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7.8% जीडीपी ग्रोथ पर कांग्रेस का पलटवार: पवन खेड़ा बोले — महंगाई-रोजगार पर जवाब दे सरकार

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7.8% जीडीपी ग्रोथ पर कांग्रेस का पलटवार: पवन खेड़ा बोले — महंगाई-रोजगार पर जवाब दे सरकार

सारांश

7.8% जीडीपी ग्रोथ को उपलब्धि बताने पर कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा का तीखा पलटवार — मुंबई में दूध ₹9/लीटर और दिल्ली में CNG ₹3/kg महंगी होने का हवाला देते हुए पूछा: आंकड़े बढ़ रहे हैं, तो आम आदमी की थाली क्यों महंगी हो रही है?

मुख्य बातें

कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने 1 सितंबर को 7.8% जीडीपी ग्रोथ को सरकार की बड़ी उपलब्धि मानने से इनकार किया।
मुंबई में दूध ₹9 प्रति लीटर और दिल्ली में सीएनजी ₹3 प्रति किलोग्राम महंगी होने का हवाला देते हुए महंगाई पर सरकार को घेरा।
खेड़ा ने सवाल किया कि तेज आर्थिक वृद्धि के बावजूद बड़ी आबादी मुफ्त राशन पर निर्भर क्यों है।
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में वास्तविक रोजगार सृजन और किसानों को जीडीपी वृद्धि का लाभ न मिलने पर भी सवाल उठाए।
प्रधानमंत्री मोदी के युद्ध-विरोधी बयान पर खेड़ा ने सरकार की विदेश नीति की नैतिक स्थिति पर भी प्रश्नचिह्न लगाया।

कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने 1 सितंबर को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला, यह कहते हुए कि 7.8 प्रतिशत जीडीपी ग्रोथ को उपलब्धि के रूप में पेश करना पर्याप्त नहीं है — जब तक महंगाई, बेरोजगारी और कृषि संकट के ठोस जवाब न दिए जाएं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस आर्थिक विकास दर को देश की बड़ी उपलब्धि बताए जाने के बाद कांग्रेस ने यह पलटवार किया।

जीडीपी आंकड़ों पर खेड़ा की आपत्ति

खेड़ा ने कहा कि सरकार एक तिमाही के आंकड़ों के आधार पर अपनी पीठ थपथपा रही है, लेकिन असली सवाल यह है कि इस आर्थिक वृद्धि का लाभ समाज के किस वर्ग को और कितना मिला। उन्होंने पूछा कि किसानों, युवाओं और आम परिवारों की स्थिति में वास्तविक सुधार कहाँ दिखाई देता है। उनके अनुसार, आर्थिक विकास तभी सार्थक माना जाएगा जब उसका असर समाज के हर तबके तक पहुँचे।

महंगाई और घरेलू बजट पर दबाव

मुंबई में दूध की कीमत में ₹9 प्रति लीटर की बढ़ोतरी और दिल्ली में सीएनजी के दाम में ₹3 प्रति किलोग्राम की वृद्धि का हवाला देते हुए खेड़ा ने कहा कि आम परिवारों के घरेलू बजट पर लगातार दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि यदि जीडीपी इतनी मजबूत है, तो दूध की हर थैली पर जीडीपी का आंकड़ा छाप देना चाहिए। चीनी और अन्य जरूरी वस्तुओं की बढ़ती कीमतों का भी उन्होंने उल्लेख किया।

रोजगार और मुफ्त राशन का सवाल

खेड़ा ने तर्क दिया कि यदि अर्थव्यवस्था इतनी तेजी से बढ़ रही है, तो बड़ी संख्या में लोगों को अभी भी मुफ्त राशन पर निर्भर क्यों रहना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि देश की बड़ी आबादी युवा है और रोजगार उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में वास्तविक सुधार और रोजगार सृजन के आंकड़ों पर भी उन्होंने सरकार से सवाल किया।

विदेश नीति और नैतिक स्थिति पर सवाल

प्रधानमंत्री मोदी के 'युद्ध मानवता को पीछे ले जाता है' वाले बयान — जो रूस और ईरान के संदर्भ में दिया गया था — पर खेड़ा ने आरोप लगाया कि कुछ अंतरराष्ट्रीय संघर्षों में सरकार के रुख के कारण दूसरे देशों को युद्ध रोकने की सलाह देने की उसकी नैतिक स्थिति पर सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा कि भारत को वैश्विक संघर्षों में अपनी कूटनीतिक भूमिका स्पष्ट करनी चाहिए।

सरकार से सीधी माँग

खेड़ा ने कहा कि प्रधानमंत्री ने कथित तौर पर लोगों को सोना न खरीदने, बड़ी शादियाँ न करने और विदेश न जाने जैसी सलाहें दी हैं — लेकिन इससे महंगाई और बेरोजगारी का समाधान नहीं होगा। उनके अनुसार, केवल यह कहना पर्याप्त नहीं कि देश निराश न हो; सरकार को जनता की वास्तविक परेशानियों का ठोस जवाब देना होगा। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कमी और कृषि क्षेत्र में सुधार पर भी उन्होंने सरकार से जवाबदेही माँगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

और मुफ्त राशन पर निर्भरता इसका सबसे स्पष्ट संकेत है। सरकार के पास आंकड़े हैं, लेकिन आंकड़ों की व्याख्या — कि किसे कितना मिला — वह पारदर्शिता अभी भी अनुपस्थित है। जब तक रोजगार की गुणवत्ता, वास्तविक मजदूरी और कृषि आय को जीडीपी के साथ नहीं जोड़ा जाता, तब तक विकास दर की सुर्खी और आम आदमी की रसोई के बीच की दूरी बनी रहेगी।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पवन खेड़ा ने 7.8% जीडीपी ग्रोथ पर क्या आपत्ति जताई?
खेड़ा ने कहा कि एक तिमाही के जीडीपी आंकड़े सरकार की उपलब्धि नहीं हो सकते, जब तक यह स्पष्ट न हो कि इस वृद्धि का लाभ किसानों, युवाओं और आम परिवारों तक कितना पहुँचा। उनके अनुसार, आर्थिक विकास तभी सार्थक है जब वह समाज के हर वर्ग तक पहुँचे।
महंगाई के कौन-से आंकड़े खेड़ा ने सामने रखे?
खेड़ा ने मुंबई में दूध की कीमत में ₹9 प्रति लीटर और दिल्ली में सीएनजी के दाम में ₹3 प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी का उल्लेख किया। इसके अलावा चीनी और अन्य जरूरी वस्तुओं की बढ़ती कीमतों का हवाला देते हुए कहा कि घरेलू बजट पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।
खेड़ा ने मुफ्त राशन का मुद्दा क्यों उठाया?
उन्होंने तर्क दिया कि यदि अर्थव्यवस्था 7.8% की दर से बढ़ रही है, तो बड़ी संख्या में लोगों की मुफ्त राशन पर निर्भरता यह दर्शाती है कि जीडीपी वृद्धि का लाभ निचले तबके तक नहीं पहुँच रहा। यह सवाल समावेशी विकास की अवधारणा पर सीधा प्रहार है।
खेड़ा ने प्रधानमंत्री के युद्ध-विरोधी बयान पर क्या कहा?
रूस और ईरान के संदर्भ में प्रधानमंत्री मोदी के 'युद्ध मानवता को पीछे ले जाता है' वाले बयान पर खेड़ा ने आरोप लगाया कि कुछ अंतरराष्ट्रीय संघर्षों में सरकार के रुख के कारण दूसरे देशों को युद्ध रोकने की सलाह देने की उसकी नैतिक स्थिति कमजोर पड़ती है। उन्होंने कहा कि भारत को वैश्विक संघर्षों में अपनी कूटनीतिक भूमिका स्पष्ट करनी चाहिए।
कांग्रेस ने सरकार से क्या माँग की है?
कांग्रेस ने माँग की है कि सरकार जीडीपी ग्रोथ के साथ-साथ महंगाई नियंत्रण, रोजगार सृजन, कृषि क्षेत्र में सुधार और आम आदमी की वास्तविक आय पर ठोस जवाब दे। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कमी और मैन्युफैक्चरिंग में वास्तविक रोजगार के आंकड़े भी सार्वजनिक किए जाने की माँग की गई।
राष्ट्र प्रेस
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