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मेघालय में 2,000 से अधिक स्कूलों का अपग्रेड, शिक्षा पर सालाना ₹4,000 करोड़ खर्च: CM कॉनराड संगमा

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मेघालय में 2,000 से अधिक स्कूलों का अपग्रेड, शिक्षा पर सालाना ₹4,000 करोड़ खर्च: CM कॉनराड संगमा

सारांश

मेघालय सरकार ने शिक्षा पर सालाना ₹4,000 करोड़ के निवेश और 2,000 से अधिक स्कूलों के अपग्रेड का दावा किया है। SSLC उत्तीर्ण दर 86.84% और राष्ट्रीय ग्रेडिंग स्कोर 448 से 525.71 तक पहुँचा — लेकिन ग्रामीण स्कूलों में बिजली, पानी और शिक्षकों की कमी अभी भी बड़ी चुनौती है।

मुख्य बातें

मेघालय सरकार शिक्षा पर सालाना ₹4,000 करोड़ खर्च करती है, जो कुल वार्षिक व्यय ₹20,000 करोड़ का बड़ा हिस्सा है।
मिशन एजुकेशन के तहत राज्य में 2,000 से अधिक स्कूलों का उन्नयन किया गया; 23 सितंबर को 80+ नए स्कूल भवनों का उद्घाटन।
इस वर्ष SSLC उत्तीर्ण प्रतिशत 86.84% और उच्च माध्यमिक परीक्षाओं में उत्तीर्ण दर 83% से अधिक रही।
राष्ट्रीय प्रदर्शन ग्रेडिंग इंडेक्स में मेघालय का स्कोर 2024 के 448 से बढ़कर 2026 में 525.71 हुआ।
CM इम्पैक्ट प्लस के तहत 700 स्कूलों को वित्तीय सहायता; CMSDF से ₹14 लाख की मदद से रिमरंगपारा उच्च माध्यमिक विद्यालय का जीर्णोद्धार।
ग्रामीण स्कूलों में बिजली, पेयजल, इंटरनेट, पुस्तकालय और शिक्षकों की कमी अभी भी बनी हुई है ; स्कूल-वार रोडमैप बनाने के निर्देश।

मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने 22 अक्टूबर 2026 को कहा कि राज्य सरकार शिक्षा क्षेत्र पर सालाना ₹4,000 करोड़ व्यय करती है, जो कुल वार्षिक बजट के लगभग ₹20,000 करोड़ का एक बड़ा हिस्सा है। यह घोषणा उन्होंने दक्षिण पश्चिम गारो हिल्स के रिमरंगपारा उच्च माध्यमिक विद्यालय के पुनर्निर्मित भवन के उद्घाटन अवसर पर की, जिसे मुख्यमंत्री विशेष विकास कोष (CMSD F) से ₹14 लाख की सहायता से तैयार किया गया।

मिशन एजुकेशन: बुनियादी ढाँचे में बड़े बदलाव

मुख्यमंत्री संगमा ने बताया कि मिशन एजुकेशन के अंतर्गत मेघालय भर में 2,000 से अधिक स्कूलों का उन्नयन किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त, 23 सितंबर को एक ही दिन 80 से अधिक नए स्कूल भवनों का उद्घाटन किया गया। उन्होंने यह भी बताया कि सीएम इम्पैक्ट प्लस कार्यक्रम के तहत राज्य के 700 स्कूलों को वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है।

गौरतलब है कि यह पहल ऐसे समय में आई है जब राज्य की शिक्षा व्यवस्था वर्षों से जर्जर भवनों, अपर्याप्त बुनियादी ढाँचे और शिक्षकों की कमी जैसी चुनौतियों से जूझती रही है।

शैक्षणिक परिणामों में सुधार

मुख्यमंत्री ने शैक्षणिक प्रगति के आँकड़े भी साझा किए। उन्होंने कहा, 'गारो हिल्स क्षेत्र में पिछले वर्षों में 75 प्रतिशत से अधिक बच्चे एसएसएलसी परीक्षा में असफल रहे।' अब इस वर्ष राज्य में माध्यमिक विद्यालय परिवीक्षा प्रमाणपत्र (SSLC) उत्तीर्ण प्रतिशत 86.84% दर्ज किया गया है, जबकि विज्ञान, कला और वाणिज्य स्ट्रीम में उच्च माध्यमिक परीक्षाओं में उत्तीर्ण प्रतिशत 83% से अधिक रहा है।

स्कूली शिक्षा के लिए राष्ट्रीय प्रदर्शन ग्रेडिंग इंडेक्स में मेघालय का स्कोर 2024 के 448 से बढ़कर 2026 में 525.71 हो गया है — जो राज्य की प्रगति का एक उल्लेखनीय संकेत है।

मौजूदा चुनौतियाँ और रोडमैप

संगमा ने स्वीकार किया कि कई ग्रामीण स्कूलों में अभी भी बिजली, पेयजल, इंटरनेट कनेक्टिविटी, पुस्तकालय, प्रयोगशालाएँ और पर्याप्त शिक्षकों की कमी बनी हुई है। इन कमियों को दूर करने के लिए शिक्षा विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि वह स्कूल-वार रोडमैप तैयार करे, जिसमें स्पष्ट समयसीमा और आवश्यक निधि का विवरण हो।

इसके साथ ही, उच्च शिक्षा तक पहुँच बढ़ाने के लिए नए कॉलेज और एक राज्य विश्वविद्यालय स्थापित करने की पहलों का भी उन्होंने उल्लेख किया।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों की माँग

कार्यक्रम में उपस्थित विधायक मेहताब चंदी ए. संगमा ने स्कूल के जीर्णोद्धार में सहयोग के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि गारो हिल्स के ग्रामीण क्षेत्रों में और अधिक उच्च माध्यमिक विद्यालय स्थापित किए जाएँ, ताकि कक्षा 10 की पढ़ाई पूरी करने के बाद छात्र शिक्षा बीच में न छोड़ें।

यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब पूर्वोत्तर भारत के कई राज्य ग्रामीण क्षेत्रों में माध्यमिक के बाद शिक्षा की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। NPP के नेतृत्व वाली मेघालय सरकार के लिए आगे की परीक्षा यही होगी कि घोषित रोडमैप समयसीमा के भीतर ज़मीन पर दिखे।

संपादकीय दृष्टिकोण

वहाँ सुधार की रफ़्तार सराहनीय है — पर इसे टिकाऊ बनाने के लिए स्कूल-वार रोडमैप का क्रियान्वयन ज़रूरी है, न केवल उसकी घोषणा। पूर्वोत्तर भारत में शिक्षा सुधार अक्सर उद्घाटनों की सुर्खियों में दिखता है, असल कसौटी यह है कि अगले दो-तीन वर्षों में ग्रामीण ड्रॉपआउट दर में कितनी गिरावट आती है।
RashtraPress
22 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मेघालय सरकार शिक्षा पर कितना खर्च करती है?
मेघालय सरकार शिक्षा क्षेत्र पर सालाना लगभग ₹4,000 करोड़ खर्च करती है, जो राज्य के कुल वार्षिक व्यय ₹20,000 करोड़ का एक बड़ा हिस्सा है। यह जानकारी मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने 22 अक्टूबर 2026 को रिमरंगपारा स्कूल उद्घाटन के दौरान दी।
मिशन एजुकेशन के तहत मेघालय में कितने स्कूल अपग्रेड हुए?
मिशन एजुकेशन के अंतर्गत मेघालय में 2,000 से अधिक स्कूलों का उन्नयन किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त 23 सितंबर को एक ही दिन 80 से अधिक नए स्कूल भवनों का उद्घाटन किया गया।
मेघालय में इस वर्ष SSLC उत्तीर्ण प्रतिशत कितना रहा?
इस वर्ष मेघालय में SSLC उत्तीर्ण प्रतिशत 86.84% रहा। उच्च माध्यमिक परीक्षाओं में विज्ञान, कला और वाणिज्य तीनों स्ट्रीम में उत्तीर्ण दर 83% से अधिक रही — जो गारो हिल्स में पहले की 75% फेल दर की तुलना में बड़ा सुधार है।
राष्ट्रीय प्रदर्शन ग्रेडिंग इंडेक्स में मेघालय की क्या स्थिति है?
स्कूली शिक्षा के लिए राष्ट्रीय प्रदर्शन ग्रेडिंग इंडेक्स में मेघालय का स्कोर 2024 के 448 से बढ़कर 2026 में 525.71 हो गया है। यह सुधार राज्य की शिक्षा नीति में किए गए बुनियादी ढाँचागत बदलावों का परिणाम बताया जा रहा है।
मेघालय के ग्रामीण स्कूलों में अभी कौन-सी चुनौतियाँ बाकी हैं?
मुख्यमंत्री संगमा ने स्वयं स्वीकार किया कि कई ग्रामीण स्कूलों में बिजली, पेयजल, इंटरनेट कनेक्टिविटी, पुस्तकालय, प्रयोगशालाएँ और शिक्षकों की कमी अभी भी बनी हुई है। इन कमियों को दूर करने के लिए शिक्षा विभाग को स्कूल-वार रोडमैप और समयसीमा के साथ कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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