भारत की दस्तावेजी विरासत को संरक्षित करने की दिशा में गजेंद्र सिंह शेखावत का ऐतिहासिक कदम

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भारत की दस्तावेजी विरासत को संरक्षित करने की दिशा में गजेंद्र सिंह शेखावत का ऐतिहासिक कदम

सारांश

केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने भारत की दस्तावेजी विरासत के संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की घोषणा की है, जिसमें 20 करोड़ से अधिक अभिलेखीय पृष्ठों का डिजिटलीकरण किया गया है। यह कदम भविष्य की पीढ़ियों के लिए अमूल्य दस्तावेजों को सुरक्षित रखने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।

Key Takeaways

  • 20 करोड़ से अधिक अभिलेखीय पृष्ठों का डिजिटलीकरण
  • आम जनता के लिए अभिलेखों की उपलब्धता
  • पारदर्शिता और पहुंच का विस्तार
  • भविष्य की पीढ़ियों के लिए दस्तावेजों का संरक्षण
  • सुरक्षा इंतजाम और आपदा प्रबंधन

नई दिल्ली, 20 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से कहा कि भारत की दस्तावेजी विरासत को सहेजने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है।

उन्होंने उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व के साथ ही 'डिजिटल इंडिया' के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता के चलते, देश के राष्ट्रीय अभिलेखागार ने एक पोर्टल के माध्यम से 20 करोड़ से अधिक अभिलेखीय पृष्ठों का डिजिटलीकरण किया है और इन्हें आम जनता के लिए सुलभ बनाया गया है।

यह परिवर्तनकारी पहल मिशन मोड में शुरू की गई है, जो पारदर्शिता को बढ़ाने, शोधकर्ताओं और नागरिकों के लिए पहुंच का विस्तार करने और यह सुनिश्चित करने में मदद कर रही है कि हमारे अमूल्य राष्ट्रीय अभिलेख भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रहें।

गजेंद्र सिंह शेखावत ने 30 मार्च को लोकसभा में बताया कि एशियाटिक सोसाइटी कोलकाता ने 23 मार्च तक कुल 2,033 पांडुलिपियों को स्कैन किया है, जिसमें कुल 1,46,099 पृष्ठ शामिल हैं। यह कार्य तब किया गया जब इस संस्था को ज्ञान भारतम् मिशन के तहत पांडुलिपियों की स्कैनिंग के लिए क्लस्टर सेंटर बनाया गया। उन्होंने कहा कि सोसाइटी अब तक 11,528 पांडुलिपियों को डिजिटाइज कर चुकी है, जिनमें कुल 5,72,890 पेज हैं।

मंत्री ने यह भी बताया कि संस्था के पास संरक्षण और बाइंडिंग का एक सेक्शन है। 2022 में पांडुलिपि संरक्षण केंद्र बनने के बाद से 35,624 पन्नों का संरक्षण और 4,596 दुर्लभ पन्नों की मरम्मत की जा चुकी है। म्यूजियम और आर्काइव सेक्शन में कैटलॉग बनाना एक नियमित प्रक्रिया है।

गजेंद्र सिंह शेखावत ने लिखित जवाब में कहा कि एशियाटिक सोसाइटी में सुरक्षा के लिए आवश्यक इंतजाम किए गए हैं, जिसमें आग से बचाव के सिस्टम और आपदा प्रबंधन के नियम शामिल हैं। उन्होंने बताया कि संस्था का राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), पश्चिम बंगाल सरकार के फायर और इमरजेंसी विभाग और स्थानीय पुलिस से लगातार संपर्क बना रहता है।

Point of View

बल्कि शोधकर्ताओं और आम नागरिकों के लिए भी अभिलेखों की पहुंच आसान होगी। यह कदम भविष्य की पीढ़ियों के लिए हमारी सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
NationPress
21/04/2026

Frequently Asked Questions

भारत की दस्तावेजी विरासत को सहेजने की पहल कब शुरू हुई?
यह पहल हाल ही में शुरू की गई है, जिसमें 20 करोड़ से अधिक अभिलेखीय पृष्ठों का डिजिटलीकरण किया गया है।
गजेंद्र सिंह शेखावत ने इस पहल के बारे में कब जानकारी दी?
उन्होंने 30 मार्च को लोकसभा में इस पहल के बारे में जानकारी दी थी।
एशियाटिक सोसाइटी कोलकाता ने कितनी पांडुलिपियों को स्कैन किया है?
एशियाटिक सोसाइटी कोलकाता ने 23 मार्च तक कुल 2,033 पांडुलिपियों को स्कैन किया है।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस पहल का मुख्य उद्देश्य भारत की दस्तावेजी विरासत को सुरक्षित करना और आम जनता के लिए सुलभ बनाना है।
क्या सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं?
एशियाटिक सोसाइटी में आग से बचाव के सिस्टम और आपदा प्रबंधन के नियम निर्धारित किए गए हैं।
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