यूपी के चार टुकड़े हों — ओपी राजभर के बयान पर संजीव बालियान बोले, 'मैं इसका पक्षधर हूं'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान ने 21 सितंबर 2026 को मुजफ्फरनगर में उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर के उस बयान का खुलकर समर्थन किया, जिसमें राजभर ने उत्तर प्रदेश को चार हिस्सों में बाँटने की वकालत की थी। बालियान ने कहा, 'मैं इसका पक्षधर हूं।' यह बयान तब आया है जब प्रदेश में विभाजन की माँग एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गई है।
बालियान का तर्क: छोटे राज्यों में तेज़ विकास
संजीव बालियान ने कहा कि उत्तर प्रदेश की आबादी करीब 25 करोड़ है और इतने बड़े प्रदेश को प्रशासनिक दृष्टि से संभालना अत्यंत कठिन है। उन्होंने तर्क दिया कि बुंदेलखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और पश्चिमी उत्तर प्रदेश — तीनों क्षेत्रों की अपनी अलग भाषाई और सांस्कृतिक पहचान है।
उन्होंने ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए कहा, 'पंजाब से हरियाणा और हिमाचल प्रदेश निकले तो दोनों का विकास हुआ। उत्तर प्रदेश से अलग होकर उत्तराखंड बना, और उसकी तस्वीर सबके सामने है। झारखंड हो या छत्तीसगढ़ — छोटे राज्यों की विकास गति बड़ी रही है।'
पश्चिमी यूपी की उपेक्षा पर बालियान की व्यथा
बालियान ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य और न्यायिक सुविधाओं की कमी को उजागर करते हुए कहा कि 25 करोड़ की आबादी पर केवल दो AIIMS हैं — गोरखपुर और रायबरेली में — और पश्चिमी यूपी से गोरखपुर की दूरी 800 किलोमीटर तथा रायबरेली की दूरी 750 किलोमीटर है।
उन्होंने न्यायिक पहुँच पर भी सवाल उठाए: 'इलाहाबाद उच्च न्यायालय मेरे क्षेत्र से 800 किलोमीटर दूर है। अगर छोटे राज्य होंगे तो उच्च न्यायालय और चिकित्सा जैसी सुविधाएँ नागरिकों को बेहतर तरीके से मिल पाएंगी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश को न तो न्याय मिल रहा है, न चिकित्सा सुविधा।'
राजभर का मूल बयान और राजनीतिक दाँव
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा था कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है और इसका बँटवारा 'आज, कल या परसों, कभी न कभी होना ही है।' उन्होंने यह भी कहा कि जिस दिन प्रदेश चार हिस्सों में बँटेगा, पूर्वांचल की बड़ी आबादी को देखते हुए पहला मुख्यमंत्री राजभर समुदाय का ही होगा। राजभर के इस बयान में स्पष्ट रूप से सामुदायिक राजनीति की छाप देखी जा रही है।
राजनीतिक संदर्भ और आगे का परिदृश्य
गौरतलब है कि यूपी विभाजन की माँग नई नहीं है — बहुजन समाज पार्टी (BSP) की सरकार में भी यह प्रस्ताव उठा था, लेकिन केंद्र ने उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया। अब दो सत्तारूढ़ गठबंधन सहयोगियों — राजभर और बालियान — का इस विषय पर एक स्वर में बोलना राजनीतिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है।
यह ऐसे समय में आया है जब 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव नज़दीक आ रहे हैं और विभिन्न क्षेत्रीय दल अपनी पहचान को धार देने में जुटे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक संसद में संविधान संशोधन नहीं होता और केंद्र की सहमति नहीं बनती, यह माँग नीतिगत स्तर पर आगे नहीं बढ़ सकती।