बिहार: नवादा के एक प्राचीन मंदिर में 18 अद्वितीय पांडुलिपियों की खोज, डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया शुरू
सारांश
मुख्य बातें
पटना, 18 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। बिहार के नवादा जिले के एक प्राचीन मंदिर से 18 अद्वितीय पांडुलिपियों की खोज हुई है, जिसने पूरे क्षेत्र में उत्साह और जिज्ञासा का वातावरण बना दिया है। यह उल्लेखनीय खोज वारिसलीगंज प्रखंड के चांदीपुर गांव के एक ऐतिहासिक मंदिर में की गई।
यह खोज केंद्र सरकार के ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के तहत की गई है और इन पांडुलिपियों के डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है।
जानकारी के अनुसार, ये पांडुलिपियां चांदीपुर गांव के ऐतिहासिक श्री ठाकुर राधा रमण लाल जी मंदिर से प्राप्त की गई हैं, जिसकी स्थापना 1883 में हुई थी।
शनिवार को डिप्टी डेवलपमेंट कमिश्नर नीलिमा साहू के नेतृत्व में किए गए निरीक्षण के दौरान विस्तृत सर्वेक्षण में 18 हस्तलिखित तथा ब्लॉक प्रिंटेड पांडुलिपियां प्राप्त हुईं।
विशेषज्ञों के अनुसार, ये पांडुलिपियां ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और भारत की समृद्ध बौद्धिक परंपरा का प्रतिनिधित्व करती हैं।
सभी पांडुलिपियों को ‘ज्ञान भारतम’ के आधिकारिक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पंजीकृत कर लिया गया है। जिला प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि यह पहल भारत की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने और आने वाली पीढ़ियों के लिए उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
‘ज्ञान भारतम मिशन’ का उद्देश्य देशभर में बिखरी प्राचीन पांडुलिपियों की पहचान करना और उन्हें सुरक्षित रखना है। इनमें से कई पांडुलिपियां ताड़ के पत्तों, भोजपत्र, कपड़े और नाजुक कागज पर लिखी गई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन पांडुलिपियों में आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा, साहित्य और दर्शन, खगोल विज्ञान और विज्ञान सहित स्थानीय इतिहास से संबंधित अमूल्य जानकारी होती है।
सरकार आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से इन ग्रंथों का डिजिटाइजेशन कर उन्हें राष्ट्रीय डिजिटल संग्रह में शामिल करने की योजना बना रही है, ताकि शोधकर्ताओं और आम जनता के लिए इन्हें आसानी से उपलब्ध कराया जा सके।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पांडुलिपियों का स्वामित्व मौजूदा संरक्षकों के पास ही रहेगा, जबकि सरकार केवल वैज्ञानिक तरीके से उनका डिजिटाइजेशन और संरक्षण करेगी।
अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि यदि उनके पास भी ऐसी कोई पांडुलिपि है, तो उसकी जानकारी दें, ताकि देश की इस विरासत को सुरक्षित किया जा सके।
चांदीपुर से मिली ये 18 पांडुलिपियां केवल ऐतिहासिक दस्तावेज नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और बौद्धिक धरोहर की जीवंत पहचान हैं। ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के तहत इनके संरक्षण से आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान का एक महत्वपूर्ण भंडार तैयार होगा।