2 अक्टूबर 2026
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ओपी राजभर का कांग्रेस पर पलटवार: 'सीईसी विवाद सिर्फ 2027 की हार का बहाना', योगी दो-तिहाई बहुमत से जीतेंगे

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ओपी राजभर का कांग्रेस पर पलटवार: 'सीईसी विवाद सिर्फ 2027 की हार का बहाना', योगी दो-तिहाई बहुमत से जीतेंगे

सारांश

यूपी के मंत्री ओपी राजभर ने सीईसी पर विपक्ष के हमले को 2027 की संभावित हार छिपाने की 'पूर्व-तैयारी' करार दिया। उन्होंने कांग्रेस और सपा के तर्कों को ही उन पर पलटा और दावा किया कि योगी आदित्यनाथ 2027 में दो-तिहाई बहुमत से फिर मुख्यमंत्री बनेंगे।

मुख्य बातें

यूपी के पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने 2 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में सीईसी विवाद पर विपक्ष को 'ड्रामेबाज़' कहा।
उन्होंने तर्क दिया कि 2019 में BJP की सीटें 303 से 240 हुईं — 'चोरी होती तो घटतीं नहीं।' राजभर का दावा — 2027 यूपी चुनाव में योगी आदित्यनाथ दो-तिहाई बहुमत से फिर मुख्यमंत्री बनेंगे।
विहिप नेता आलोक कुमार के बयान का समर्थन किया; ममता बनर्जी के चुनाव आयोग पर आरोपों को 'गलत' बताया।
ओवैसी के UCC विरोध पर कहा — NRC-CAA पर भी झूठा भय फैलाया गया था, तीन साल में कुछ नहीं हुआ।
अखिलेश यादव की 'पीडीए' राजनीति पर सवाल — राज्यसभा चुनाव में अल्पसंख्यक और पिछड़े वर्ग की अनदेखी का आरोप।

उत्तर प्रदेश सरकार के पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने 2 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में विपक्ष द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) पर सवाल उठाने को 'राजनीतिक ड्रामा' करार देते हुए कांग्रेस और सपा पर कड़ा हमला बोला। उन्होंने स्पष्ट दावा किया कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दो-तिहाई बहुमत से फिर सत्ता में आएंगे।

सीईसी विवाद पर राजभर का तर्क

राजभर ने विपक्ष के तर्कों को ही उन पर पलटते हुए कहा कि 2019 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 303 सीटें जीती थीं, जो बाद में 240 रह गईं। उनके अनुसार, 'अगर चुनाव आयोग से गड़बड़ी होती तो सीटें घटतीं नहीं, बढ़तीं।' उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष 2027 के यूपी चुनाव से पहले ही 'वोट चोरी' का माहौल बनाने में जुट गया है, ताकि संभावित पराजय का ठीकरा चुनाव आयोग पर फोड़ा जा सके।

कांग्रेस और सपा पर सीधा निशाना

राजभर ने कहा कि 2014 से पहले पूरे प्रशासनिक तंत्र पर कांग्रेस का नियंत्रण था और 2012 से 2017 के बीच उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) की सरकार थी। उनके शब्दों में, 'तब यदि चुनाव आयोग सत्ताधारी दल के इशारे पर चलता, तो मोदी प्रधानमंत्री और योगी मुख्यमंत्री कभी नहीं बनते।' उन्होंने कहा कि जनता ने शासन से नाराज होकर मौजूदा नेतृत्व को चुना, न कि किसी आयोग की मदद से।

राजभर ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव की 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) राजनीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राज्यसभा चुनावों में सपा ने अल्पसंख्यक, ब्राह्मण और अति पिछड़े समुदाय की अनदेखी कर परिवार के लोगों को तरजीह दी।

विहिप और ओवैसी के बयानों पर प्रतिक्रिया

विश्व हिंदू परिषद (विहिप) नेता आलोक कुमार के बयान का समर्थन करते हुए राजभर ने कहा कि चुनाव आयोग केवल चुनाव प्रक्रिया संचालित करता है, परिणाम जनता तय करती है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी द्वारा समान नागरिक संहिता (UCC) का विरोध किए जाने पर उन्होंने कहा कि एनआरसी और नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के खिलाफ भी ऐसे ही भय फैलाया गया था, परंतु तीन वर्ष बाद कोई भी आशंका सच नहीं निकली।

ममता बनर्जी के आरोपों पर पलटवार

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोपों को राजभर ने 'गलत' बताया। उन्होंने याद दिलाया कि ममता बनर्जी स्वयं ईवीएम के ज़रिए ही मुख्यमंत्री बनी थीं और बंगाल में 1978 से कांग्रेस सत्ता में नहीं लौटी है — जो उनके अनुसार चुनाव आयोग की विफलता नहीं, जनमत का प्रतिबिंब है।

2027 यूपी चुनाव पर दावा

राजभर ने बेबाकी से कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव में योगी आदित्यनाथ दो-तिहाई बहुमत के साथ फिर से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनेंगे। यह बयान ऐसे समय आया है जब सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर भी 2027 की रणनीति को लेकर मंथन जारी है। आने वाले महीनों में यूपी की राजनीति में जातीय समीकरण और चुनाव आयोग की विश्वसनीयता केंद्रीय मुद्दे बने रहने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असल में यह 2027 के यूपी चुनाव की 'नैरेटिव वॉर' की शुरुआत है — सत्तापक्ष पहले से विपक्ष के 'ईवीएम और चुनाव आयोग' वाले हथियार को कुंद करने की कोशिश में है। दिलचस्प यह है कि राजभर खुद एक समय सत्ताधारी गठबंधन के बाहर थे और चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठा चुके हैं — यह बदला हुआ सुर उनकी राजनीतिक यात्रा का प्रतिबिंब है। विपक्ष की असली चुनौती यह है कि वह केवल संस्थागत आरोपों की बजाय ज़मीनी जनमत निर्माण में ऊर्जा लगाए, अन्यथा 2027 से पहले ही उसकी साख की लड़ाई हार जाएगी।
RashtraPress
2 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओपी राजभर ने सीईसी विवाद पर क्या कहा?
ओपी राजभर ने कहा कि विपक्ष 2027 के यूपी चुनाव में अपनी संभावित हार छिपाने के लिए अभी से चुनाव आयोग पर आरोप लगा रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि चुनाव आयोग स्वतंत्र रूप से काम करता है और जनता ही परिणाम तय करती है।
राजभर ने 2027 यूपी चुनाव के बारे में क्या दावा किया?
राजभर ने दावा किया कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में योगी आदित्यनाथ दो-तिहाई बहुमत से फिर मुख्यमंत्री बनेंगे। यह बयान उन्होंने 2 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में दिया।
राजभर ने कांग्रेस और सपा पर क्या आरोप लगाए?
राजभर ने कहा कि 2014 से पहले कांग्रेस का और 2012-2017 के बीच सपा का यूपी के तंत्र पर कब्जा था, फिर भी मोदी और योगी जीते — इससे साबित होता है कि चुनाव आयोग निष्पक्ष है। उन्होंने सपा की 'पीडीए' राजनीति को भी राज्यसभा चुनाव में परिवारवाद का हवाला देकर खोखला बताया।
ममता बनर्जी के चुनाव आयोग पर आरोपों पर राजभर की क्या राय है?
राजभर ने कहा कि ममता बनर्जी स्वयं ईवीएम के ज़रिए मुख्यमंत्री बनीं, इसलिए उनके आरोप विश्वसनीय नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि 1978 से बंगाल में कांग्रेस सत्ता में नहीं आई, जो चुनाव आयोग नहीं बल्कि जनमत का नतीजा है।
राजभर ने ओवैसी के UCC विरोध पर क्या कहा?
राजभर ने कहा कि ओवैसी और उनके जैसे नेता विरोध को 'धंधा' बना चुके हैं। उन्होंने उदाहरण दिया कि NRC और CAA के समय मुसलमानों को देश से निकाले जाने का झूठा भय फैलाया गया, लेकिन तीन साल बाद कुछ नहीं हुआ।
राष्ट्र प्रेस
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