मिल्वौकी में जी20 व्यापार बैठक: पीयूष गोयल ने भारत का पक्ष रखा, 'मिल्वौकी फ्रेमवर्क' पर सहमति
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 1 अक्टूबर 2026 को मिल्वौकी में शुरू हुई जी20 व्यापार मंत्रियों की दो दिवसीय बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। इस बैठक में दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के व्यापार मंत्री एकत्रित हुए हैं और वैश्विक व्यापार प्रणाली के भविष्य पर विचार-विमर्श चल रहा है।
मुख्य घटनाक्रम: मिल्वौकी फ्रेमवर्क पर सहमति
बैठक का पहला बड़ा नतीजा ग्लोबल फोरम ऑन स्टील एक्सेस कैपेसिटी की बैठक से आया, जहाँ हिस्सा लेने वाले देशों ने अतिरिक्त स्टील उत्पादन के विरुद्ध समन्वित कार्रवाई के लिए एक नए ढाँचे पर सहमति जताई। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर, जो इस बैठक की मेज़बानी कर रहे हैं, ने कहा कि 'मिल्वौकी फ्रेमवर्क' अधिक क्षमता के खिलाफ मजबूत और समन्वित कार्रवाई की माँग करेगा।
इस फ्रेमवर्क में व्यापार उपायों, स्टील सप्लाई चेन की निगरानी और ट्रांसशिपमेंट की अधिक जाँच जैसे प्रावधान शामिल हैं। जब ग्रीर से पूछा गया कि क्या देशों ने चीनी स्टील पर टैरिफ बढ़ाने पर सहमति जताई है, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि हर देश अपना फैसला खुद लेगा। उन्होंने कहा, 'हर देश वही करेगा, जो उसे उचित लगेगा। हम इन उपायों में समन्वय चाहते हैं। अमेरिका ने मजबूत कदम उठाए हैं और शायद दूसरे देशों के लिए भी ऐसा करना सही होगा।'
भारत का रुख: डब्ल्यूटीओ-केंद्रित बहुपक्षवाद पर जोर
भारत ने इस बैठक में स्पष्ट किया कि वह नियम-आधारित, खुली, समावेशी, पारदर्शी, न्यायसंगत और गैर-भेदभावपूर्ण बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली के लिए काम करेगा, जिसके केंद्र में विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) होगा। साथ ही भारत ने विकासशील देशों के लिए पर्याप्त नीतिगत स्थान सुनिश्चित किए जाने पर भी बल दिया।
यह रुख इसलिए विशेष रूप से अहम है क्योंकि अमेरिका ने मिल्वौकी के एजेंडे में मोस्ट-फेवर्ड-नेशन (MFN) सिद्धांत को अपडेट करने का मुद्दा रखा है, जो डब्ल्यूटीओ व्यापार प्रणाली की बुनियादी नींव में से एक माना जाता है। गौरतलब है कि यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब टैरिफ को लेकर तनाव, औद्योगिक क्षमता के अधिक होने की चिंता और वैश्विक व्यापार प्रणाली के भविष्य को लेकर बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच मतभेद गहरे हो रहे हैं।
भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत
वाणिज्य मंत्रालय ने बताया कि पीयूष गोयल अपने अमेरिकी समकक्ष के साथ द्विपक्षीय बातचीत करेंगे, जो 7 फरवरी 2026 के संयुक्त बयान के अनुरूप संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) को आगे बढ़ाने का हिस्सा है। नई दिल्ली और वाशिंगटन दोनों अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश में लगे हैं।
इन वार्ताओं को उस दिन और अधिक राजनीतिक महत्व मिल गया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं ने व्यापार, रक्षा, ऊर्जा और नई तकनीकों सहित द्विपक्षीय सहयोग पर विस्तार से चर्चा की।
अमेरिकी उद्योग जगत से संवाद
औपचारिक चर्चा से पहले पीयूष गोयल ने नेशनल एसोसिएशन ऑफ मैन्युफैक्चरर्स द्वारा आयोजित एक गोलमेज बैठक में अमेरिकी कंपनियों के सीईओ और वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की और उन्हें भारत में निवेश बढ़ाने का निमंत्रण दिया। यह कदम ऐसे समय में आया है जब भारत खुद को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग और निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करने की कोशिश में है।
आगे की राह
यह दो दिवसीय बैठक जी20 के स्तर पर वैश्विक व्यापार संरचना पर आम सहमति बनाने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। भारत के लिए यह बैठक बहुपक्षवाद की रक्षा और अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते को गति देने, दोनों मोर्चों पर एक साथ काम करने का मंच बन गई है।