आईआईटी बॉम्बे छात्र साहिल वाकोडे की मौत: परिजनों ने प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला की तत्काल गिरफ्तारी की माँग की
सारांश
मुख्य बातें
आईआईटी बॉम्बे के द्वितीय वर्ष के छात्र साहिल वाकोडे की पवई परिसर में मृत्यु के बाद, उनके परिजनों ने 22 सितंबर 2026 को मुंबई में पत्रकारों से बात करते हुए प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला की तत्काल गिरफ्तारी की माँग की। दूल्ला को इससे पहले ही संस्थान में छात्र कल्याण डीन के पद से बर्खास्त किया जा चुका है।
मुख्य घटनाक्रम
साहिल वाकोडे पिछले सप्ताह आईआईटी पवई परिसर में मृत पाए गए थे। कथित तौर पर परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन का उपयोग करते पकड़े जाने की घटना के कुछ घंटों बाद ही उनकी मृत्यु हुई। इस घटना के बाद परिसर में छात्रों ने व्यापक विरोध प्रदर्शन किया।
उनके पिता रविंद्र वाकोडे ने एफआईआर की प्रति दिखाते हुए कहा कि मामले में उचित धाराएँ जोड़ दी गई हैं और जाँच उसी के अनुसार होगी। उन्होंने पुलिस से अपील की कि प्रोफेसर दूल्ला को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए।
परिजनों के आरोप
पिता रविंद्र वाकोडे ने पुनः आरोप लगाया कि उनके बेटे को जाति आधारित दुर्व्यवहार और भेदभाव का शिकार बनाया गया। उन्होंने कहा, 'उसे प्रताड़ित किया गया। यह आत्महत्या नहीं है।' उन्होंने यह भी कहा कि जेईई एडवांस्ड जैसी कठिन परीक्षा पास करने वाले छात्र पर नकल के निराधार आरोप असली मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए लगाए जा रहे हैं।
उन्होंने स्वीकार किया कि अपने बेटे को संस्थान की परिस्थितियों के अनुरूप ढलने की सलाह देना उनकी 'सबसे बड़ी गलती' थी। साहिल की माँ सोनाली वाकोडे ने कहा कि जब वे छात्रावास में बेटे से मिलने गई थीं और उसने उत्पीड़न की बात बताई थी, तब उसे वहाँ से न ले जाना उनकी भूल रही। माँ ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है कि न्याय मिलेगा।
जाँच की स्थिति
मुंबई क्राइम ब्रांच ने मंगलवार को साहिल के माता-पिता के बयान दर्ज किए। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, साहिल का एक आईफोन लॉक अवस्था में है और जाँचकर्ता उसे अनलॉक करने के लिए तकनीकी सहायता ले रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, डिवाइस तक पहुँच मिलने के बाद ही चैटजीपीटी इतिहास सहित अन्य डिजिटल साक्ष्य प्राप्त किए जा सकेंगे।
पुलिस ने बताया कि वे आईआईटी पवई परिसर के एससी/एसटी सेल और छात्र परामर्श केंद्र को पत्र लिखकर यह पता करेंगे कि क्या साहिल ने अतीत में वहाँ कभी शिकायत दर्ज कराई थी या परामर्श लिया था।
सामाजिक संदर्भ
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों में दलित और आदिवासी छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और जाति-भेदभाव को लेकर लंबे समय से बहस जारी है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी आईआईटी में छात्र की मृत्यु के बाद जाति-आधारित उत्पीड़न के आरोप सामने आए हों। प्रोफेसर दूल्ला की बर्खास्तगी ने संस्थान की जवाबदेही पर भी सवाल खड़े किए हैं।
आगे क्या होगा
जाँच एजेंसियाँ डिजिटल साक्ष्य इकट्ठा करने के साथ-साथ संस्थान के आंतरिक रिकॉर्ड भी खंगालेंगी। परिजनों की गिरफ्तारी की माँग के बीच पुलिस पर कार्रवाई का दबाव बढ़ता जा रहा है। इस मामले का अंत न्यायिक प्रक्रिया के जरिए ही होना है और न्यायपालिका पर परिवार की निर्भरता इसी की ओर इशारा करती है।