4 नवंबर 2026
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मेघालय CM कोनराड संगमा बोले — शिक्षा के हर फैसले में छात्र हों केंद्र, ₹4,000 करोड़ सालाना खर्च पर्याप्त नहीं

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मेघालय CM कोनराड संगमा बोले — शिक्षा के हर फैसले में छात्र हों केंद्र, ₹4,000 करोड़ सालाना खर्च पर्याप्त नहीं

सारांश

मेघालय के CM कोनराड संगमा ने शिलांग में साफ कहा — ₹4,000 करोड़ सालाना खर्च के बावजूद जब तक छात्र हर फैसले के केंद्र में नहीं होंगे, शिक्षा की गुणवत्ता नहीं बदलेगी। 'सीएम इंपैक्ट' से SSLC पास दर 50% से 90% से ऊपर पहुँची, अब 700+ स्कूलों को सहायता देने की योजना।

मुख्य बातें

मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड के.
संगमा ने 4 नवंबर 2026 को शिलांग में कहा कि शिक्षा के हर निर्णय के केंद्र में छात्र होने चाहिए।
सरकार के 'सीएम इंपैक्ट' कार्यक्रम से SSLC उत्तीर्ण दर 50% से बढ़कर 90% से ऊपर पहुँची।
मेघालय में 9,000 लोअर प्राइमरी स्कूल हैं, लेकिन हायर सेकेंडरी स्कूल केवल 500 और कॉलेज 100 से थोड़े अधिक हैं।
राज्य शिक्षा पर सालाना ₹4,000 करोड़ खर्च करता है; संगमा ने कहा कि खर्च नहीं, गुणवत्ता ही मापदंड होनी चाहिए।
सरकार 700 से अधिक सेकेंडरी व हायर सेकेंडरी स्कूलों को वित्तीय सहायता देने की टिकाऊ योजना पर काम कर रही है।

मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड के. संगमा ने 4 नवंबर 2026 को शिलांग में स्पष्ट किया कि राज्य के शिक्षा क्षेत्र में सुधार के लिए केवल बुनियादी ढाँचे और सरकारी खर्च बढ़ाना नाकाफी है — असली बदलाव तभी आएगा जब हर नीतिगत निर्णय के केंद्र में छात्र होंगे। वे प्रेस्बिटेरियन हायर सेकेंडरी स्कूल की 126वीं वर्षगांठ समारोह में बोल रहे थे, जहाँ उन्होंने स्कूल के नए हायर सेकेंडरी सेक्शन का उद्घाटन किया और ऑडिटोरियम की आधारशिला रखी।

मुख्य घटनाक्रम

संगमा ने समारोह में शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे शक्तिशाली माध्यम बताया। उन्होंने कहा, 'अंततः, हमें शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर बनाने के लिए प्रयास करना चाहिए। यह तभी संभव होगा जब हम अपने सभी निर्णयों के केंद्र में छात्रों को रखें।' उन्होंने शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन समितियों से भी आग्रह किया कि वे प्रत्येक बच्चे की व्यक्तिगत क्षमताओं, सीखने की गति और आवश्यकताओं का ध्यान रखें।

एसएसएलसी उत्तीर्ण दर में बड़ा सुधार

मुख्यमंत्री ने बताया कि एक समय मेघालय में लगभग 50 प्रतिशत छात्र एसएसएलसी परीक्षाओं में अनुत्तीर्ण हो जाते थे, जिससे हज़ारों युवाओं के सपने अधूरे रह जाते थे। सरकार के 'सीएम इंपैक्ट' कार्यक्रम के ज़रिये यह उत्तीर्ण प्रतिशत 90 प्रतिशत से ऊपर पहुँच गया है। गौरतलब है कि यह सुधार तकनीकी हस्तक्षेप और लक्षित उपचारात्मक शिक्षण के संयोजन से संभव हुआ।

उच्च शिक्षण संस्थानों की भारी कमी

संगमा ने राज्य में शिक्षा के ढाँचागत असंतुलन को भी रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि मेघालय में लगभग 9,000 लोअर प्राइमरी स्कूल हैं, जबकि हायर सेकेंडरी स्कूलों की संख्या मात्र 500 के आसपास और कॉलेजों की संख्या 100 से थोड़ी अधिक है। उन्होंने कहा, 'यह एक बड़ी चुनौती पैदा करता है और इसके कारण छात्र पढ़ाई बीच में ही छोड़ देते हैं। हमें और अधिक हायर सेकेंडरी स्कूलों और कॉलेजों की जरूरत है, लेकिन ऐसे बदलावों में समय लगता है।'

सरकार की प्रतिक्रिया और वित्तीय प्रतिबद्धता

राज्य सरकार शिक्षा पर सालाना लगभग ₹4,000 करोड़ खर्च करती है। हालाँकि, संगमा ने स्पष्ट किया कि खर्च की गई राशि ही सफलता का एकमात्र पैमाना नहीं होनी चाहिए। साथ ही, उन्होंने बताया कि सरकार 700 से अधिक ऐसे सेकेंडरी और हायर सेकेंडरी स्कूलों को वित्तीय सहायता देने की एक निष्पक्ष और टिकाऊ योजना पर काम कर रही है, जिन्हें अभी तक कोई सरकारी मदद नहीं मिल रही है।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर भारत के कई राज्य शिक्षा की गुणवत्ता और नामांकन दर के बीच की खाई पाटने की कोशिश कर रहे हैं। मेघालय सरकार का इरादा स्पष्ट है — आने वाले वर्षों में शिक्षा के बुनियादी ढाँचे के विस्तार के साथ-साथ परिणामोन्मुखी नीतियाँ लागू करना, ताकि हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि '700 से अधिक स्कूलों को सहायता' की 'टिकाऊ योजना' की समयसीमा और मापदंड क्या होंगे — इसका जवाब अभी नहीं मिला। 'सीएम इंपैक्ट' की सफलता स्वागतयोग्य है, पर पास दर बढ़ने और सीखने की वास्तविक गुणवत्ता में सुधार के बीच का अंतर पूर्वोत्तर के कई राज्यों में एक पुरानी समस्या रही है। मेघालय में 9,000 प्राइमरी स्कूलों के मुकाबले मात्र 500 हायर सेकेंडरी स्कूल होना ड्रॉपआउट का सबसे बड़ा संरचनात्मक कारण है — इसे बदलने के लिए वित्तीय प्रतिबद्धता नहीं, बल्कि राजनीतिक इच्छाशक्ति और बजट पुनर्आवंटन की ज़रूरत है।
RashtraPress
4 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मेघालय CM कोनराड संगमा ने शिक्षा पर क्या कहा?
मुख्यमंत्री कोनराड के. संगमा ने 4 नवंबर 2026 को शिलांग में कहा कि शिक्षा क्षेत्र में हर नीतिगत फैसले के केंद्र में छात्र होने चाहिए और केवल बुनियादी ढाँचे या सरकारी खर्च बढ़ाने से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित नहीं होगी। वे प्रेस्बिटेरियन हायर सेकेंडरी स्कूल की 126वीं वर्षगांठ समारोह में बोल रहे थे।
मेघालय में 'सीएम इंपैक्ट' कार्यक्रम क्या है?
'सीएम इंपैक्ट' मेघालय सरकार का एक शैक्षिक सुधार कार्यक्रम है, जिसकी मदद से राज्य में SSLC (कक्षा 10) परीक्षाओं की उत्तीर्ण दर करीब 50 प्रतिशत से बढ़कर 90 प्रतिशत से ऊपर पहुँच गई है। यह कार्यक्रम लक्षित उपचारात्मक शिक्षण और तकनीकी हस्तक्षेप पर केंद्रित है।
मेघालय में हायर सेकेंडरी स्कूलों की स्थिति क्या है?
मेघालय में लगभग 9,000 लोअर प्राइमरी स्कूल हैं, जबकि हायर सेकेंडरी स्कूलों की संख्या केवल 500 के आसपास और कॉलेजों की संख्या 100 से थोड़ी अधिक है। यह असंतुलन छात्रों में ड्रॉपआउट का एक प्रमुख कारण है।
मेघालय सरकार शिक्षा पर कितना खर्च करती है?
मेघालय सरकार शिक्षा क्षेत्र पर सालाना लगभग ₹4,000 करोड़ खर्च करती है। हालाँकि, CM संगमा ने खुद कहा कि खर्च की गई राशि नहीं, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता ही सफलता का असली पैमाना होनी चाहिए।
700 से अधिक स्कूलों को सरकारी सहायता कब तक मिलेगी?
CM संगमा ने बताया कि सरकार 700 से अधिक ऐसे सेकेंडरी और हायर सेकेंडरी स्कूलों को वित्तीय सहायता देने के लिए एक निष्पक्ष और टिकाऊ योजना पर काम कर रही है, जिन्हें अभी तक कोई सरकारी मदद नहीं मिल रही। इस योजना की सटीक समयसीमा अभी घोषित नहीं की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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