आईआईटी बॉम्बे छात्र साहिल वाकोडे केस: माता-पिता का अनशन पाँचवें दिन भी जारी, प्रकाश आंबेडकर ने की मुलाकात
सारांश
मुख्य बातें
आईआईटी बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की मौत के मामले में न्याय और आरोपियों की गिरफ्तारी की माँग को लेकर उनके माता-पिता मुंबई के आज़ाद मैदान में 1 अक्टूबर 2026 को अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के पाँचवें दिन भी डटे रहे। इस दौरान वंचित बहुजन आघाड़ी के अध्यक्ष प्रकाश आंबेडकर प्रदर्शन स्थल पर पहुँचे और साहिल के परिवार से मुलाकात की।
प्रकाश आंबेडकर की प्रतिक्रिया
प्रकाश आंबेडकर ने परिवार से मिलने के बाद कहा कि साहिल वाकोडे के पिछले परीक्षाओं के अकादमिक रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि वह एक होनहार छात्र थे। उन्होंने बताया कि उन्होंने इस मामले को लेकर वकीलों से विस्तार से जानकारी ली है।
आंबेडकर ने पुलिस जाँच पर सवाल उठाते हुए इसे निराशाजनक बताया। उनका कहना था कि मामले में जिन लोगों पर आरोप लगाए जा रहे हैं, उन्हें अब तक न तो पूछताछ के लिए बुलाया गया है और न ही अदालत के समक्ष पेश किया गया है।
आंबेडकर ने यह भी कहा कि इस मामले की जाँच इस पहलू से भी होनी चाहिए कि क्या इसमें मुख्यमंत्री की कोई भूमिका है। उनके अनुसार, मुख्यमंत्री के निर्देश के बिना पुलिस इस तरह की जाँच नहीं कर सकती।
परिवार का संघर्ष और माँगें
साहिल के पिता रवींद्र वाकोडे ने कहा कि उन्हें सरकार की ओर से समर्थन मिल रहा है और सरकारी प्रतिनिधि लगातार उनसे मिलने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के लोगों को भी एहसास है कि उनके बच्चे के साथ क्या हुआ।
रवींद्र वाकोडे ने स्पष्ट किया कि जब तक उनके बेटे को न्याय नहीं मिल जाता, वह अनशन पर बैठे रहेंगे और अपना संघर्ष जारी रखेंगे। अपने समर्थकों का आभार जताते हुए उन्होंने कहा कि परिवार के साथ खड़े रहने वाले लोग उनके लिए गर्व का स्रोत हैं।
अनुमति और सुरक्षा की माँग
साहिल के पिता के वकील निखिल कांबले ने बताया कि परिवार ने निर्देश दिया था कि आंदोलन के लिए सभी आवश्यक अनुमतियाँ उचित नियमों का पालन करते हुए ली जाएँ। उनके अनुसार, हाईकोर्ट के दिशा-निर्देशों और महाराष्ट्र सरकार के नियमों के अनुसार अनुमति के लिए आवेदन किया गया था, और जिन गतिविधियों के लिए आवेदन किया गया था उनकी अनुमति मिल भी गई।
कांबले ने यह भी बताया कि गाँधी जयंती के बाद शनिवार और रविवार पड़ने के कारण इन तीन दिनों में सरकारी नियमों के अनुसार अनुमति प्रक्रिया में कुछ बाधाएँ आ सकती हैं।
परिवार की सुरक्षा को लेकर एक दिन पहले पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखा गया था। कांबले के अनुसार, सुरक्षा की माँग इसलिए की गई है क्योंकि मामले में दोनों आरोपी अभी तक गिरफ्तार नहीं हुए हैं, जिससे परिवार को उनकी ओर से खतरे की आशंका है। हालाँकि, पुलिस कमिश्नर की ओर से अब तक कोई जवाब नहीं आया है।
जाँच की दिशा पर सवाल
वकील निखिल कांबले ने जाँच की प्रगति को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि फिलहाल परिवार का क्राइम ब्रांच के साथ कोई संवाद नहीं हो पा रहा है — साहिल के माता-पिता अनशन पर हैं और इस कारण जाँच एजेंसी के साथ उनकी बातचीत संभव नहीं हो सकी।
कांबले ने बताया कि जाँच एजेंसी की ओर से भी परिवार से अब तक कोई संपर्क नहीं किया गया है। जाँच की दिशा की जानकारी परिवार को मुख्यतः मीडिया के ज़रिए ही मिल रही है, जो कि एक गंभीर चिंता का विषय है।
आगे क्या
यह मामला दलित और बहुजन समुदाय के संस्थागत न्याय की माँग से जुड़े व्यापक सवालों को उठाता है। गौरतलब है कि आईआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में छात्रों की मौत के मामलों में जाँच की पारदर्शिता पर यह कोई पहली बार नहीं है कि सवाल उठे हैं। परिवार के वकील के अनुसार, जब तक आरोपियों की गिरफ्तारी और न्यायिक प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ती, अनशन जारी रहेगा।