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एआई, सेमीकंडक्टर और रेलवे भारत के अगले चरण का नेतृत्व करेंगे: वैष्णव

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एआई, सेमीकंडक्टर और रेलवे भारत के अगले चरण का नेतृत्व करेंगे: वैष्णव

सारांश

अश्विनी वैष्णव ने CII शिखर सम्मेलन में भारत की तीन रणनीतिक प्राथमिकताओं की घोषणा की: रेलवे पूंजीगत खर्च को चार गुना बढ़ाना (₹2,72,000 करोड़), इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में आत्मनिर्भरता, और एआई में स्पष्ट नीति। 49,000 किलोमीटर रेलवे विद्युतीकरण और वैश्विक अनिश्चितता के बीच आर्थिक लचीलेपन पर ज़ोर।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 11 मई को कहा कि एआई, सेमीकंडक्टर और रेलवे अगले चरण के बदलाव का नेतृत्व करेंगे।
रेलवे पूंजीगत खर्च पिछले वित्त वर्ष में ₹2,72,000 करोड़ रहा, कुछ वर्षों पहले ₹66,000 करोड़ से चार गुना वृद्धि।
लगभग 49,000 किलोमीटर रेलवे ट्रैक का विद्युतीकरण पूरा, जो जर्मनी के संपूर्ण नेटवर्क के बराबर।
इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण सुविधाओं की नई लहर गुणवत्ता-केंद्रित प्रथाओं को बढ़ावा दे रही है।
वैष्णव ने एआई को इतिहास की सबसे क्रांतिकारी तकनीकी क्रांतियों में से एक बताया।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 11 मई को नई दिल्ली में कहा कि वैश्विक अस्थिरता के बीच भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मजबूती से आगे बढ़ रहा है, और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), सेमीकंडक्टर तथा रेलवे अगले चरण के परिवर्तन का नेतृत्व करेंगे। भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के वार्षिक व्यापार शिखर सम्मेलन 2026 के उद्घाटन सत्र में बोलते हुए वैष्णव ने भारत की रणनीतिक प्राथमिकताओं की रूपरेखा प्रस्तुत की।

रेलवे क्षेत्र में असाधारण रूपांतरण

वैष्णव ने रेलवे सेक्टर में आए तेज़ी से बदलाव पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि पूंजीगत खर्च पिछले वित्त वर्ष में ₹2,72,000 करोड़ रहा, जो कुछ वर्षों पहले ₹66,000 करोड़ था — यह लगभग चार गुना की वृद्धि है। वैष्णव के अनुसार, "पूरे रेलवे सिस्टम की निष्पादन क्षमता में एक साथ विस्तार हुआ है, जो परियोजना कार्यान्वयन और वितरण में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन को दर्शाता है।"

इस विस्तार का एक प्रमुख उदाहरण रेलवे ट्रैक का विद्युतीकरण है। वैष्णव ने बताया कि लगभग 49,000 किलोमीटर रेलवे ट्रैक का विद्युतीकरण पूरा किया जा चुका है, जो जर्मनी के संपूर्ण रेलवे नेटवर्क के बराबर है। इसके अलावा, डिब्बों और इंजनों के उत्पादन में भी मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है।

इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में नई गति

देश भर में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण सुविधाओं की एक नई लहर गुणवत्ता-केंद्रित और किफायती विनिर्माण प्रथाओं को बढ़ावा दे रही है। वैष्णव के अनुसार, यह तकनीकी रूप से उन्नत और आत्मनिर्भर भारत की नींव तैयार कर रहा है। यह विकास प्रोडक्शन-लिंक्ड इन्सेंटिव (PLI) योजना के विस्तार और सेमीकंडक्टर निर्माण में भारत के बढ़ते निवेश का परिणाम है।

एआई: भविष्य की प्रौद्योगिकी

वैष्णव ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता को इतिहास की सबसे क्रांतिकारी तकनीकी क्रांतियों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि एआई अभूतपूर्व गति से दुनिया को नया आकार दे रही है। वैष्णव ने जोर देते हुए कहा, "भारत को एआई के प्रति एक स्पष्ट और रणनीतिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए, यह सुनिश्चित करते हुए कि देश इस तकनीक का लाभ उठाकर सभी क्षेत्रों में उत्पादकता, गुणवत्ता और उत्पादन दक्षता में सुधार करे।"

वैश्विक अनिश्चितता और आर्थिक लचीलापन

वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितता और निरंतर संघर्षों के संदर्भ में, वैष्णव ने कहा कि प्रधानमंत्री की राष्ट्र के नाम की अपील आज और भी अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। भारत की ऊर्जा आयात पर भारी निर्भरता और आर्थिक स्थिरता के लिए विदेशी मुद्रा भंडार के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे विदेशी मुद्रा बहिर्वाह को बढ़ावा देने वाले खर्चों को कम करें और विदेशी मुद्रा अर्जित करने के प्रयासों को बढ़ाएँ।

क्या होगा आगे

ये तीनों क्षेत्र — एआई, सेमीकंडक्टर और रेलवे — आने वाले वर्षों में भारत की आर्थिक रणनीति के केंद्रबिंदु रहेंगे। रेलवे में भारी पूंजी निवेश, इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण में आत्मनिर्भरता, और एआई में रणनीतिक नीति निर्माण मिलकर भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बनाने का प्रयास कर रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

रेलवे में ₹2,72,000 करोड़ का निवेश — जो ₹66,000 करोड़ से चार गुना है — दिखाता है कि सरकार बुनियादी ढाँचे में दीर्घकालिक प्रतिबद्धता दे रही है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह खर्च ट्रैक विद्युतीकरण के बाहर सार्थक परिणाम दे रहा है। दूसरा, इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर में आत्मनिर्भरता की बातचीत PLI की सफलता पर निर्भर करती है, जिसकी रोज़गार सृजन के मामले में पिछली समीक्षाएँ मिश्रित रहीं। तीसरा, एआई पर 'स्पष्ट और रणनीतिक दृष्टिकोण' की अपील वास्तविक नीति से अधिक आकांक्षात्मक लगती है — भारत अभी भी डेटा गोपनीयता, कंप्यूटिंग अवसंरचना, और कुशल एआई जनशक्ति के मामले में पिछड़ा है। वैश्विक अनिश्चितता और विदेशी मुद्रा संरक्षण पर ज़ोर देना राष्ट्रवादी दृष्टिकोण को दर्शाता है, लेकिन यह पूँजी-गहन विनिर्माण को आकर्षित करने के लिए आवश्यक बहु-वर्षीय नीति स्थिरता की गारंटी नहीं देता।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अश्विनी वैष्णव ने कहा कि अगले चरण के बदलाव का नेतृत्व कौन करेगा?
वैष्णव के अनुसार, एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता), सेमीकंडक्टर और रेलवे भारत के अगले चरण के बदलाव का नेतृत्व करेंगे। उन्होंने इन तीनों क्षेत्रों को सरकार की रणनीतिक प्राथमिकताओं के रूप में चिह्नित किया।
रेलवे में पूंजीगत खर्च में कितनी वृद्धि हुई है?
रेलवे पूंजीगत खर्च पिछले वित्त वर्ष में ₹2,72,000 करोड़ रहा, जबकि कुछ वर्षों पहले यह ₹66,000 करोड़ था। यह लगभग चार गुना की वृद्धि दर्शाता है और परियोजना कार्यान्वयन में तेजी का संकेत है।
रेलवे विद्युतीकरण में भारत ने क्या हासिल किया है?
भारत ने लगभग 49,000 किलोमीटर रेलवे ट्रैक का विद्युतीकरण पूरा किया है, जो जर्मनी के संपूर्ण रेलवे नेटवर्क के बराबर है। यह विद्युतीकरण पहल भारत के ऊर्जा संक्रमण और परिवहन दक्षता में सुधार का एक प्रमुख हिस्सा है।
इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में भारत की रणनीति क्या है?
भारत देश भर में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण सुविधाओं की एक नई लहर विकसित कर रहा है, जो गुणवत्ता-केंद्रित और किफायती विनिर्माण प्रथाओं पर ध्यान केंद्रित करती है। यह प्रोडक्शन-लिंक्ड इन्सेंटिव (PLI) योजना के माध्यम से समर्थित है और सेमीकंडक्टर में आत्मनिर्भरता का लक्ष्य रखता है।
वैष्णव ने एआई के बारे में क्या कहा?
वैष्णव ने एआई को इतिहास की सबसे क्रांतिकारी तकनीकी क्रांतियों में से एक बताया और कहा कि यह अभूतपूर्व गति से दुनिया को नया आकार दे रही है। उन्होंने भारत से एआई के प्रति एक स्पष्ट और रणनीतिक दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया, ताकि सभी क्षेत्रों में उत्पादकता और दक्षता में सुधार हो सके।
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