भारत-EU FTA को लागू करने की दिशा में तेज़ प्रगति, पीयूष गोयल ने मिल्वौकी में शेफचोविच से की समीक्षा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 1 अक्टूबर 2026 को मिल्वौकी में जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक के इतर यूरोपीय संघ के व्यापार एवं आर्थिक सुरक्षा आयुक्त मारोस शेफचोविच से मुलाकात की और भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर तथा उसे लागू करने की दिशा में हुई प्रगति की समीक्षा की। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब यूरोपीय आयोग पहले ही इस समझौते को EU परिषद के पास अंतिम मंजूरी के लिए भेज चुका है।
बैठक में क्या हुआ
गोयल ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर जानकारी दी कि इस बैठक में भारत-EU ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल, विश्व व्यापार संगठन (WTO) में सुधार और जी20 के साझा प्राथमिकता वाले मुद्दों पर भी विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग को नई ऊँचाइयों तक ले जाने के लिए निरंतर प्रयास जारी रहेंगे।
गौरतलब है कि 27 जनवरी 2026 को भारत और यूरोपीय संघ ने इस मुक्त व्यापार समझौते पर वार्ता सफलतापूर्वक पूरी की थी — एक ऐसी उपलब्धि जो 2007 में शुरू हुई और 2012 में ठप पड़ गई बातचीत के 2022 में पुनः आरंभ होने के बाद संभव हुई।
FTA की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
यह समझौता लगभग 17 वर्षों की कूटनीतिक मेहनत का परिणाम है। अक्टूबर में यूरोपीय आयोग ने इसे EU परिषद के पास हस्ताक्षर और अंतिम अनुमोदन के लिए भेज दिया — जो इस प्रक्रिया का निर्णायक चरण है। एक बार EU परिषद की मंजूरी मिल जाने के बाद यह समझौता कानूनी रूप से बाध्यकारी हो जाएगा।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपने निर्यात आधार को विविध बनाने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में मज़बूत स्थान हासिल करने की रणनीति पर काम कर रहा है। EU भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक है और यह FTA दोनों पक्षों के बीच व्यापार व निवेश के नए अवसर खोलेगा।
सरकार का दृष्टिकोण
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने इससे पहले सितंबर 2026 में कहा था कि यह FTA दोनों पक्षों के बीच व्यापार और निवेश के नए अवसर पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने तकनीकी हस्तांतरण, स्थानीय विनिर्माण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को भारत के औद्योगिक विकास की अगली पीढ़ी की आधारशिला बताया।
प्रसाद ने यह भी रेखांकित किया था कि भारत में आने वाली विदेशी कंपनियों को केवल पूँजी निवेश तक सीमित न रहते हुए संयुक्त उद्यमों और तकनीकी हस्तांतरण के ज़रिये देश की विनिर्माण क्षमताओं को मज़बूत करना चाहिए।
एमएसएमई और निर्यात पर असर
सरकार का मानना है कि AI के व्यापक उपयोग से उत्पादकता बढ़ाने और उत्पादन लागत कम करने में मदद मिल सकती है — विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए, जो भारत के निर्यात ढाँचे की रीढ़ माने जाते हैं। भारतीय उत्पादों की गुणवत्ता को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने और निर्यात बढ़ाने पर विशेष ज़ोर दिया जाएगा।
आगे क्या
फ़िलहाल सभी नज़रें EU परिषद की मंजूरी प्रक्रिया पर टिकी हैं, जिसके बाद समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर होंगे। भारत सरकार और EU दोनों पक्षों के अधिकारी इस प्रक्रिया को तेज़ी से आगे बढ़ाने के लिए नियमित संपर्क में हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह FTA भारत-EU द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को गुणात्मक रूप से नया आयाम देगा।