पाण्डुलिपियाँ भारत की आत्मा हैं — CM योगी ने 'ज्ञान भारतम् मिशन' से जोड़ा संरक्षण का आह्वान

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पाण्डुलिपियाँ भारत की आत्मा हैं — CM योगी ने 'ज्ञान भारतम् मिशन' से जोड़ा संरक्षण का आह्वान

सारांश

पाण्डुलिपियाँ सिर्फ पुराने कागज़ नहीं — CM योगी ने इन्हें भारत की आत्मा कहा। 'ज्ञान भारतम् मिशन' के ज़रिए 7 लाख से अधिक पाण्डुलिपियों की पहचान हो चुकी है। अब डिजिटल रिपोजिटरी बनेगी और आम नागरिकों से भी सहयोग माँगा गया है।

मुख्य बातें

CM योगी आदित्यनाथ ने 18 मई 2025 को प्रदेशवासियों के नाम पाती लिखकर पाण्डुलिपि संरक्षण का आह्वान किया।
केंद्र सरकार की 'ज्ञान भारतम् मिशन' पहल के तहत प्राचीन पाण्डुलिपियों का डिजिटलीकरण जारी है।
अब तक लगभग 7 लाख पाण्डुलिपियों की पहचान की जा चुकी है।
एक राष्ट्रीय डिजिटल रिपोजिटरी बनाई जाएगी जहाँ वैश्विक शोधकर्ता भारत की ज्ञान परंपरा से जुड़ सकेंगे।
नागरिक 'ज्ञान भारतम् मोबाइल ऐप' या उत्तर प्रदेश राजकीय अभिलेखागार को पाण्डुलिपियाँ दान कर सकते हैं।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 18 मई 2025 को प्रदेशवासियों के नाम लिखी एक विशेष पाती में भारत की प्राचीन पाण्डुलिपियों को देश की सांस्कृतिक और बौद्धिक पहचान की आधारशिला बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पाण्डुलिपियों को भारत की आत्मा का अध्याय क्यों मानते हैं, और प्रदेशवासियों से इन अमूल्य धरोहरों के संरक्षण में सक्रिय भागीदारी का अनुरोध किया।

पाण्डुलिपियाँ — ज्ञान की अखंड धारा

सीएम योगी ने अपनी पाती में कहा, 'भारत की यह अक्षुण्ण पहचान श्रवण परंपरा से पाण्डुलिपियों में संरक्षित की गई और तकनीकी उन्नयन के बाद ग्रंथों के रूप में घर-घर पहुँची।' उन्होंने रेखांकित किया कि वेद, उपनिषद, पुराण, रामायण, महाभारत, गीता तथा महात्मा बुद्ध, भगवान महावीर, गुरु नानकदेव और संत कबीर की शिक्षाएँ इन्हीं पाण्डुलिपियों के माध्यम से पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवित रही हैं।

उन्होंने कहा कि भारतीय पाण्डुलिपियाँ विज्ञान, चिकित्सा, गणित, खगोल विज्ञान, साहित्य, कला, वास्तुकला, दर्शन, संगीत और आध्यात्मिकता जैसे विषयों का विशाल ज्ञान-भंडार हैं। यह ज्ञान आज विभिन्न संग्रहालयों, पुस्तकालयों और निजी संग्रहों में बिखरा हुआ है।

ज्ञान भारतम् मिशन — डिजिटल संरक्षण की ऐतिहासिक पहल

मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार की 'ज्ञान भारतम् मिशन' पहल के अंतर्गत प्राचीन पाण्डुलिपियों का डिजिटलीकरण किया जा रहा है। इस मिशन के तहत एक राष्ट्रीय डिजिटल रिपोजिटरी बनाई जाएगी, जहाँ दुनिया भर के विद्यार्थी और शोधकर्ता भारत की ज्ञान परंपरा से सीधे जुड़ सकेंगे। अब तक लगभग 7 लाख पाण्डुलिपियों की पहचान की जा चुकी है।

गौरतलब है कि यह पहल ऐसे समय में आई है जब भारत सरकार विकसित भारत 2047 के विजन को मूर्त रूप देने में जुटी है। सीएम योगी के अनुसार, अतीत के ज्ञान को वर्तमान नवाचार से जोड़ना इस विजन की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

उत्तर प्रदेश — सांस्कृतिक पुनर्जागरण की पुण्यभूमि

योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश को सांस्कृतिक पुनर्जागरण की पुण्यभूमि बताया। उन्होंने अयोध्या में प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर और काशी की अविनाशी परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश इस सांस्कृतिक यात्रा का केंद्र रहा है और रहेगा। पाण्डुलिपियों का संरक्षण इस यात्रा को और सुदृढ़ करेगा।

आम जनता से अपील — कैसे करें सहयोग

सीएम योगी ने प्रदेशवासियों से आग्रह किया कि यदि उनके पास कोई प्राचीन पाण्डुलिपि, हस्तलिखित ग्रंथ या ताड़पत्र उपलब्ध हो, तो उसकी जानकारी 'ज्ञान भारतम् मोबाइल ऐप' अथवा संबंधित पोर्टल पर अपलोड करें। इसके अतिरिक्त, इन्हें उत्तर प्रदेश राजकीय अभिलेखागार को दान भी किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि पाण्डुलिपियों का संरक्षण केवल विरासत को बचाना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान की अमूल्य कुंजी को सुरक्षित रखना है। यह मिशन देश की सभ्यतागत जड़ों के लिए अमृत के समान है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन में है — 7 लाख पाण्डुलिपियों की पहचान और वास्तविक डिजिटलीकरण के बीच की खाई अभी स्पष्ट नहीं है। राष्ट्रीय डिजिटल रिपोजिटरी का विचार दशकों पुराना है; इसे धरातल पर उतारने के लिए स्थायी बजट, प्रशिक्षित जनशक्ति और गुणवत्ता-नियंत्रण ढाँचे की ज़रूरत होगी। निजी संग्रहों में बिखरी पाण्डुलिपियों को स्वेच्छा से सामने लाने की अपील तब तक सीमित असर देगी जब तक कानूनी सुरक्षा और उचित मुआवज़े का स्पष्ट प्रावधान न हो। सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की भाषा और व्यावहारिक संरक्षण नीति — दोनों को साथ चलना होगा।
RashtraPress
18 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ज्ञान भारतम् मिशन क्या है?
ज्ञान भारतम् मिशन केंद्र सरकार की एक पहल है जिसके तहत भारत की प्राचीन पाण्डुलिपियों को डिजिटल रूप में संरक्षित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत एक राष्ट्रीय डिजिटल रिपोजिटरी भी बनाई जाएगी जहाँ दुनिया भर के शोधकर्ता भारत की ज्ञान परंपरा तक पहुँच सकेंगे।
अब तक कितनी पाण्डुलिपियाँ चिह्नित की जा चुकी हैं?
CM योगी आदित्यनाथ के अनुसार अब तक लगभग 7 लाख पाण्डुलिपियों की पहचान की जा चुकी है। ये पाण्डुलिपियाँ विभिन्न संग्रहालयों, पुस्तकालयों और निजी संग्रहों में उपलब्ध हैं।
आम नागरिक पाण्डुलिपि संरक्षण में कैसे सहयोग कर सकते हैं?
यदि किसी के पास प्राचीन पाण्डुलिपि, हस्तलिखित ग्रंथ या ताड़पत्र है, तो वे 'ज्ञान भारतम् मोबाइल ऐप' या संबंधित पोर्टल पर उसकी जानकारी अपलोड कर सकते हैं। इसके अलावा, इन्हें उत्तर प्रदेश राजकीय अभिलेखागार को दान भी किया जा सकता है।
पाण्डुलिपियों में किन विषयों का ज्ञान संरक्षित है?
भारतीय पाण्डुलिपियों में विज्ञान, चिकित्सा, गणित, खगोल विज्ञान, साहित्य, कला, वास्तुकला, दर्शन, संगीत और आध्यात्मिकता जैसे विषयों का विशाल ज्ञान-भंडार है। CM योगी के अनुसार, यह ज्ञान श्रवण परंपरा से पाण्डुलिपियों में संरक्षित होकर पीढ़ियों तक पहुँचा।
यह मिशन विकसित भारत 2047 से कैसे जुड़ा है?
CM योगी आदित्यनाथ के अनुसार, पाण्डुलिपियों के संरक्षण और डिजिटलीकरण से देश अतीत के ज्ञान को वर्तमान नवाचार से जोड़ सकेगा, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक विकसित भारत के विजन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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