6 नवंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

यूपी के चार टुकड़े हों — ओपी राजभर के बयान पर संजीव बालियान बोले, 'मैं इसका पक्षधर हूं'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
यूपी के चार टुकड़े हों — ओपी राजभर के बयान पर संजीव बालियान बोले, 'मैं इसका पक्षधर हूं'

सारांश

BJP नेता संजीव बालियान ने यूपी को चार हिस्सों में बाँटने की वकालत करके सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर ही विभाजन की आग को हवा दी। 25 करोड़ की आबादी, 800 km दूर AIIMS और उच्च न्यायालय — यह बयान महज़ राय नहीं, 2027 चुनाव से पहले क्षेत्रीय असंतोष की राजनीतिक अभिव्यक्ति है।

मुख्य बातें

BJP नेता संजीव बालियान ने 21 सितंबर 2026 को मुजफ्फरनगर में ओम प्रकाश राजभर के यूपी-विभाजन के बयान का समर्थन किया।
बालियान का तर्क: उत्तर प्रदेश की 25 करोड़ आबादी के लिए प्रशासनिक प्रबंधन कठिन है; छोटे राज्यों में विकास तेज़ होता है।
पश्चिमी यूपी से गोरखपुर AIIMS की दूरी 800 किमी और रायबरेली AIIMS की दूरी 750 किमी — बालियान ने इसे अन्याय बताया।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय पश्चिमी यूपी से 800 किमी दूर; बालियान ने स्थानीय उच्च न्यायालय की माँग उठाई।
मंत्री राजभर ने दावा किया कि यूपी बँटा तो पूर्वांचल का पहला मुख्यमंत्री राजभर समुदाय से होगा।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान ने 21 सितंबर 2026 को मुजफ्फरनगर में उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर के उस बयान का खुलकर समर्थन किया, जिसमें राजभर ने उत्तर प्रदेश को चार हिस्सों में बाँटने की वकालत की थी। बालियान ने कहा, 'मैं इसका पक्षधर हूं।' यह बयान तब आया है जब प्रदेश में विभाजन की माँग एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गई है।

बालियान का तर्क: छोटे राज्यों में तेज़ विकास

संजीव बालियान ने कहा कि उत्तर प्रदेश की आबादी करीब 25 करोड़ है और इतने बड़े प्रदेश को प्रशासनिक दृष्टि से संभालना अत्यंत कठिन है। उन्होंने तर्क दिया कि बुंदेलखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और पश्चिमी उत्तर प्रदेश — तीनों क्षेत्रों की अपनी अलग भाषाई और सांस्कृतिक पहचान है।

उन्होंने ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए कहा, 'पंजाब से हरियाणा और हिमाचल प्रदेश निकले तो दोनों का विकास हुआ। उत्तर प्रदेश से अलग होकर उत्तराखंड बना, और उसकी तस्वीर सबके सामने है। झारखंड हो या छत्तीसगढ़ — छोटे राज्यों की विकास गति बड़ी रही है।'

पश्चिमी यूपी की उपेक्षा पर बालियान की व्यथा

बालियान ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य और न्यायिक सुविधाओं की कमी को उजागर करते हुए कहा कि 25 करोड़ की आबादी पर केवल दो AIIMS हैं — गोरखपुर और रायबरेली में — और पश्चिमी यूपी से गोरखपुर की दूरी 800 किलोमीटर तथा रायबरेली की दूरी 750 किलोमीटर है।

उन्होंने न्यायिक पहुँच पर भी सवाल उठाए: 'इलाहाबाद उच्च न्यायालय मेरे क्षेत्र से 800 किलोमीटर दूर है। अगर छोटे राज्य होंगे तो उच्च न्यायालय और चिकित्सा जैसी सुविधाएँ नागरिकों को बेहतर तरीके से मिल पाएंगी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश को न तो न्याय मिल रहा है, न चिकित्सा सुविधा।'

राजभर का मूल बयान और राजनीतिक दाँव

उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा था कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है और इसका बँटवारा 'आज, कल या परसों, कभी न कभी होना ही है।' उन्होंने यह भी कहा कि जिस दिन प्रदेश चार हिस्सों में बँटेगा, पूर्वांचल की बड़ी आबादी को देखते हुए पहला मुख्यमंत्री राजभर समुदाय का ही होगा। राजभर के इस बयान में स्पष्ट रूप से सामुदायिक राजनीति की छाप देखी जा रही है।

राजनीतिक संदर्भ और आगे का परिदृश्य

गौरतलब है कि यूपी विभाजन की माँग नई नहीं है — बहुजन समाज पार्टी (BSP) की सरकार में भी यह प्रस्ताव उठा था, लेकिन केंद्र ने उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया। अब दो सत्तारूढ़ गठबंधन सहयोगियों — राजभर और बालियान — का इस विषय पर एक स्वर में बोलना राजनीतिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है।

यह ऐसे समय में आया है जब 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव नज़दीक आ रहे हैं और विभिन्न क्षेत्रीय दल अपनी पहचान को धार देने में जुटे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक संसद में संविधान संशोधन नहीं होता और केंद्र की सहमति नहीं बनती, यह माँग नीतिगत स्तर पर आगे नहीं बढ़ सकती।

संपादकीय दृष्टिकोण

उसी की केंद्र सरकार ने इससे पहले किसी भी राज्य-विभाजन प्रस्ताव को मंज़ूरी नहीं दी। राजभर का 'पूर्वांचल के पहले CM' वाला दावा बताता है कि इस बहस में विकास से अधिक सामुदायिक राजनीति की धुरी घूम रही है। मुख्यधारा की कवरेज जो बात चूक जाती है, वह यह है कि बालियान का तर्क — AIIMS और उच्च न्यायालय तक पहुँच — वास्तविक नागरिक शिकायतों पर टिका है, जिन्हें खारिज करना आसान नहीं।
RashtraPress
6 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संजीव बालियान ने यूपी विभाजन का समर्थन क्यों किया?
बालियान ने कहा कि 25 करोड़ की आबादी वाले उत्तर प्रदेश को प्रशासनिक रूप से संभालना कठिन है और छोटे राज्यों में विकास की गति ऐतिहासिक रूप से बेहतर रही है। उन्होंने हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ का उदाहरण दिया।
ओम प्रकाश राजभर ने यूपी बँटवारे पर क्या कहा था?
उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा था कि यूपी का बँटवारा 'कभी न कभी होना ही है' और जब प्रदेश चार हिस्सों में बँटेगा, तब पूर्वांचल का पहला मुख्यमंत्री राजभर समुदाय का होगा।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की क्या शिकायतें हैं?
बालियान के अनुसार पश्चिमी यूपी से निकटतम AIIMS 800 किलोमीटर (गोरखपुर) और 750 किलोमीटर (रायबरेली) दूर है, जबकि इलाहाबाद उच्च न्यायालय भी 800 किलोमीटर दूर है। उन्होंने इसे स्वास्थ्य और न्यायिक उपेक्षा बताया।
क्या यूपी का विभाजन वास्तव में हो सकता है?
किसी राज्य के विभाजन के लिए संसद में संविधान संशोधन और केंद्र सरकार की सहमति अनिवार्य है। अभी तक केंद्र ने इस दिशा में कोई आधिकारिक कदम नहीं उठाया है; यह माँग राजनीतिक स्तर पर उठ रही है।
यूपी विभाजन की माँग पहले कब उठी थी?
बहुजन समाज पार्टी (BSP) की सरकार के दौरान भी यूपी को चार भागों में बाँटने का प्रस्ताव विधानसभा में पारित हुआ था, लेकिन केंद्र सरकार ने उस पर अमल नहीं किया। अब यह माँग 2027 विधानसभा चुनाव से पहले फिर उठ रही है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 3 महीने पहले