राहुल गांधी का भाजपा और निर्वाचन आयोग पर हमला: महाराष्ट्र में 2.07 करोड़ नाम हटाने को बताया 'वोट चोरी'
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार, 1 सितंबर को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) और भारत निर्वाचन आयोग (ECI) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया में हेरफेर के ज़रिए देश के लोकतंत्र को कमज़ोर किया जा रहा है। महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल की मतदाता सूचियों में हुए संशोधनों को उन्होंने 'वोट चोरी' करार दिया।
राहुल गांधी के मुख्य आरोप
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में BJP को सीधे निशाने पर लेते हुए कहा कि पार्टी और जिसे उन्होंने 'वोट चोरी आयोग' कहा, उसके तरीके भले ही बदलते रहें, लेकिन उनका मकसद एक ही है — किसी भी कीमत पर BJP की जीत सुनिश्चित करना और भारत के लोकतंत्र को कमज़ोर करना। यह ऐसे समय में आया है जब कई विपक्षी दल मतदाता सूची की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं।
महाराष्ट्र मतदाता सूची विवाद
गांधी ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 का हवाला देते हुए दावा किया कि लोकसभा चुनाव 2024 और विधानसभा चुनाव 2024 के बीच अचानक 39 लाख नए मतदाता सूची में जोड़े गए थे। उन्होंने उस समय भी इसे 'वोट चोरी' बताया था और अपने आरोप पर अब भी कायम रहने की बात कही।
उन्होंने आँकड़े साझा करते हुए कहा कि लोकसभा चुनाव 2024 में महाराष्ट्र में 9.29 करोड़ मतदाता थे, जो विधानसभा चुनाव 2024 तक बढ़कर 9.70 करोड़ हो गए। किंतु 2026 की विशेष पुनरीक्षण सूची में यह संख्या घटकर 7.78 करोड़ रह गई। उनके अनुसार, ड्राफ्ट सूची से 2.07 करोड़ मतदाताओं के नाम बाहर किए गए हैं, जो कुल मतदाताओं का लगभग पाँचवाँ हिस्सा है। गांधी ने सवाल किया कि इन तीनों में से सही मतदाता सूची कौन-सी है।
पश्चिम बंगाल में पुनरीक्षण पर सवाल
पश्चिम बंगाल में हुई विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए राहुल गांधी ने दावा किया कि सूची से हटाए गए नामों में से 91 प्रतिशत नाम अपील के बाद फिर से जोड़े गए। उनके मुताबिक, इसका अर्थ है कि हर 10 में से 9 नाम गलत तरीके से हटाए गए थे। गौरतलब है कि यह आँकड़ा, यदि सत्यापित हो, तो पुनरीक्षण प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
लोकतंत्र पर व्यापक चिंता
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि 'वोट चोरी' के ज़रिए सत्ता में आई सरकारें जनता की आवाज़ नहीं सुनतीं और न ही उनके आदेशों का पालन करती हैं। आलोचकों का कहना है कि मतदाता सूची में इस तरह के बड़े उतार-चढ़ाव चुनावी प्रक्रिया में जनता के भरोसे को कमज़ोर करते हैं। निर्वाचन आयोग या BJP की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आगे क्या होगा
यह मुद्दा संसद के अगले सत्र और आगामी राज्य चुनावों की पृष्ठभूमि में राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बना रहेगा। विपक्षी दलों द्वारा निर्वाचन आयोग से स्पष्टीकरण की माँग किए जाने की संभावना है। मतदाता सूची की पारदर्शिता और स्वतंत्र-निष्पक्ष चुनाव की बहस अब नए सिरे से तेज़ होने के आसार हैं।