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मिल्वौकी में जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक 29 सितंबर से, जबरन मजदूरी और MFN नियम पर होगी अहम चर्चा

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मिल्वौकी में जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक 29 सितंबर से, जबरन मजदूरी और MFN नियम पर होगी अहम चर्चा

सारांश

मिल्वौकी में 29 सितंबर से जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक शुरू होगी जहाँ अमेरिका WTO के MFN सिद्धांत में बदलाव का प्रस्ताव रख सकता है — एक ऐसा कदम जो वैश्विक बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था को नए सिरे से परिभाषित कर सकता है। भारत से वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल भाग लेंगे।

मुख्य बातें

जेमिसन ग्रीर 29 सितंबर से 1 अक्टूबर 2026 तक मिल्वौकी में जी20 व्यापार मंत्रियों की मेजबानी करेंगे।
एजेंडे में जबरन मजदूरी , खाद्य व्यापार का हथियारीकरण , अतिरिक्त औद्योगिक उत्पादन और MFN सिद्धांत में संभावित बदलाव शामिल हैं।
भारत का प्रतिनिधित्व केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल करेंगे।
USTR ने अब तक MFN में प्रस्तावित बदलाव का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया है।
मंत्री रॉकवेल ऑटोमेशन की फैसिलिटी का दौरा करेंगे; मुख्य सत्र गुरुवार को होंगे।

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर 29 सितंबर से 1 अक्टूबर 2026 तक मिल्वौकी, अमेरिका में जी20 देशों के व्यापार मंत्रियों की मेजबानी करेंगे। इस बैठक में जबरन मजदूरी, खाद्य व्यापार का हथियारीकरण, अतिरिक्त औद्योगिक उत्पादन क्षमता और विश्व व्यापार संगठन (WTO) के 'मोस्ट-फेवर्ड-नेशन' (MFN) सिद्धांत में संभावित बदलाव जैसे बड़े मुद्दे केंद्र में होंगे। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) ने शुक्रवार को यह कार्यक्रम जारी किया।

बैठक का पूरा कार्यक्रम

कार्यक्रम की शुरुआत मंगलवार शाम 'बिज़नेस राउंडटेबल' और 'नेशनल एसोसिएशन ऑफ मैन्युफैक्चरर्स' के स्वागत समारोह से होगी। बुधवार सुबह 'ग्लोबल फोरम ऑन स्टील एक्सेस कैपेसिटी' की मंत्रिस्तरीय बैठक के साथ औपचारिक कार्यवाही शुरू होगी।

स्टील सत्र के बाद ग्रीर और अन्य देशों के मंत्री मिल्वौकी में 'रॉकवेल ऑटोमेशन' की एक विनिर्माण सुविधा का दौरा करेंगे, जहाँ वे कामगारों और उद्योग अधिकारियों से सीधी मुलाकात करेंगे। उसी शाम USTR और अमेरिकी कृषि विभाग विदेशी प्रतिनिधिमंडलों के लिए स्वागत डिनर आयोजित करेंगे।

मुख्य मंत्रिस्तरीय बातचीत गुरुवार को दो सत्रों में होगी — पहला सत्र सुबह से दोपहर एक बजे तक और दूसरा दोपहर बाद। दोनों सत्रों के बीच ग्रीर की प्रेस कॉन्फ्रेंस भी निर्धारित है।

मुख्य एजेंडा: जबरन मजदूरी और अतिरिक्त उत्पादन

ग्रीर वैश्विक सप्लाई चेन से जबरन मजदूरी समाप्त करने और अतिरिक्त औद्योगिक उत्पादन क्षमता की समस्या पर चर्चा का नेतृत्व करेंगे। स्टील उत्पादन और औद्योगिक क्षमता की अधिकता हाल के वर्षों में अंतरराष्ट्रीय व्यापार के प्रमुख विवादों में शामिल रही है।

ट्रंप प्रशासन बार-बार यह तर्क देता रहा है कि जरूरत से ज्यादा उत्पादन अमेरिकी घरेलू उद्योगों और कामगारों पर सीधा दबाव डालता है। 'रॉकवेल ऑटोमेशन' फैसिलिटी के दौरे के जरिए प्रशासन यह दर्शाना चाहता है कि उसकी व्यापार नीति अमेरिका में विनिर्माण को पुनर्जीवित करने और सप्लाई चेन को मजबूत करने में सहायक रही है।

MFN सिद्धांत में बदलाव पर बड़ा सवाल

बैठक में 'मोस्ट-फेवर्ड-नेशन' (MFN) सिद्धांत को अद्यतन करने पर भी विचार-विमर्श होगा। WTO के इस बुनियादी नियम के तहत कोई भी सदस्य देश यदि किसी अन्य सदस्य को कोई विशेष व्यापारिक लाभ देता है, तो सामान्यतः वही लाभ सभी WTO सदस्यों को देना अनिवार्य होता है — हालाँकि इसके कुछ निर्धारित अपवाद भी हैं।

गौरतलब है कि USTR ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि अमेरिका MFN में किस प्रकार के संशोधन का प्रस्ताव रखने की योजना बना रहा है। यह अस्पष्टता व्यापार विशेषज्ञों के लिए उत्सुकता का विषय बनी हुई है, क्योंकि MFN सिद्धांत में कोई भी बड़ा बदलाव वैश्विक बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था की नींव को प्रभावित कर सकता है।

भारत की भागीदारी

इस बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल करेंगे। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध, टैरिफ विवाद और द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर चर्चाएँ जारी हैं। गोयल की भागीदारी से भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों की दिशा पर भी नजरें टिकी रहेंगी।

आगे क्या होगा

यह बैठक जी20 की व्यापार मंत्री स्तरीय प्रक्रिया का हिस्सा है और इसके नतीजे जी20 नेताओं के शिखर सम्मेलन तक के लिए व्यापार एजेंडे की रूपरेखा तय कर सकते हैं। खाद्य व्यापार को 'हथियार' के रूप में उपयोग किए जाने के मुद्दे पर कोई ठोस प्रस्ताव उभरता है, तो वह वैश्विक खाद्य सुरक्षा बहस को नया आयाम दे सकता है। ग्रीर की गुरुवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस से अधिक स्पष्टता मिलने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो अपने आप में एक कूटनीतिक रणनीति है। ट्रंप प्रशासन 'रॉकवेल ऑटोमेशन' दौरे के जरिए घरेलू दर्शकों को संदेश देना चाहता है, लेकिन असली परीक्षण यह है कि अतिरिक्त उत्पादन क्षमता पर किसी विशेष देश का नाम लिए बिना जी20 सहमति कैसे बनती है। भारत के लिए यह बैठक अवसर और चुनौती दोनों है — एक तरफ अमेरिकी बाजार में प्राथमिकता का दावा, दूसरी तरफ WTO नियमों में बदलाव से उत्पन्न होने वाली अनिश्चितता।
RashtraPress
26 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मिल्वौकी में जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक कब होगी?
यह बैठक 29 सितंबर से 1 अक्टूबर 2026 तक अमेरिका के मिल्वौकी शहर में आयोजित होगी। इसकी मेजबानी अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर करेंगे।
इस बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा होगी?
बैठक में जबरन मजदूरी को सप्लाई चेन से हटाना, अतिरिक्त औद्योगिक उत्पादन क्षमता, खाद्य व्यापार का हथियार के रूप में उपयोग और WTO के MFN सिद्धांत में संभावित बदलाव प्रमुख एजेंडा हैं। स्टील अतिरिक्त क्षमता पर भी एक अलग मंत्रिस्तरीय सत्र होगा।
MFN यानी 'मोस्ट-फेवर्ड-नेशन' सिद्धांत क्या है और इसे बदलने की बात क्यों हो रही है?
MFN WTO का वह बुनियादी नियम है जिसके तहत कोई सदस्य देश यदि किसी एक सदस्य को विशेष व्यापारिक लाभ देता है तो वही लाभ सभी सदस्यों को देना होता है। अमेरिका इसे अद्यतन करने की बात कर रहा है, हालाँकि USTR ने अभी तक प्रस्तावित बदलावों का विवरण सार्वजनिक नहीं किया है।
इस बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व कौन करेगा?
भारत की ओर से केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल मिल्वौकी बैठक में भाग लेंगे। यह बैठक भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों के संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
'रॉकवेल ऑटोमेशन' फैसिलिटी दौरे का क्या महत्व है?
स्टील सत्र के बाद ग्रीर और अन्य देशों के मंत्री मिल्वौकी में रॉकवेल ऑटोमेशन की विनिर्माण सुविधा का दौरा करेंगे। इसके जरिए ट्रंप प्रशासन यह दर्शाना चाहता है कि उसकी व्यापार नीति अमेरिकी विनिर्माण को पुनर्जीवित करने और सप्लाई चेन सुदृढ़ करने में सहायक रही है।
राष्ट्र प्रेस
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