन्य क्षेत्रों में एक साझा समस्या माना गया, हालाँकि इस पर साझा बयान संभव नहीं हुआ।
आगे क्या होगा
खाद्य हथियारीकरण पर जी20 का यह बयान सांकेतिक महत्व रखता है, क्योंकि इसमें कोई बाध्यकारी तंत्र नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका असली मूल्य इस बात पर निर्भर करेगा कि सदस्य देश अपनी द्विपक्षीय व्यापार नीतियों में इसे किस हद तक लागू करते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक व्यापार तनाव और खाद्य सुरक्षा के मुद्दे एक साथ उभर रहे हैं, और जी20 की एकजुटता को चुनौती दे रहे हैं।