ज्ञान भारतम मिशन के तहत एशियाटिक सोसायटी द्वारा 2,033 पांडुलिपियों का स्कैनिंग कार्य

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ज्ञान भारतम मिशन के तहत एशियाटिक सोसायटी द्वारा 2,033 पांडुलिपियों का स्कैनिंग कार्य

सारांश

क्या आपने सुना? एशियाटिक सोसाइटी ने ज्ञान भारतम् मिशन के तहत 2,033 पांडुलिपियों को स्कैन किया है। जानें इस महत्वाकांक्षी परियोजना के बारे में और कैसे यह भारतीय सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित कर रहा है।

मुख्य बातें

एशियाटिक सोसाइटी ने 2,033 पांडुलिपियों को स्कैन किया है।
इस प्रक्रिया में कुल 1,46,099 पेज शामिल हैं।
पांडुलिपियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक उपाय किए गए हैं।
संस्थान ने अब तक 11,528 पांडुलिपियों को डिजिटाइज किया है।
इस परियोजना से भारतीय सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।

नई दिल्ली, 30 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। लोकसभा में सोमवार को यह जानकारी दी गई कि कोलकाता स्थित एशियाटिक सोसाइटी ने 23 मार्च तक कुल 2,033 पांडुलिपियों को स्कैन किया है, जिसमें 1,46,099 पेज शामिल हैं। यह कार्य ज्ञान भारतम् मिशन के अंतर्गत पांडुलिपियों की स्कैनिंग हेतु क्लस्टर सेंटर स्थापित किए जाने के बाद किया गया।

केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने लिखित उत्तर में बताया कि एशियाटिक सोसाइटी में सुरक्षा के लिए आवश्यक उपाय किए गए हैं। यहाँ आग से बचाव के सिस्टम और आपदा प्रबंधन नियम लागू हैं।

उन्होंने कहा कि यह संस्था राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), पश्चिम बंगाल सरकार के फायर और इमरजेंसी विभाग और स्थानीय पुलिस के साथ लगातार संवाद में रहती है।

मंत्री ने जानकारी दी कि सोसाइटी अब तक 11,528 पांडुलिपियों को डिजिटाइज कर चुकी है, जिनमें कुल 5,72,890 पेज हैं।

शेखावत ने बताया कि मंत्रालय से मिलने वाली वित्तीय सहायता से संस्था के मुख्य कार्य संचालित होते हैं और आवश्यकतानुसार समय-समय पर इसकी समीक्षा की जाती है।

उन्होंने बताया कि एशियाटिक सोसाइटी की ऐतिहासिक इमारत भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के तहत है और इसकी मरम्मत एवं संरक्षण का कार्य एएसआई द्वारा किया जाता है।

उन्होंने यह भी कहा कि सोसाइटी के म्यूजियम में संग्रहीत पांडुलिपियों, दुर्लभ पुस्तकों और वस्तुओं के लिए उचित तापमान एवं आर्द्रता बनाए रखने का प्रबंध है।

सोसाइटी समय-समय पर अपनी पांडुलिपियों और दुर्लभ वस्तुओं की स्थिति की नियमित रूप से जांच करती रहती है। यह कार्य कैटलॉग बनाने वाले कर्मचारियों और अन्य अधिकारियों की क्यूरेटर की निगरानी में होता है।

उन्होंने जानकारी दी कि संस्था के पास अपना संरक्षण और बाइंडिंग सेक्शन भी है। 2022 में पांडुलिपि संरक्षण केंद्र बनने के बाद से 35,624 पन्नों का संरक्षण और 4,596 दुर्लभ पन्नों की मरम्मत की जा चुकी है। म्यूजियम और आर्काइव सेक्शन में कैटलॉग बनाना एक नियमित प्रक्रिया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी सुरक्षित रखेगी।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एशियाटिक सोसाइटी ने कितनी पांडुलिपियों को स्कैन किया है?
एशियाटिक सोसाइटी ने 23 मार्च 2023 तक कुल 2,033 पांडुलिपियों को स्कैन किया है।
ज्ञान भारतम् मिशन क्या है?
ज्ञान भारतम् मिशन एक पहल है जिसका उद्देश्य भारतीय पांडुलिपियों के संरक्षण और स्कैनिंग को बढ़ावा देना है।
पांडुलिपियों की सुरक्षा के लिए क्या उपाय किए गए हैं?
सोसाइटी में आग से बचाव के सिस्टम और आपदा प्रबंधन के नियम लागू किए गए हैं।
क्या एशियाटिक सोसाइटी के पास सुरक्षा उपाय हैं?
हाँ, एशियाटिक सोसाइटी में सुरक्षा के लिए आवश्यक उपाय और नियम बनाए गए हैं।
पांडुलिपियों का डिजिटाइजेशन कब शुरू हुआ?
पांडुलिपियों का डिजिटाइजेशन काफी समय से चल रहा है, और अब तक 11,528 पांडुलिपियाँ डिजिटाइज की जा चुकी हैं।
राष्ट्र प्रेस
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