पेट्रोल-डीजल-सीएनजी की बढ़ती कीमतों पर कांग्रेस का हमला, सरकार पर महंगाई नियंत्रण में विफलता का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ने 26 मई को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला, यह आरोप लगाते हुए कि पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की लगातार बढ़ती कीमतों ने आम जनता की कमर तोड़ दी है और सरकार महंगाई पर काबू पाने में पूरी तरह नाकाम रही है। पार्टी ने माँग की है कि केंद्र तत्काल ईंधन कीमतों में राहत दे और संसद में इस विषय पर विस्तृत चर्चा कराए।
मुख्य घटनाक्रम
कांग्रेस सांसद जेबी माथेर ने कहा, 'बहुत पहले ही कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी ने माँग की थी कि इन संकटों पर संसद में चर्चा होनी चाहिए। लेकिन सरकार का जवाब सिर्फ 'सब चंगा है' रहा। अब हर दिन पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतें बढ़ रही हैं।' उन्होंने आगे कहा कि यह केवल ईंधन की महंगाई नहीं है — खाद्य क्षेत्र, कृषि, मछली पालन, होटल और परिवहन जैसा हर क्षेत्र इससे प्रभावित हो रहा है।
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वारिंग ने मुक्तसर साहिब से कहा, 'आज जनता वोट डालने जा रही है तो सिर्फ एक संदेश देने के लिए कि हालात बहुत खराब हो गए हैं। आम लोगों की कमर महंगाई ने तोड़ दी है। उनके पास गाड़ी चलाने और ईंधन भरने के पैसे नहीं बचे हैं।'
विपक्ष की प्रतिक्रिया
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बी.के. हरिप्रसाद ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार इस मुद्दे से लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा, 'देश के शीर्ष पद पर बैठे लोग हर दो-तीन दिन में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ा रहे हैं। सरकार चर्चा से भाग रही है और जनता की समस्याओं को नजरअंदाज कर रही है।'
कांग्रेस के आरोप और माँगें
कांग्रेस का कहना है कि सरकार मध्य-पूर्व संकट का हवाला देकर आम जनता पर ईंधन महंगाई का बोझ डाल रही है। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि संसद सत्र में इस अहम मुद्दे पर कोई बहस नहीं हुई और सरकार विपक्षी दलों से संवाद करने से बच रही है। गौरतलब है कि ईंधन की ऊँची कीमतें परिवहन लागत बढ़ाकर खाद्य वस्तुओं, कृषि उत्पादों और रोज़मर्रा की ज़रूरतों को भी महँगा बना देती हैं, जिसका सीधा असर निम्न और मध्यम आय वर्ग पर पड़ता है।
आम जनता पर असर
ईंधन मूल्य वृद्धि का प्रभाव केवल पंप तक सीमित नहीं रहता। परिवहन लागत बढ़ने से सब्जी, दूध और अनाज जैसी आवश्यक वस्तुएँ महँगी होती हैं। मछुआरों और किसानों के लिए डीजल की ऊँची कीमत परिचालन खर्च बढ़ाती है, जबकि सीएनजी की बढ़ती दरें ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों की आजीविका पर सीधा असर डालती हैं।
क्या होगा आगे
कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि वह संसद के अगले सत्र में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाएगी और सरकार से ईंधन कीमतों में तत्काल कटौती की माँग जारी रखेगी। यह ऐसे समय में आया है जब आगामी चुनावी प्रक्रिया के बीच महंगाई एक प्रमुख जन-मुद्दा बनती जा रही है।