जम्मू-कश्मीर मेडिकल इंटर्न्स स्टाइपेंड विवाद: इल्तिजा मुफ्ती ने उमर सरकार पर साधा निशाना, ₹12,400 को बताया अपमानजनक
सारांश
मुख्य बातें
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की नेता इल्तिजा मुफ्ती ने 1 सितंबर 2026 को जम्मू-कश्मीर के एमबीबीएस इंटर्न्स के स्टाइपेंड मुद्दे पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने माँग की कि प्रस्तावित ₹30,000 प्रति माह के स्टाइपेंड को तत्काल लागू किया जाए, क्योंकि इंटर्न्स पिछले दो वर्षों से इस माँग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं और अब दो दिनों से हड़ताल पर हैं।
मौजूदा स्टाइपेंड की स्थिति
इल्तिजा मुफ्ती के अनुसार, जम्मू-कश्मीर के मेडिकल इंटर्न्स को वर्तमान में केवल ₹12,400 प्रति माह स्टाइपेंड मिल रहा है, जो प्रतिदिन लगभग ₹400 बनता है। उन्होंने कहा कि इतनी राशि में बड़गाम और कुपवाड़ा जैसे दूर-दराज के इलाकों में तैनात इंटर्न्स का यातायात खर्च तक नहीं निकलता, रहने और खाने का खर्च तो अलग है।
गौरतलब है कि ये इंटर्न 36-36 घंटे की लगातार ड्यूटी देते हैं, उन्हें न गजेटेड अवकाश मिलता है, न रविवार की छुट्टी और न ही सप्ताहांत का विराम।
अन्य राज्यों से तुलना
इल्तिजा मुफ्ती ने बताया कि ओडिशा, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों ने अपने मेडिकल इंटर्न्स का स्टाइपेंड बढ़ाकर ₹60,000 प्रति माह तक कर दिया है। इसके बावजूद जम्मू-कश्मीर में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है, जिससे इंटर्न्स में गहरी निराशा है। आलोचकों का कहना है कि यह स्पष्ट भेदभाव है और केंद्र शासित प्रदेश के युवा डॉक्टर देश के बाकी हिस्सों की तुलना में कहीं पीछे छूट रहे हैं।
सरकार पर सीधा हमला
PDP नेता ने उमर अब्दुल्ला सरकार पर प्राथमिकताओं को लेकर तीखा सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि मंत्रियों की सुविधाओं, बड़े मोटरकेड और बाहर आयोजित होने वाले सरकारी कार्यक्रमों के लिए खजाने में धन उपलब्ध रहता है, लेकिन जैसे ही मेडिकल इंटर्न्स के स्टाइपेंड की बात आती है, सरकारी खजाना खाली बताया जाता है।
इल्तिजा मुफ्ती ने स्पष्ट किया कि PDP इंटर्न्स के साथ एकजुटता से खड़ी है और जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता, पार्टी उनके साथ संघर्ष जारी रखेगी।
हड़ताल का अस्पतालों पर असर
इंटर्न्स की दो दिवसीय हड़ताल के कारण जम्मू-कश्मीर के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इंटर्न्स का तर्क है कि चूँकि सरकार उनकी माँगों पर ध्यान नहीं दे रही, इसलिए हड़ताल न्यायसंगत है।
इल्तिजा मुफ्ती ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से अपील की है कि वे जल्द से जल्द बैठक बुलाकर इस मुद्दे का समाधान करें, ताकि स्वास्थ्य सेवाएँ सामान्य हो सकें और इंटर्न्स को उनका हक मिल सके।
आगे क्या होगा
यह विवाद जम्मू-कश्मीर की समग्र स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली का प्रतीक बन चुका है। PDP के दबाव और जारी हड़ताल के बीच उमर अब्दुल्ला सरकार पर यह दिखाने का दबाव है कि वह स्वास्थ्य क्षेत्र में काम करने वाले युवाओं के प्रति संवेदनशील है। अगर सरकार जल्द कदम नहीं उठाती, तो यह मुद्दा राजनीतिक रूप से और अधिक गहरा हो सकता है।