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जीडीपी 7.8% पर, पर गरीब की थाली खाली: राजद सांसद मनोज झा का मोदी सरकार पर तीखा हमला

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जीडीपी 7.8% पर, पर गरीब की थाली खाली: राजद सांसद मनोज झा का मोदी सरकार पर तीखा हमला

सारांश

राजद सांसद मनोज झा ने 7.8% जीडीपी वृद्धि के सरकारी दावे को चुनौती दी — दूध, सीएनजी, पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और दिल्ली में बिगड़ती कानून-व्यवस्था का हवाला देकर पूछा: जब गरीब की थाली खाली है, तो आँकड़ों का उत्सव किसके लिए?

मुख्य बातें

राजद सांसद मनोज झा ने 1 सितंबर को 7.8% जीडीपी वृद्धि के दावे को आम जनता के लिए अपर्याप्त बताया।
झा ने मुंबई में दूध , दिल्ली में सीएनजी , पेट्रोल-डीजल और प्याज की बढ़ती कीमतों को महंगाई के प्रमाण के रूप में उद्धृत किया।
PM मोदी की 'झूठ की गूंज' रील को BJP के आईटी सेल की रणनीति बताते हुए युवाओं से जुड़ाव पर सवाल उठाया।
राहुल गांधी के खिलाफ हल्द्वानी में दर्ज एफआईआर को कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे के कार्यक्रम विवाद से जोड़ते हुए राजनीतिक प्रेरणा का आरोप लगाया।
एससीओ समिट में मोदी के शांति संदेश और देश के भीतर राजनीतिक विरोधियों के प्रति भाषा में विरोधाभास बताया।
नोएडा-दिल्ली बस गैंगरेप समेत कानून-व्यवस्था की घटनाओं पर प्रधानमंत्री से सार्वजनिक प्रतिक्रिया की माँग।

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद मनोज झा ने 1 सितंबर को केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि 7.8 फीसदी जीडीपी वृद्धि का कोई अर्थ नहीं, जब तक इसका फायदा देश के गरीब और आम आदमी की थाली तक नहीं पहुँचता। नई दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए झा ने दूध, सीएनजी, पेट्रोल-डीजल और प्याज सहित तमाम ज़रूरी वस्तुओं की बढ़ती कीमतों का हवाला देकर सरकार की आर्थिक प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े किए।

जीडीपी आँकड़े बनाम ज़मीनी हकीकत

मनोज झा ने कहा कि आर्थिक विकास का असली पैमाना संख्याएँ नहीं, बल्कि आम परिवारों की क्रय शक्ति और जीवन स्तर है। उन्होंने तर्क दिया कि जब मुंबई में दूध और दिल्ली में सीएनजी के दाम बढ़ रहे हों, प्याज और पेट्रोल-डीजल की कीमतें घरेलू बजट पर भारी पड़ रही हों, और घरेलू विमान सेवाओं का किराया ईंधन लागत के कारण और महँगा होने की आशंका हो — तो ऐसे में जीडीपी के उत्सव का दावा वास्तविकता से कोसों दूर है। उन्होंने कहा कि आर्थिक व्यवस्था का उद्देश्य संसाधनों का समान वितरण होना चाहिए, न कि केवल समग्र आँकड़ों में सुधार।

सोशल मीडिया रणनीति पर निशाना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक हालिया रील, जिसमें कथित तौर पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर 'झूठ की गूंज' के ज़रिए निशाना साधा गया था, पर भी झा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे भारतीय जनता पार्टी (BJP) के आईटी सेल की रणनीति बताते हुए कहा कि सोशल मीडिया वीडियो बनाने से देश की युवा पीढ़ी — खासकर 'जेनजी' — की भावनाओं को नहीं समझा जा सकता। झा ने प्रधानमंत्री से अपील की कि वे देश के स्कूलों और विश्वविद्यालयों की वास्तविक स्थिति का जायज़ा लें और युवाओं की अपेक्षाओं को जमीनी स्तर पर जाकर समझें।

हल्द्वानी एफआईआर और राजनीतिक विवाद

राहुल गांधी के खिलाफ हल्द्वानी में दर्ज एफआईआर पर भी मनोज झा ने सवाल उठाए। उनके अनुसार यह मामला उस विवाद से जुड़ा है, जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के एक कार्यक्रम के बाद कथित तौर पर मंच के 'शुद्धिकरण' को लेकर विवाद हुआ था। झा ने कहा कि वे स्वयं उस समय सदन में मौजूद थे जब खड़गे ने अपनी पीड़ा व्यक्त की और BJP अध्यक्ष जेपी नड्डा को खेद जताना पड़ा। इसके बावजूद राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज होना, उनके अनुसार, गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि देश संविधान की आधुनिक संवेदनाओं के आधार पर चलेगा, मध्ययुगीन मान्यताओं के आधार पर नहीं।

एससीओ समिट और शांति संदेश पर सवाल

प्रधानमंत्री मोदी के एससीओ समिट में दिए उस बयान — कि 'युद्ध मानवता को पीछे ले जाता है' — पर झा ने कहा कि विदेश की धरती पर शांति का संदेश देना स्वागत योग्य है, लेकिन यही नसीहत अमेरिका को भी दी जानी चाहिए थी। उन्होंने विरोधाभास की ओर ध्यान दिलाया कि एक ओर विदेश में शांति की बात और दूसरी ओर देश के भीतर राजनीतिक विरोधियों के लिए 'झूठ की गूंज' जैसी शब्दावली का प्रयोग — ये दोनों एक साथ उचित नहीं लगते।

दिल्ली की कानून-व्यवस्था पर चिंता

मनोज झा ने दिल्ली की बिगड़ती कानून-व्यवस्था पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने नोएडा से दिल्ली तक एक युवती के साथ बस में कथित गैंगरेप की घटना, हत्याओं और स्कूलों में हमलों का उल्लेख करते हुए कहा कि जनता में सुरक्षा को लेकर गहरी नाराजगी है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में BJP की 'चार इंजन' वाली सरकार होने का दावा किया जाता है, ऐसे में कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी से मुँह नहीं मोड़ा जा सकता। झा ने प्रधानमंत्री से माँग की कि वे ऐसी गंभीर घटनाओं पर सार्वजनिक रूप से स्पष्ट प्रतिक्रिया दें और जनता को भरोसा दिलाएँ कि इनकी पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएँगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन जब खाद्य मुद्रास्फीति और ऊर्जा लागत एक साथ बढ़ रही हों, तो समग्र GDP आँकड़ा वितरणात्मक न्याय का पैमाना नहीं बनता। असली सवाल यह है कि क्या सरकार के पास कोई ठोस तंत्र है जो यह सुनिश्चित करे कि वृद्धि का लाभ निचले पायदान तक पहुँचे — और क्या विपक्ष इस माँग को केवल संसद की बहसों तक सीमित रखेगा या जनता के बीच ले जाएगा।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजद सांसद मनोज झा ने जीडीपी आँकड़ों पर क्या कहा?
मनोज झा ने कहा कि 7.8% जीडीपी वृद्धि तब तक अर्थहीन है जब तक उसका फायदा गरीब और आम आदमी की थाली तक नहीं पहुँचता। उन्होंने दूध, सीएनजी, पेट्रोल-डीजल और प्याज की बढ़ती कीमतों को महंगाई के प्रमाण के रूप में पेश किया।
मनोज झा ने PM मोदी की 'झूठ की गूंज' रील पर क्या प्रतिक्रिया दी?
झा ने इसे BJP के आईटी सेल की रणनीति बताया और कहा कि सोशल मीडिया वीडियो से देश की युवा पीढ़ी की भावनाओं को नहीं समझा जा सकता। उन्होंने प्रधानमंत्री से स्कूलों और विश्वविद्यालयों की ज़मीनी स्थिति देखने की अपील की।
हल्द्वानी में राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर पर मनोज झा का क्या कहना है?
झा ने कहा कि यह एफआईआर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कार्यक्रम के बाद कथित मंच 'शुद्धिकरण' विवाद से जुड़ी है। उनके अनुसार, जब नड्डा को खेद जताना पड़ा था, उसके बाद राहुल गांधी पर एफआईआर दर्ज होना सवाल खड़े करता है।
दिल्ली की कानून-व्यवस्था पर मनोज झा ने क्या माँग की?
झा ने नोएडा-दिल्ली बस गैंगरेप समेत कई आपराधिक घटनाओं का हवाला देकर प्रधानमंत्री से सार्वजनिक प्रतिक्रिया की माँग की। उन्होंने कहा कि BJP की 'चार इंजन' सरकार होने का दावा करने वाले कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी से नहीं बच सकते।
एससीओ समिट में मोदी के शांति संदेश पर झा ने क्या कहा?
झा ने कहा कि विदेश में शांति का संदेश देना अच्छा है, लेकिन देश के भीतर राजनीतिक विरोधियों के लिए 'झूठ की गूंज' जैसी शब्दावली का इस्तेमाल इस संदेश को कमज़ोर करता है। उन्होंने अमेरिका को भी ऐसी नसीहत देने की ज़रूरत बताई।
राष्ट्र प्रेस
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