29 सितंबर 2026
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पीयूष गोयल 29 सितंबर से अमेरिका दौरे पर, G20 व्यापार बैठक और भारत-अमेरिका BTA पर होगी अहम चर्चा

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पीयूष गोयल 29 सितंबर से अमेरिका दौरे पर, G20 व्यापार बैठक और भारत-अमेरिका BTA पर होगी अहम चर्चा

सारांश

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल का अमेरिका दौरा सिर्फ G20 की औपचारिकता नहीं — भारत-अमेरिका BTA पर होने वाली बातचीत इस यात्रा का असली केंद्र है। 7 फरवरी 2026 के संयुक्त बयान के बाद अब अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश तेज़ हो गई है।

मुख्य बातें

पीयूष गोयल 29 सितंबर से 5 अक्टूबर 2026 तक अमेरिका दौरे पर रहेंगे।
30 सितंबर–1 अक्टूबर को मिल्वौकी, विस्कॉन्सिन में G20 व्यापार मंत्रियों की बैठक में भाग लेंगे।
भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) और 7 फरवरी 2026 के संयुक्त बयान के अनुरूप अंतरिम समझौते पर वार्ता होगी।
भारत WTO की केंद्रीय भूमिका और विकासशील देशों के लिए नीतिगत लचीलेपन की पैरवी करेगा।
मिल्वौकी और शिकागो में अमेरिकी कंपनियों के अधिकारियों से निवेश और विनिर्माण साझेदारी पर चर्चा होगी।
शिकागो में गांधी जयंती पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि और प्रवासी भारतीयों से संवाद भी कार्यक्रम में शामिल।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल 29 सितंबर से 5 अक्टूबर 2026 तक अमेरिका के सप्ताहभर के दौरे पर रहेंगे, जहाँ वह G20 व्यापार मंत्रियों की बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे और प्रस्तावित भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) पर वार्ता को आगे बढ़ाएंगे। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने 28 सितंबर को इस दौरे की पुष्टि करते हुए बताया कि यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत के व्यापार और निवेश संबंधों को नई मज़बूती देना है।

G20 व्यापार बैठक: मिल्वौकी में भारत की भूमिका

30 सितंबर और 1 अक्टूबर को विस्कॉन्सिन राज्य के मिल्वौकी में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) के निमंत्रण पर G20 देशों के व्यापार मंत्रियों की बैठक आयोजित होगी। इसमें वैश्विक व्यापार के प्रमुख मुद्दों और बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली के भविष्य पर विचार-विमर्श होगा। मंत्रालय के अनुसार, भारत इस मंच पर विश्व व्यापार संगठन (WTO) की केंद्रीय भूमिका, नियम-आधारित और भेदभावरहित व्यापार व्यवस्था तथा विकासशील देशों के लिए पर्याप्त नीतिगत लचीलेपन की पुरज़ोर पैरवी करेगा।

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक व्यापार तनाव और संरक्षणवादी रुझानों के बीच WTO की प्रासंगिकता पर अंतरराष्ट्रीय बहस तेज़ है। G20 मंच पर भारत की सक्रियता इस बात का संकेत है कि नई दिल्ली बहुपक्षवाद को व्यापार नीति की धुरी मानती है।

भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौता: वार्ता की नई गति

दौरे का सबसे अहम पड़ाव भारत-अमेरिका BTA पर होने वाली बातचीत होगी। गोयल USTR के साथ बैठक कर दोनों देशों के बीच संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार समझौते की दिशा में जारी वार्ता को आगे बढ़ाएंगे। दोनों देश 7 फरवरी 2026 को जारी संयुक्त बयान के अनुरूप एक अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने पर भी काम करेंगे।

गौरतलब है कि यह वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार $190 अरब से अधिक हो चुका है और दोनों देश इसे और विस्तारित करने पर सहमत हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि BTA को अंतिम रूप दिया जाता है, तो यह भारतीय निर्यातकों — विशेषकर कृषि, वस्त्र और फार्मास्यूटिकल क्षेत्र — के लिए नए द्वार खोल सकता है।

व्यापारिक प्राथमिकताएँ: किसान, MSME और स्टार्टअप

G20 बैठक के अलावा गोयल कई देशों के समकक्ष मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इन चर्चाओं का केंद्र किसानों, मछुआरों, महिला उद्यमियों, स्टार्टअप्स और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए नए व्यापारिक अवसर सृजित करना रहेगा।

इसके साथ ही वह मिल्वौकी और शिकागो में विनिर्माण, उपभोक्ता वस्तुओं, कृषि व्यवसाय, रिटेल और प्रौद्योगिकी क्षेत्र की अग्रणी अमेरिकी कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। इन बैठकों में भारत में निवेश की संभावनाओं, विनिर्माण विस्तार और कारोबारी साझेदारी के अवसरों पर विस्तृत चर्चा अपेक्षित है।

उद्योग गोलमेज और प्रवासी भारतीयों से संवाद

गोयल विभिन्न उद्योग समूहों, स्टार्टअप्स और नवाचार-आधारित कंपनियों के साथ गोलमेज बैठकों में भी शामिल होंगे, जहाँ वह भारत को एक उभरते वैश्विक विनिर्माण और निवेश केंद्र के रूप में प्रस्तुत करेंगे। शिकागो प्रवास के दौरान वह गांधी जयंती के अवसर पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे, स्वामी विवेकानंद को भी नमन करेंगे और भारतीय मूल के पेशेवर संगठनों तथा प्रवासी भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों से संवाद करेंगे।

यह दौरा भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों की दिशा तय करने में एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकता है — खासकर जब BTA वार्ता के नतीजे पर दोनों देशों के व्यापार जगत की नज़रें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी बाज़ार पहुँच, टैरिफ और डेटा प्रवाह पर गहरे मतभेद बने हुए हैं। G20 मंच पर WTO की वकालत करना और साथ ही द्विपक्षीय समझौते की मेज़ पर बैठना — यह दोहरी रणनीति तब तक टिकाऊ है जब तक दोनों एजेंडे एक-दूसरे के विरोध में न आ जाएं। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक जाती है वह यह है कि MSME और किसानों के लिए 'नए अवसर' का वादा तब तक खोखला रहेगा जब तक BTA में कृषि और श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए ठोस बाज़ार-पहुँच प्रावधान न हों।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीयूष गोयल का अमेरिका दौरा कब और क्यों है?
केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल 29 सितंबर से 5 अक्टूबर 2026 तक अमेरिका दौरे पर हैं। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य मिल्वौकी में G20 व्यापार मंत्रियों की बैठक में भाग लेना और भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) पर वार्ता को आगे बढ़ाना है।
G20 व्यापार मंत्रियों की बैठक कहाँ और कब होगी?
यह बैठक 30 सितंबर और 1 अक्टूबर 2026 को अमेरिका के विस्कॉन्सिन राज्य के मिल्वौकी शहर में आयोजित होगी। इसका आयोजन अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) के निमंत्रण पर हो रहा है, जिसमें G20 देशों के व्यापार मंत्री वैश्विक व्यापार और WTO के भविष्य पर चर्चा करेंगे।
भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) की मौजूदा स्थिति क्या है?
दोनों देश 7 फरवरी 2026 को जारी संयुक्त बयान के अनुरूप एक अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काम कर रहे हैं। गोयल इस दौरे में USTR के साथ बैठक कर इन वार्ताओं को आगे बढ़ाएंगे, जिनका लक्ष्य संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी समझौता तैयार करना है।
इस दौरे से भारतीय MSME और किसानों को क्या फायदा हो सकता है?
द्विपक्षीय वार्ताओं में किसानों, मछुआरों, महिला उद्यमियों, स्टार्टअप्स और MSME के लिए नए व्यापारिक अवसर सृजित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। मिल्वौकी और शिकागो में अमेरिकी कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठकों में भारत में निवेश और विनिर्माण विस्तार की संभावनाओं पर भी चर्चा होगी।
G20 बैठक में भारत किन मुद्दों को उठाएगा?
भारत इस बैठक में नियम-आधारित, खुली, समावेशी, पारदर्शी और भेदभावरहित वैश्विक व्यापार व्यवस्था की वकालत करेगा। इसके साथ ही भारत WTO की केंद्रीय भूमिका को बनाए रखने और विकासशील देशों के लिए पर्याप्त नीतिगत लचीलेपन की आवश्यकता पर भी जोर देगा।
राष्ट्र प्रेस
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