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कदावुल मंदिर: अमेरिका में 7000 मील दूर भगवान शिव का अद्भुत स्वरूप

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कदावुल मंदिर: अमेरिका में 7000 मील दूर भगवान शिव का अद्भुत स्वरूप

सारांश

क्या आप जानते हैं कि अमेरिका के हवाई में एक अद्भुत शिव मंदिर है, जहां भगवान शिव की उपासना की जाती है? कदावुल मंदिर, जहां जंगल की रक्षा खुद भोलेबाबा करते हैं, आस्था और सुंदरता का प्रतीक है।

मुख्य बातें

कदावुल मंदिर अमेरिका के हवाई में स्थित है।
यह मंदिर भगवान शिव के नटराज रूप को समर्पित है।
मंदिर में स्फटिक का शिवलिंग है, जो अद्वितीय है।
मंदिर का निर्माण श्री लंकाई शैली में किया गया है।
दर्शन का समय सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक है।

नई दिल्ली, 21 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत में अनेक भगवान शिव को समर्पित मंदिर हैं, जिनका अपना विशेष महत्व और इतिहास है। देश में बारह ज्योतिर्लिंगों की मान्यता अत्यधिक है, जिन्हें भगवान शिव के जीवंत और चमत्कारी रूप माना जाता है। लेकिन क्या आपको पता है कि भारत की सीमाओं से परे, एक ऐसा शिव मंदिर है, जहां स्वयं भोलेबाबा जंगल की रक्षा करते हैं?

यह अद्भुत मंदिर भारत से सात हजार मील से अधिक दूर, अमेरिका के हवाई राज्य के काउई द्वीप के घने जंगलों में स्थित है।

काउई द्वीप, संयुक्त राज्य अमेरिका के हवाई राज्य का सबसे पुराना और चौथा सबसे बड़ा द्वीप है, जहां कदावुल मंदिर का निर्माण किया गया है। कहा जाता है कि इस मंदिर के आस-पास एक तेज ऊर्जा का प्रवाह होता है, जो वहां आने वाले भक्तों के लिए अनुभव किया जाता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह ऊर्जा भगवान शिव की है, जो हमेशा मंदिर में निवास करती है और भक्तों को अपने आशीर्वाद से सराबोर करती है।

कदावुल मंदिर न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि इसकी खूबसूरती भी बेजोड़ है। मंदिर के प्रांगण में अद्भुत पेड़-पौधे हैं, और भगवान शिव के अलावा, मां पार्वती, नंदी महाराज, मुरुगन, और गणेश भगवान की प्रतिमाएं भी यहाँ मौजूद हैं। मंदिर में एक बड़ा पानी का कुंड भी है, जिसमें हमेशा पानी भरा रहता है। मंदिर के निर्माण में श्री लंकाई शैली का प्रभाव देखा जा सकता है, और यहां के शंभों पर बने चित्र भारतीय परंपरा से भिन्न हैं।

यदि हम मंदिर के गर्भगृह की बात करें, तो यहाँ 700 पाउंड वजनी और 3 फुट

गर्भगृह के सामने लावा चट्टान और रेडवुड की लकड़ी से बना एक मंडप है, जिसमें 32,000 पाउंड वजन की एक ही पत्थर से तराशी गई नंदी की प्रतिमा स्थापित है। यह मंदिर सतगुरु शिवाय सुब्रमण्यस्वामी द्वारा 1973 में स्थापित किया गया था और भगवान शिव के नटराज रूप को समर्पित है।

याद रखें कि मंदिर के दर्शन का समय सुबह 9 बजे से लेकर दोपहर 12 बजे तक है। इसके बाद श्रद्धालुओं को मंदिर में दर्शन करने की अनुमति नहीं है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो न केवल भारतीय संस्कृति का प्रतीक है, बल्कि एक अनूठी आस्था का केंद्र भी है। यह मंदिर अपने अद्भुत निर्माण, प्राकृतिक सौंदर्य और भगवान शिव की उपासना के लिए मशहूर है।
RashtraPress
29 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कदावुल मंदिर कहाँ स्थित है?
कदावुल मंदिर अमेरिका के हवाई राज्य के काउई द्वीप के घने जंगलों में स्थित है।
कदावुल मंदिर की स्थापना कब हुई थी?
कदावुल मंदिर की स्थापना 1973 में सतगुरु शिवाय सुब्रमण्यस्वामी ने की थी।
कदावुल मंदिर में दर्शन का समय क्या है?
कदावुल मंदिर में दर्शन का समय सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक है।
कदावुल मंदिर में क्या खास है?
कदावुल मंदिर में 700 पाउंड वजनी स्फटिक का शिवलिंग और नटराज की विशाल प्रतिमा है।
कदावुल मंदिर की खासियत क्या है?
यह मंदिर अपनी अद्भुत स्थापत्य कला और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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