2 सितंबर 2026
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शिक्षकों की गुणवत्ता ही शिक्षा सुधार की नींव: मेघालय CM कॉनराड संगमा का 65वें शिक्षक दिवस पर संबोधन

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शिक्षकों की गुणवत्ता ही शिक्षा सुधार की नींव: मेघालय CM कॉनराड संगमा का 65वें शिक्षक दिवस पर संबोधन

सारांश

मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने 65वें शिक्षक दिवस पर साफ कहा — इमारतें और योजनाएँ काफी नहीं, असली बदलाव शिक्षकों की गुणवत्ता से आता है। मिशन एजुकेशन के तहत 2,000+ स्कूल अपग्रेड और परफॉर्मेंस इंडेक्स में एक साल में 'आकांक्षी-3' से 'आकांक्षी-1' की छलाँग — यह मेघालय की शिक्षा यात्रा का नया पड़ाव है।

मुख्य बातें

मेघालय CM कॉनराड के.
संगमा ने 2 सितंबर को तुरा में 65वें शिक्षक दिवस समारोह को संबोधित किया।
उन्होंने कहा कि शिक्षा सुधार के लिए शिक्षकों की गुणवत्ता सबसे अहम है, बुनियादी ढाँचे या योजनाओं से भी अधिक।
मिशन एजुकेशन के तहत 2,000 से अधिक सरकारी प्राथमिक स्कूलों का इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड; हायर सेकेंडरी स्कूल 427 से 545 हुए।
मेघालय का परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स स्कोर 448 से बढ़कर 525.7 ; एक वर्ष में 'आकांक्षी-3' से 'आकांक्षी-1' का स्तर हासिल।
इस वर्ष SSLC पास दर 97.2% , HSSLC पास दर 86.6% , और कक्षा 10 से 11 में संक्रमण दर 82.1% ।
मुख्यमंत्री विशेष विकास कोष से पिछले आठ वर्षों में ₹150–180 करोड़ शिक्षा क्षेत्र पर व्यय।

मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने बुधवार, 2 सितंबर को स्पष्ट किया कि शिक्षा व्यवस्था में वास्तविक बदलाव तभी संभव है जब शिक्षकों की गुणवत्ता उच्च हो। तुरा में आयोजित 65वें शिक्षक दिवस के राज्य-स्तरीय समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बुनियादी ढाँचे और सरकारी योजनाओं की सफलता समर्पित शिक्षकों पर निर्भर करती है।

मुख्यमंत्री का केंद्रीय संदेश

संगमा ने अपने संबोधन में कहा, 'कोई भी शिक्षा प्रणाली अपने शिक्षकों की गुणवत्ता से बेहतर नहीं हो सकती, चाहे हम इमारतों पर कितना भी पैसा खर्च करें या कितनी भी योजनाएँ शुरू करें।' उन्होंने दूर-दराज के इलाकों और सिंगल-टीचर वाले स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों को विशेष रूप से सम्मान का हकदार बताया, भले ही उनके योगदान को सार्वजनिक रूप से पर्याप्त सराहना न मिलती हो।

मिशन एजुकेशन और बुनियादी ढाँचे में निवेश

मुख्यमंत्री ने बताया कि 2018 से स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार की शुरुआत के समय प्रारंभिक आकलन में ₹3,000 करोड़ की आवश्यकता थी। उन्होंने कहा, 'मैंने स्क्रीन की ओर देखा और कहा कि मेरे पास ₹3,000 करोड़ नहीं हैं, लेकिन फिर मैंने कहा, चलो शुरुआत करते हैं, भले ही 10 स्कूलों से ही सही। हर लंबी यात्रा पहले कदम से ही शुरू होती है।' 'मिशन एजुकेशन' के अंतर्गत अब तक 2,000 से अधिक सरकारी प्राथमिक विद्यालयों के बुनियादी ढाँचे को अपग्रेड किया जा चुका है, जबकि हायर सेकेंडरी स्कूलों की संख्या 427 से बढ़कर 545 हो गई है।

मुख्यमंत्री विशेष विकास कोष से शिक्षा को सर्वाधिक हिस्सा

संगमा ने बताया कि उनके 'मुख्यमंत्री विशेष विकास कोष' में शिक्षा क्षेत्र को सबसे बड़ी हिस्सेदारी दी गई है। पिछले आठ वित्तीय वर्षों में इस कोष से खर्च किए गए ₹300–400 करोड़ में से लगभग ₹150–180 करोड़ शिक्षा पर व्यय हुए हैं।

सीखने के परिणामों में उल्लेखनीय सुधार

मेघालय ने परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स में एक ही वर्ष में 'आकांक्षी-3' से 'आकांक्षी-1' का स्तर हासिल किया है और राज्य का स्कोर 448 से बढ़कर 525.7 अंक हो गया है। इस वर्ष SSLC पास प्रतिशत 97.2% और HSSLC पास प्रतिशत 86.6% रहा, जबकि 10वीं से 11वीं कक्षा में जाने वाले छात्रों का अनुपात बढ़कर 82.1% हो गया। मुख्यमंत्री ने 'मेघालय स्कूल परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स' का भी उल्लेख किया, जिसमें राज्य के 12 जिलों के सभी 11,443 स्कूल शामिल हैं।

शिक्षकों से पुनः उद्देश्य से जुड़ने का आह्वान

संगमा ने शिक्षकों को अपने मूल उद्देश्य की याद दिलाते हुए कहा, 'हर शिक्षक का मकसद युवाओं के जीवन को संवारना होता है और युवाओं को संवारते हुए आप देश का भविष्य भी संवारते हैं।' उन्होंने अधिकारियों और शिक्षकों से आग्रह किया कि हर नीतिगत निर्णय इस एक प्रश्न पर केंद्रित होना चाहिए — क्या यह छात्रों के हित में है। यह संदेश ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन की गति राज्यों में अलग-अलग बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें एक ज़रूरी सवाल छुपा है — मेघालय में शिक्षक भर्ती, प्रशिक्षण और जवाबदेही की वास्तविक स्थिति क्या है? परफॉर्मेंस इंडेक्स में एक वर्ष में दो स्तर की छलाँग उत्साहजनक है, किंतु यह सुधार टिकाऊ है या परीक्षा-केंद्रित तैयारी का परिणाम, यह स्पष्ट नहीं। दूर-दराज के सिंगल-टीचर स्कूलों की बात तो की गई, पर उनके लिए ठोस नीतिगत घोषणा अनुपस्थित रही। ₹3,000 करोड़ की ज़रूरत के मुकाबले ₹150–180 करोड़ का वास्तविक शिक्षा व्यय यह भी दर्शाता है कि संसाधन और महत्वाकांक्षा के बीच की खाई अभी पाटी नहीं जा सकी है।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मेघालय CM कॉनराड संगमा ने शिक्षक दिवस पर क्या कहा?
मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने 2 सितंबर को तुरा में 65वें शिक्षक दिवस समारोह में कहा कि कोई भी शिक्षा प्रणाली अपने शिक्षकों की गुणवत्ता से बेहतर नहीं हो सकती। उन्होंने दूर-दराज के स्कूलों में काम करने वाले शिक्षकों को विशेष सम्मान का हकदार बताया।
मेघालय का मिशन एजुकेशन क्या है और इसके क्या नतीजे रहे?
मिशन एजुकेशन मेघालय सरकार की वह पहल है जिसके तहत 2018 से सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढाँचे को अपग्रेड किया जा रहा है। अब तक 2,000 से अधिक प्राथमिक स्कूलों का नवीनीकरण हो चुका है और हायर सेकेंडरी स्कूलों की संख्या 427 से बढ़कर 545 हो गई है।
मेघालय के परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स में क्या सुधार हुआ है?
मेघालय ने एक ही वर्ष में परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स में 'आकांक्षी-3' से 'आकांक्षी-1' का स्तर हासिल किया और स्कोर 448 से बढ़कर 525.7 अंक हो गया। इस सूचकांक में राज्य के 12 जिलों के सभी 11,443 स्कूल शामिल हैं।
मेघालय में इस वर्ष SSLC और HSSLC परीक्षाओं के परिणाम कैसे रहे?
इस वर्ष मेघालय में SSLC (10वीं) पास प्रतिशत 97.2% और HSSLC (12वीं) पास प्रतिशत 86.6% रहा। इसके अलावा, 10वीं से 11वीं कक्षा में जाने वाले छात्रों का अनुपात बढ़कर 82.1% हो गया है।
मुख्यमंत्री विशेष विकास कोष से शिक्षा पर कितना खर्च हुआ है?
पिछले आठ वित्तीय वर्षों में मुख्यमंत्री विशेष विकास कोष से खर्च किए गए ₹300–400 करोड़ में से लगभग ₹150–180 करोड़ शिक्षा क्षेत्र पर व्यय हुए हैं। CM संगमा के अनुसार शिक्षा को इस कोष में सबसे बड़ी हिस्सेदारी दी गई है।
राष्ट्र प्रेस
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