ओपी राजभर का अखिलेश पर तीखा तंज: 'पीडीए में डी का मतलब दूर से प्रणाम हो गया'
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने 5 नवंबर 2026 को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के ज़रिए समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव के बहुचर्चित पीडीए फॉर्मूले पर सीधा निशाना साधा। राजभर ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि अखिलेश के 'पीडीए' में 'डी' यानी दलित का हिस्सा महज 'दूर से प्रणाम' तक सिमट कर रह गया है।
क्या लिखा राजभर ने एक्स पर
ओम प्रकाश राजभर ने अपनी पोस्ट में अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए लिखा, 'अखिलेश यादव, ले लिए सब का हाल-समाचार? ऐसा लगता है कि आपके पीडीए में डी का मतलब दूर से प्रणाम होता जा रहा है।' उन्होंने आगे लिखा कि अखिलेश ने रामपुर में 'ए' (अल्पसंख्यक), बनारस में स्वजातीय 'पी' (पिछड़े) के घर और एक 'डी' सांसद के महल में अपनी यात्राएँ कीं — जो उनके अनुसार पीडीए की चयनात्मक राजनीति को उजागर करती है।
अखिलेश के 'कुशासन' पर हमला
राजभर ने अखिलेश यादव के पिछले कार्यकाल को सीधे कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने लिखा, 'आपके राज में पी और ए के बीच असली डी यानी दलित की स्थिति दयनीय ही रही।' उन्होंने दावा किया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में दलित परिवारों के घर पक्के हुए, शौचालय बने, महिलाएँ स्वयं सहायता समूहों से जुड़ीं और बच्चों को शिक्षा व रोज़गार के अवसर मिले। राजभर के अनुसार, 'यह सब वही अधिकार हैं जो अखिलेश सरकार ने दलितों से जबरन छीने थे।'
अखिलेश को सलाह: 'ज़मीन पर उतरिए'
राजभर ने अखिलेश यादव को सुझाव देते हुए कहा, 'महाराज, ज़मीन पर उतरिए। सिर्फ अपने वालों के यहाँ नहीं, बल्कि आम जनता से भी मिलिए — तभी जान पाएँगे कि आपके कुशासन की तुलना में वर्तमान शासन में क्या-क्या बदल गया है।' उन्होंने अपनी पोस्ट का समापन 'जय भारत, जय श्री राम, जय श्री कृष्ण, जय परशुराम, जय महाराजा सुहेलदेव' से किया।
क्या है पीडीए फॉर्मूला
अखिलेश यादव का पीडीए फॉर्मूला — पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक — उनकी पार्टी की राजनीतिक रणनीति का केंद्र रहा है। अखिलेश ने इसका दायरा और विस्तृत करते हुए कहा था कि इसमें समाज का हर वह वर्ग शामिल है जो उत्पीड़न, पीड़ा या अपमान का सामना कर रहा है। उन्होंने यहाँ तक कहा था कि 'पीडीए' में 'पी' का अर्थ 'पंडित' भी है — यदि कोई ब्राह्मण पीड़ित है, तो वह भी इस दायरे में आता है।
राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ परोक्ष रूप से शुरू हो चुकी हैं और दलित-पिछड़ा मतदाता वर्ग दोनों पक्षों के लिए निर्णायक माना जा रहा है। गौरतलब है कि ओम प्रकाश राजभर स्वयं पिछड़े समुदाय के प्रमुख नेता हैं और उनकी पार्टी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले गठबंधन की सहयोगी है। ऐसे में उनका यह बयान न केवल व्यक्तिगत तंज है, बल्कि आगामी चुनावी जमीन पर दलित-पिछड़े वोट बैंक की लड़ाई का संकेत भी है।