क्या भाजपा ने जीडीपी ग्रोथ पर विकसित विजन को श्रेय दिया, जबकि विपक्ष ने इसे डेड इकोनॉमी कहा?
सारांश
Key Takeaways
- भारत की अर्थव्यवस्था में 7.4% वृद्धि का अनुमान।
- भाजपा ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व को श्रेय दिया।
- विपक्ष ने इसे जमीनी हकीकत से दूर बताया।
- आर्थिक मजबूती के दावों पर सवाल उठाए गए हैं।
- गौर करने योग्य आंकड़े और वास्तविकता में अंतर।
नई दिल्ली, 8 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की अर्थव्यवस्था के 7.4 प्रतिशत की दर से वृद्धि का अनुमान सामने आने के बाद देश की राजनीति में गंभीर बहस छिड़ गई है। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने इस वृद्धि का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, दूरदर्शिता, और कड़े निर्णयों को दिया है, जबकि विपक्षी दलों ने इसे वास्तविकता से दूर और देश की अर्थव्यवस्था को संकटग्रस्त बताया है।
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि वैश्विक चुनौतियों और अनिश्चितताओं के बावजूद भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि टैरिफ में तनाव, वैश्विक अस्थिरता, ऑपरेशन सिंदूर और कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा फैलाए जा रहे कथित दुष्प्रचार के बावजूद भारत की विकास गति मजबूत बनी हुई है।
तरुण चुघ ने कहा कि यह वृद्धि दर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और अथक मेहनत का परिणाम है। उन्होंने यह भी कहा कि जीएसटी स्लैब और इनकम टैक्स में सुधारों से आम जनता को बड़ी राहत मिली है। उनके अनुसार, आर्थिक मजबूती के कारण देश में समृद्धि बढ़ी है और लोगों ने दो बार दीपावली जैसा उत्सव मनाया।
उन्होंने दावा किया कि अब भारत को आत्मनिर्भर बनने और विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने से कोई नहीं रोक सकता।
हालांकि, विपक्षी दलों ने सरकार के इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया। राष्ट्रीय जनता दल के प्रवक्ता मृतुंजय तिवारी ने कहा कि जीडीपी ग्रोथ के आंकड़े भले ही सकारात्मक लगते हों, लेकिन आम जनता की ज़िंदगी की सच्चाई बिल्कुल भिन्न है। उन्होंने कहा कि गरीबों की जेबें खाली हैं, लोग परेशान हैं और आम नागरिकों की स्थिति दिन-ब-दिन बिगड़ रही है। आंकड़ों और वास्तविकता के बीच बड़ा अंतर है।
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने भी सरकार की आर्थिक मजबूती के दावों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस तरह के दावे अक्सर साल की शुरुआत या अंत में किए जाते हैं ताकि माहौल बनाया जा सके। उन्होंने सवाल किया कि अगर अर्थव्यवस्था इतनी मजबूत है तो मनरेगा का अनुपात 90:10 से घटाकर 60:40 क्यों किया गया? महंगाई, बेरोजगारी में वृद्धि क्यों हो रही है, और छोटे-मध्यम उद्योग क्यों बंद हो रहे हैं?
प्रमोद तिवारी ने कहा कि सरकार की बातों और जमीनी सच्चाई में बड़ा फर्क है। उन्होंने कहा कि वास्तविकता यह है कि भारत की अर्थव्यवस्था मृत अवस्था में है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जीडीपी में वित्त वर्ष 2025-26 में 8.0 प्रतिशत की बढ़ोतरी का अनुमान है। यह पहला अग्रिम अनुमान है, जिसका उपयोग सरकार बजट 2026 की नीतियां तय करने में करेगी। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अनुसार, वास्तविक सकल मूल्य वर्धन 7.3 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है और सेवा क्षेत्र विकास का सबसे बड़ा इंजन बना हुआ है।