1 अक्टूबर 2026
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भारत-EU FTA को लागू करने की दिशा में तेज़ प्रगति, पीयूष गोयल ने मिल्वौकी में शेफचोविच से की समीक्षा

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भारत-EU FTA को लागू करने की दिशा में तेज़ प्रगति, पीयूष गोयल ने मिल्वौकी में शेफचोविच से की समीक्षा

सारांश

लगभग 17 वर्षों की वार्ता के बाद जनवरी 2026 में सफलतापूर्वक पूरा हुआ भारत-EU FTA अब अंतिम मंजूरी की दहलीज़ पर है। मिल्वौकी में जी20 बैठक के इतर पीयूष गोयल और शेफचोविच की मुलाकात यह संकेत देती है कि दोनों पक्ष इस ऐतिहासिक समझौते को जल्द से जल्द लागू करने को लेकर गंभीर हैं।

मुख्य बातें

पीयूष गोयल ने 1 अक्टूबर 2026 को मिल्वौकी में EU आयुक्त मारोस शेफचोविच से मुलाकात कर भारत-EU FTA की प्रगति की समीक्षा की।
भारत और EU ने 27 जनवरी 2026 को FTA वार्ता सफलतापूर्वक पूरी की थी, जो 2007 में शुरू हुई थी।
यूरोपीय आयोग ने समझौते को EU परिषद के पास हस्ताक्षर और अंतिम मंजूरी के लिए भेज दिया है।
बैठक में भारत-EU ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल , WTO सुधार और जी20 प्राथमिकताओं पर भी चर्चा हुई।
राज्य मंत्री जितिन प्रसाद के अनुसार यह FTA MSME , तकनीकी हस्तांतरण और AI -आधारित विनिर्माण को बड़ा प्रोत्साहन देगा।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 1 अक्टूबर 2026 को मिल्वौकी में जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक के इतर यूरोपीय संघ के व्यापार एवं आर्थिक सुरक्षा आयुक्त मारोस शेफचोविच से मुलाकात की और भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर तथा उसे लागू करने की दिशा में हुई प्रगति की समीक्षा की। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब यूरोपीय आयोग पहले ही इस समझौते को EU परिषद के पास अंतिम मंजूरी के लिए भेज चुका है।

बैठक में क्या हुआ

गोयल ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर जानकारी दी कि इस बैठक में भारत-EU ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल, विश्व व्यापार संगठन (WTO) में सुधार और जी20 के साझा प्राथमिकता वाले मुद्दों पर भी विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग को नई ऊँचाइयों तक ले जाने के लिए निरंतर प्रयास जारी रहेंगे।

गौरतलब है कि 27 जनवरी 2026 को भारत और यूरोपीय संघ ने इस मुक्त व्यापार समझौते पर वार्ता सफलतापूर्वक पूरी की थी — एक ऐसी उपलब्धि जो 2007 में शुरू हुई और 2012 में ठप पड़ गई बातचीत के 2022 में पुनः आरंभ होने के बाद संभव हुई।

FTA की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

यह समझौता लगभग 17 वर्षों की कूटनीतिक मेहनत का परिणाम है। अक्टूबर में यूरोपीय आयोग ने इसे EU परिषद के पास हस्ताक्षर और अंतिम अनुमोदन के लिए भेज दिया — जो इस प्रक्रिया का निर्णायक चरण है। एक बार EU परिषद की मंजूरी मिल जाने के बाद यह समझौता कानूनी रूप से बाध्यकारी हो जाएगा।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपने निर्यात आधार को विविध बनाने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में मज़बूत स्थान हासिल करने की रणनीति पर काम कर रहा है। EU भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक है और यह FTA दोनों पक्षों के बीच व्यापार व निवेश के नए अवसर खोलेगा।

सरकार का दृष्टिकोण

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने इससे पहले सितंबर 2026 में कहा था कि यह FTA दोनों पक्षों के बीच व्यापार और निवेश के नए अवसर पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने तकनीकी हस्तांतरण, स्थानीय विनिर्माण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को भारत के औद्योगिक विकास की अगली पीढ़ी की आधारशिला बताया।

प्रसाद ने यह भी रेखांकित किया था कि भारत में आने वाली विदेशी कंपनियों को केवल पूँजी निवेश तक सीमित न रहते हुए संयुक्त उद्यमों और तकनीकी हस्तांतरण के ज़रिये देश की विनिर्माण क्षमताओं को मज़बूत करना चाहिए।

एमएसएमई और निर्यात पर असर

सरकार का मानना है कि AI के व्यापक उपयोग से उत्पादकता बढ़ाने और उत्पादन लागत कम करने में मदद मिल सकती है — विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए, जो भारत के निर्यात ढाँचे की रीढ़ माने जाते हैं। भारतीय उत्पादों की गुणवत्ता को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने और निर्यात बढ़ाने पर विशेष ज़ोर दिया जाएगा।

आगे क्या

फ़िलहाल सभी नज़रें EU परिषद की मंजूरी प्रक्रिया पर टिकी हैं, जिसके बाद समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर होंगे। भारत सरकार और EU दोनों पक्षों के अधिकारी इस प्रक्रिया को तेज़ी से आगे बढ़ाने के लिए नियमित संपर्क में हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह FTA भारत-EU द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को गुणात्मक रूप से नया आयाम देगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा EU परिषद की अनुमोदन प्रक्रिया में है, जो यूरोपीय सदस्य देशों की घरेलू राजनीतिक जटिलताओं के कारण अप्रत्याशित रूप से लंबी खिंच सकती है। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूक जाती है वह यह है कि भारत के कुछ क्षेत्रों — विशेष रूप से डेयरी और कृषि — पर EU के खुलेपन का दबाव अभी भी एक संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है। तकनीकी हस्तांतरण और MSME एकीकरण पर जो वादे किए गए हैं, उनके लिए ठोस क्रियान्वयन ढाँचा तय होना अभी बाकी है — बिना इसके यह समझौता बड़े निर्यातकों को अनुपातहीन लाभ देते हुए छोटे उद्यमों को पीछे छोड़ सकता है।
RashtraPress
1 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-EU मुक्त व्यापार समझौता (FTA) क्या है?
भारत-EU FTA दोनों पक्षों के बीच 27 जनवरी 2026 को पूरी हुई एक द्विपक्षीय व्यापार वार्ता है, जिसमें शुल्क कटौती, निवेश सुविधा और तकनीकी सहयोग शामिल हैं। इस वार्ता की शुरुआत 2007 में हुई थी और 2022 में इसे पुनः शुरू किया गया था।
भारत-EU FTA को लागू होने में अभी कितना समय लगेगा?
यूरोपीय आयोग ने समझौते को EU परिषद के पास अंतिम मंजूरी के लिए भेज दिया है। EU परिषद की मंजूरी के बाद औपचारिक हस्ताक्षर होंगे, जिसके बाद ही यह समझौता लागू माना जाएगा। इस प्रक्रिया की समयसीमा अभी निर्धारित नहीं है।
पीयूष गोयल की मिल्वौकी बैठक का क्या महत्व है?
1 अक्टूबर 2026 को जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक के इतर पीयूष गोयल और EU आयुक्त मारोस शेफचोविच की मुलाकात ने FTA की प्रगति, भारत-EU ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल और WTO सुधारों पर दोनों पक्षों की प्रतिबद्धता की पुष्टि की। यह बैठक समझौते को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम है।
भारत-EU FTA से MSME और निर्यातकों को क्या फायदा होगा?
सरकार का मानना है कि यह FTA भारतीय MSME के लिए यूरोपीय बाज़ारों में प्रवेश आसान करेगा और AI तथा तकनीकी हस्तांतरण के ज़रिये उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिलेगी। हालाँकि, इसके लिए भारतीय उत्पादों को वैश्विक गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरना होगा।
भारत-EU FTA वार्ता इतने लंबे समय तक क्यों रुकी रही?
2007 में शुरू हुई यह वार्ता 2012 के आसपास मुख्य रूप से शुल्क संरचना, बौद्धिक संपदा अधिकार और सरकारी खरीद जैसे मुद्दों पर मतभेद के कारण ठप हो गई थी। 2022 में इसे पुनः शुरू किया गया और जनवरी 2026 में यह सफलतापूर्वक पूरी हुई।
राष्ट्र प्रेस
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