शिक्षकों की गुणवत्ता ही शिक्षा सुधार की नींव: मेघालय CM कॉनराड संगमा का 65वें शिक्षक दिवस पर संबोधन
सारांश
मुख्य बातें
मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने बुधवार, 2 सितंबर को स्पष्ट किया कि शिक्षा व्यवस्था में वास्तविक बदलाव तभी संभव है जब शिक्षकों की गुणवत्ता उच्च हो। तुरा में आयोजित 65वें शिक्षक दिवस के राज्य-स्तरीय समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बुनियादी ढाँचे और सरकारी योजनाओं की सफलता समर्पित शिक्षकों पर निर्भर करती है।
मुख्यमंत्री का केंद्रीय संदेश
संगमा ने अपने संबोधन में कहा, 'कोई भी शिक्षा प्रणाली अपने शिक्षकों की गुणवत्ता से बेहतर नहीं हो सकती, चाहे हम इमारतों पर कितना भी पैसा खर्च करें या कितनी भी योजनाएँ शुरू करें।' उन्होंने दूर-दराज के इलाकों और सिंगल-टीचर वाले स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों को विशेष रूप से सम्मान का हकदार बताया, भले ही उनके योगदान को सार्वजनिक रूप से पर्याप्त सराहना न मिलती हो।
मिशन एजुकेशन और बुनियादी ढाँचे में निवेश
मुख्यमंत्री ने बताया कि 2018 से स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार की शुरुआत के समय प्रारंभिक आकलन में ₹3,000 करोड़ की आवश्यकता थी। उन्होंने कहा, 'मैंने स्क्रीन की ओर देखा और कहा कि मेरे पास ₹3,000 करोड़ नहीं हैं, लेकिन फिर मैंने कहा, चलो शुरुआत करते हैं, भले ही 10 स्कूलों से ही सही। हर लंबी यात्रा पहले कदम से ही शुरू होती है।' 'मिशन एजुकेशन' के अंतर्गत अब तक 2,000 से अधिक सरकारी प्राथमिक विद्यालयों के बुनियादी ढाँचे को अपग्रेड किया जा चुका है, जबकि हायर सेकेंडरी स्कूलों की संख्या 427 से बढ़कर 545 हो गई है।
मुख्यमंत्री विशेष विकास कोष से शिक्षा को सर्वाधिक हिस्सा
संगमा ने बताया कि उनके 'मुख्यमंत्री विशेष विकास कोष' में शिक्षा क्षेत्र को सबसे बड़ी हिस्सेदारी दी गई है। पिछले आठ वित्तीय वर्षों में इस कोष से खर्च किए गए ₹300–400 करोड़ में से लगभग ₹150–180 करोड़ शिक्षा पर व्यय हुए हैं।
सीखने के परिणामों में उल्लेखनीय सुधार
मेघालय ने परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स में एक ही वर्ष में 'आकांक्षी-3' से 'आकांक्षी-1' का स्तर हासिल किया है और राज्य का स्कोर 448 से बढ़कर 525.7 अंक हो गया है। इस वर्ष SSLC पास प्रतिशत 97.2% और HSSLC पास प्रतिशत 86.6% रहा, जबकि 10वीं से 11वीं कक्षा में जाने वाले छात्रों का अनुपात बढ़कर 82.1% हो गया। मुख्यमंत्री ने 'मेघालय स्कूल परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स' का भी उल्लेख किया, जिसमें राज्य के 12 जिलों के सभी 11,443 स्कूल शामिल हैं।
शिक्षकों से पुनः उद्देश्य से जुड़ने का आह्वान
संगमा ने शिक्षकों को अपने मूल उद्देश्य की याद दिलाते हुए कहा, 'हर शिक्षक का मकसद युवाओं के जीवन को संवारना होता है और युवाओं को संवारते हुए आप देश का भविष्य भी संवारते हैं।' उन्होंने अधिकारियों और शिक्षकों से आग्रह किया कि हर नीतिगत निर्णय इस एक प्रश्न पर केंद्रित होना चाहिए — क्या यह छात्रों के हित में है। यह संदेश ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन की गति राज्यों में अलग-अलग बनी हुई है।