मध्य प्रदेश कैबिनेट का बड़ा फैसला: डेयरी और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए ₹41,000 करोड़ का पैकेज मंजूर
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिमंडल ने मंगलवार, 1 सितंबर 2026 को भोपाल में लगभग ₹41,000 करोड़ के व्यापक विकास पैकेज को मंजूरी दी। इस पैकेज में डेयरी सेक्टर की प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ाने के लिए ₹1,547 करोड़ और बुनियादी ढाँचे को सुदृढ़ करने के लिए बड़ी राशि शामिल है।
मुख्य घटनाक्रम
कैबिनेट बैठक के बाद लोक निर्माण विभाग के मंत्री राकेश सिंह ने मीडिया को जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्वीकृत पैकेज में विकसित भारत-जी राम जी योजना को लागू करने के लिए ₹29,619 करोड़ आवंटित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, दूध उत्पादकों और डेयरी सेक्टर के विकास के लिए कुल ₹2,973 करोड़ मंजूर किए गए हैं।
डेयरी सेक्टर पर फोकस
मंजूर राशि में से ₹1,547 करोड़ विशेष रूप से विभिन्न डेयरी उत्पादों की प्रोसेसिंग क्षमता विस्तार के लिए निर्धारित किए गए हैं। डेयरी विकास योजना के अंतर्गत सरकार ने अगले पाँच वर्षों में सहकारी दुग्ध समितियों के नेटवर्क को मौजूदा 7,331 गाँवों से बढ़ाकर 26,000 गाँवों तक पहुँचाने का लक्ष्य तय किया है।
मंत्री सिंह के अनुसार, दूध संग्रह को वर्तमान 12 लाख किलोग्राम से बढ़ाकर 52 लाख किलोग्राम प्रतिदिन किया जाएगा। इसी तरह, प्रोसेसिंग क्षमता को मौजूदा 17.8 लाख लीटर से बढ़ाकर 63.3 लाख लीटर प्रतिदिन तक ले जाने की योजना है। दूध पैकेट की बिक्री भी 7 लाख लीटर से बढ़कर 35 लाख लीटर प्रतिदिन होने का अनुमान है।
केंद्र सरकार की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि केंद्रीय सहकारिता एवं गृह मंत्री अमित शाह पहले ही मध्य प्रदेश सरकार को मिशन मोड में दुग्ध सहकारी समितियों की संख्या बढ़ाकर दूध उत्पादन में तेज़ी लाने की सलाह दे चुके थे। यह कैबिनेट निर्णय उसी दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है।
आम जनता और किसानों पर असर
मंत्री सिंह ने ज़ोर देकर कहा कि इन उपायों से राज्य भर के दूध उत्पादकों को सीधा लाभ मिलेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार के नए अवसर उत्पन्न होंगे। उन्होंने कहा कि ये फैसले बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और कृषि-डेयरी अर्थव्यवस्था को गति देने की सरकार की प्राथमिकता को दर्शाते हैं।
क्या होगा आगे
सरकार के अनुसार, ये निर्णय मध्य प्रदेश में किसानों और पशुपालकों के लिए संतुलित विकास और बेहतर आजीविका सुनिश्चित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं। योजनाओं के क्रियान्वयन की रफ्तार और सहकारी नेटवर्क के विस्तार पर अब सभी की नज़रें टिकी रहेंगी।