ओपी राजभर का अखिलेश पर हमला: 'पीडीए को लेकर भ्रमित हैं सपा प्रमुख, मानसिक संतुलन खो गया'
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार में पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने 1 अक्टूबर 2026 को समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला और कहा कि वे 'पीडीए' की परिभाषा को लेकर लगातार भ्रमित बने हुए हैं। राजभर ने सपा के तीसरे राज्यसभा उम्मीदवार, 'इंडिया' गठबंधन के चुनाव आयोग-विरोधी प्रदर्शन और सपा-कांग्रेस के सीट-बंटवारे जैसे मुद्दों पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी।
पीडीए पर राजभर का तंज
ओम प्रकाश राजभर ने कहा, 'अखिलेश यादव समय-समय पर पीडीए की परिभाषा बदलते रहते हैं। कल का उनका फॉर्मूला निकला कि 'पी' से परिवार — राम गोपाल यादव, 'डी' से धनीराम दौलतमंद हैं और 'ए' बच गया है। अब कहीं से अपराधी पकड़ कर लाएंगे।' यह टिप्पणी सपा के राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची में परिवारवाद के आरोपों के संदर्भ में आई है।
विधायकों के टूटने के दावे पर पलटवार
सपा के इस दावे पर कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के 10 विधायक उनके संपर्क में हैं, राजभर ने कहा, 'किसके विधायक टूटते हैं, पता चल जाएगा। पिछले विधान परिषद और राज्यसभा चुनाव में कौन टूटा था।' यह बयान पिछले चुनावों में सपा के दलबदल की स्थिति का परोक्ष संदर्भ माना जा रहा है।
चुनाव आयोग विरोध पर प्रतिक्रिया
'इंडिया' गठबंधन के चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन पर राजभर ने कहा, '2014 से पहले देश में कांग्रेस की सरकार थी और पूरे सिस्टम पर उनका कब्जा था। जब चुनाव हुआ तो जनता ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री चुन लिया।' उन्होंने 2012 से 2017 के बीच उत्तर प्रदेश में अखिलेश सरकार का उदाहरण देते हुए कहा कि उस दौरान पूरे सिस्टम पर सपा का नियंत्रण था, फिर भी 2017 के चुनाव में जनता ने एनडीए को 325 सीटें दे दीं।
सीईसी और वोट-चोरी के दावों पर सवाल
राजभर ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) को नियुक्त हुए दो वर्ष हो गए हैं। उनके अनुसार, 'यदि वोटों की चोरी होती तो एनडीए की सीटें घटती या बढ़ती — यह अखिलेश यादव को स्पष्ट करना चाहिए।' उन्होंने यह भी कहा कि 'सपा और कांग्रेस के पास कोई ठोस काम नहीं है, इसलिए ये आंदोलन चला रहे हैं।'
अखिलेश यादव पर व्यक्तिगत टिप्पणी
राजभर ने अंत में कहा कि 'अखिलेश यादव का मानसिक संतुलन खो गया है। पूरी प्रेस वार्ता में केवल मुसलमानों के विषय में बोलते रहते हैं।' यह बयान राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया का कारण बन सकता है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव और सपा की गठबंधन रणनीति के बीच यह राजनीतिक तनाव और गहरा होता जा रहा है।