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7.8% जीडीपी ग्रोथ आम लोगों के लिए शून्य — ग्रामीण आय स्थिर, सरकार जश्न में मशगूल: सलमान सोज

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7.8% जीडीपी ग्रोथ आम लोगों के लिए शून्य — ग्रामीण आय स्थिर, सरकार जश्न में मशगूल: सलमान सोज

सारांश

7.8% जीडीपी ग्रोथ के सरकारी जश्न के बीच कांग्रेस नेता सलमान सोज का सवाल — जब 10-12 साल में ग्रामीण मजदूरी नहीं बढ़ी, 8 करोड़ युवा बेकार हैं और ₹2.5 लाख करोड़ बाजार से निकल चुके हैं, तो यह ग्रोथ किसके लिए है?

मुख्य बातें

कांग्रेस नेता सलमान सोज ने 1 सितंबर 2026 को वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही की 7.8% जीडीपी ग्रोथ को आम जनता के लिए 'शून्य' करार दिया।
सोज के अनुसार पिछले 10-12 वर्षों में ग्रामीण इलाकों की वास्तविक मजदूरी लगभग स्थिर रही है — सरकारी डेटा के हवाले से।
देश में 8 करोड़ युवा न पढ़ रहे हैं, न काम कर रहे हैं, ऐसा उन्होंने कहा।
2026 में अब तक भारतीय शेयर बाजार से लगभग ₹2.5 लाख करोड़ की विदेशी निकासी हो चुकी है।
सोज ने एआई और जलवायु परिवर्तन पर नीतिगत चर्चा की अनुपस्थिति को भी चिंताजनक बताया।

कांग्रेस नेता सलमान सोज ने 1 सितंबर 2026 को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में दर्ज 7.8 फीसदी जीडीपी ग्रोथ आम जनता के लिए व्यावहारिक रूप से शून्य के बराबर है, क्योंकि ग्रामीण इलाकों में वास्तविक मजदूरी वर्षों से लगभग स्थिर बनी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सोशल मीडिया पर उत्सव मनाने में व्यस्त है, जबकि महंगाई, बेरोजगारी और निजी क्षेत्र में निवेश की कमी जैसी बुनियादी समस्याएँ जस की तस हैं।

जीडीपी आँकड़ों पर सोज का सवाल

सोज ने कहा, 'सरकार ने तिमाही जीडीपी के ताज़ा आँकड़े जारी किए हैं जिसमें ग्रोथ 7.8 फीसदी दिखाई गई है। सरकार इंस्टाग्राम पर जाकर इसका जश्न मनाते दिख रही है। जो लोग इस देश को लेकर चिंतित हैं, उन्हें वे 'दिमागी नक्सल' या कुछ ऐसा कह रहे हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि अगर चिंता की कोई वजह न होती, तो वे सामने न आते, लेकिन उनके अनुसार प्रधानमंत्री जमीनी हकीकत से कटे हुए नजर आते हैं।

ग्रामीण आय और रोजगार की चुनौती

सोज ने सरकारी आँकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि पिछले 10-12 वर्षों में ग्रामीण इलाकों के लोगों की वास्तविक मजदूरी लगभग स्थिर रही है। उनके अनुसार, 'अगर अर्थव्यवस्था इतनी मजबूत है, तो उनकी आय बढ़नी चाहिए — लेकिन सरकारी डेटा कहता है कि वास्तविक मजदूरी जस की तस है, इसलिए उनके लिए अर्थव्यवस्था काम नहीं कर रही।' उन्होंने यह भी बताया कि देश में 8 करोड़ ऐसे युवा हैं जो न पढ़ रहे हैं और न काम कर रहे हैं।

विदेशी निवेशकों की निकासी पर चिंता

कांग्रेस नेता ने निवेश के आँकड़ों को भी आर्थिक दावों के विरुद्ध खड़ा किया। उन्होंने कहा कि 2026 में अब तक भारतीय शेयर बाजार से लगभग ₹2.5 लाख करोड़ की निकासी हो चुकी है। उनके शब्दों में, 'अगर अर्थव्यवस्था इतनी शानदार है, तो निवेशक यहाँ से पैसा क्यों निकाल रहे हैं?' उन्होंने निर्यात में हिस्सेदारी घटने को भी आर्थिक कमजोरी का संकेत बताया।

एआई और जलवायु परिवर्तन की अनदेखी

सोज ने आगाह किया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और जलवायु परिवर्तन जैसी दीर्घकालिक चुनौतियों पर नीतिगत चर्चा लगभग नदारद है। उनके अनुसार देश में पहले से मौजूद समस्याएँ — महंगाई, बेरोजगारी, निजी निवेश की कमी — इन नई चुनौतियों के साथ और गहरी हो जाएँगी, जबकि सरकार का रवैया केवल जश्न तक सीमित है।

विशेषज्ञ संदर्भ और आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब अर्थशास्त्री भी जीडीपी वृद्धि और आम जन की आय के बीच बढ़ती खाई पर सवाल उठा रहे हैं। गौरतलब है कि उच्च जीडीपी ग्रोथ और स्थिर वास्तविक मजदूरी का यह विरोधाभास केवल भारत तक सीमित नहीं है, लेकिन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की बड़ी हिस्सेदारी को देखते हुए भारत के संदर्भ में यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। सरकार की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा हिस्सा है, अगर इस ग्रोथ से वंचित रहती है तो 'विकसित भारत' का लक्ष्य केवल कागजी आँकड़ा बनकर रह जाएगा। ₹2.5 लाख करोड़ की विदेशी निकासी और निर्यात हिस्सेदारी में गिरावट — ये संकेत हैं जिन्हें सरकारी जश्न की आड़ में नजरअंदाज करना महँगा पड़ सकता है। असली परीक्षा यह है कि क्या नीति-निर्माता जीडीपी के साथ-साथ वास्तविक मजदूरी और रोजगार की गुणवत्ता को भी सफलता का पैमाना मानते हैं।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सलमान सोज ने 7.8% जीडीपी ग्रोथ को 'शून्य' क्यों कहा?
सोज का तर्क है कि जीडीपी ग्रोथ का लाभ ग्रामीण जनता तक नहीं पहुँचा — सरकारी डेटा के अनुसार पिछले 10-12 वर्षों में वास्तविक ग्रामीण मजदूरी लगभग स्थिर रही है। उनके अनुसार जो ग्रोथ आम लोगों की आय न बढ़ा सके, वह व्यावहारिक रूप से शून्य के बराबर है।
भारतीय शेयर बाजार से 2026 में कितनी निकासी हुई है?
सोज के अनुसार 2026 में अब तक भारतीय शेयर बाजार से लगभग ₹2.5 लाख करोड़ की विदेशी निकासी हो चुकी है। उन्होंने इसे मजबूत अर्थव्यवस्था के सरकारी दावों के विरुद्ध एक प्रमुख प्रश्न के रूप में उठाया।
8 करोड़ युवाओं के बारे में सोज ने क्या कहा?
सोज ने दावा किया कि देश में 8 करोड़ ऐसे युवा हैं जो न पढ़ रहे हैं और न काम कर रहे हैं। उन्होंने इसे रोजगार संकट और निजी क्षेत्र में निवेश की कमी का परिणाम बताया।
एआई और जलवायु परिवर्तन पर सोज की चिंता क्या है?
सोज ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और जलवायु परिवर्तन जैसी भविष्य की चुनौतियों पर नीतिगत स्तर पर कोई गंभीर चर्चा नहीं हो रही है। उनके अनुसार मौजूदा आर्थिक समस्याएँ इन चुनौतियों के साथ और गंभीर हो जाएँगी।
क्या सरकार ने सोज के आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया दी है?
1 सितंबर 2026 तक केंद्र सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8% जीडीपी ग्रोथ के आँकड़े जारी किए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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