12 जुलाई 2026
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मध्य-पूर्व संकट से पेट्रोल-डीजल की मार, विपक्ष का केंद्र पर हमला — 'चुनाव बाद बढ़ाई कीमतें'

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मध्य-पूर्व संकट से पेट्रोल-डीजल की मार, विपक्ष का केंद्र पर हमला — 'चुनाव बाद बढ़ाई कीमतें'

सारांश

मध्य-पूर्व तनाव की आड़ में ईंधन की कीमतें बढ़ाने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस, AAP, TMC और SP एकजुट हो गए हैं। विपक्ष का कहना है कि चुनाव के दौरान कीमतें काबू में रखी गईं और नतीजे आते ही बढ़ोतरी शुरू हो गई — आम जनता की जेब पर सीधी मार।

मुख्य बातें

मध्य-पूर्व संकट के बीच पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी जारी है, जिसका असर पूरे बाजार पर पड़ रहा है।
कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव खत्म होते ही सरकार ने ईंधन की कीमतें बढ़ानी शुरू कर दीं।
AAP दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज के अनुसार हर पाँच-छह दिन में कीमतों में बढ़ोतरी हो रही है।
TMC नेता कुणाल घोष ने पेट्रोल, एलपीजी और कमर्शियल गैस — सभी में बढ़ोतरी को 'गंभीर स्थिति' बताया और विरोध प्रदर्शन की घोषणा की।
SP पूर्व विधायक पवन पांडे ने उत्तर प्रदेश में बिजली कटौती और सरकारी दफ्तरों में भ्रष्टाचार का भी मुद्दा उठाया।

मध्य-पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने नई दिल्ली समेत देशभर में आम जनता की परेशानी बढ़ा दी है। 26 मई 2026 को विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर एकजुट होकर निशाना साधा और आरोप लगाया कि हाल के विधानसभा चुनावों के दौरान ईंधन की कीमतें जानबूझकर नियंत्रित रखी गईं और नतीजे आते ही बढ़ोतरी का सिलसिला शुरू हो गया।

कांग्रेस का आरोप: चुनाव बाद बदली नीति

कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने मीडिया से बातचीत में कहा कि जब हाल के विधानसभा चुनाव चल रहे थे, तब सरकार ने महंगाई या ईंधन मूल्यवृद्धि पर कोई खुली चर्चा नहीं की। उनके अनुसार, 'चुनाव खत्म होते ही सरकार ने धीरे-धीरे ईंधन की कीमतें बढ़ानी शुरू कर दीं।' पायलट ने कहा कि सरकार कभी खाड़ी क्षेत्र, ईरान और अमेरिका के बीच तनाव का हवाला देती है और कभी किसी अन्य कारण का, लेकिन इसका सीधा बोझ आम जनता पर पड़ रहा है।

पायलट ने यह भी कहा कि पेट्रोल-डीजल महंगे होने से केवल वाहन चलाना नहीं, बल्कि परिवहन खर्च बढ़ने के कारण हर वस्तु और सेवा की कीमत बढ़ जाती है। उन्होंने सरकार पर महंगाई नियंत्रण की कोई ठोस योजना न होने का आरोप लगाया।

AAP का निशाना: हर पाँच-छह दिन में बढ़ोतरी

आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता और दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि पिछले कुछ समय से हर पाँच-छह दिन में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी हो रही है, जिससे आम लोगों पर वित्तीय दबाव बढ़ता जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी पहले से यह कहती आई है कि 'सरकार चुनावों के समय कीमतें काबू में रखती है और जैसे ही चुनाव समाप्त होते हैं, बढ़ोतरी का सिलसिला शुरू हो जाता है।'

TMC और SP की प्रतिक्रिया

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेता कुणाल घोष ने बढ़ती कीमतों को 'बेहद गंभीर स्थिति' बताया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में कई चरणों में मूल्यवृद्धि हुई है — कभी पेट्रोल, कभी एलपीजी और कभी कमर्शियल गैस। घोष के अनुसार ट्रांसपोर्ट महंगा होने से पूरे बाजार पर असर पड़ रहा है और उनकी पार्टी इस बढ़ोतरी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रही है।

समाजवादी पार्टी (SP) के पूर्व विधायक पवन पांडे ने कहा कि उत्तर प्रदेश में लगातार बिजली कटौती, पेट्रोल-डीजल और गैस की बढ़ती कीमतों ने आम जीवन कठिन कर दिया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि थाने, अस्पताल और तहसील जैसे सरकारी दफ्तरों में भ्रष्टाचार और शोषण बढ़ा है, जिससे जनता में असंतोष है।

आम जनता पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब खुदरा महंगाई पहले से ही दबाव में है। ईंधन की ऊँची कीमतें परिवहन लागत के जरिए खाद्य पदार्थों से लेकर दैनिक उपभोग की वस्तुओं तक — हर चीज को महंगा करती हैं। गौरतलब है कि मध्य-पूर्व में ईरान-अमेरिका तनाव और खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता के चलते वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है, जिसका सीधा असर भारत के ईंधन मूल्य निर्धारण पर पड़ता है।

आगे क्या

विपक्षी दलों ने संसद और सड़क — दोनों मोर्चों पर दबाव बनाने के संकेत दिए हैं। केंद्र सरकार की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यदि कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें ऊँची बनी रहीं, तो आने वाले हफ्तों में और बढ़ोतरी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस बार चार अलग-अलग दलों का एकसाथ बोलना राजनीतिक दबाव की तीव्रता दर्शाता है। असली सवाल यह है कि क्या केंद्र सरकार ईंधन पर उत्पाद शुल्क में कटौती जैसे किसी राहत उपाय की ओर जाएगी — जैसा 2022 में किया गया था — या अंतरराष्ट्रीय कीमतों का हवाला देकर बढ़ोतरी को उचित ठहराती रहेगी। मध्य-पूर्व तनाव एक वास्तविक कारक है, लेकिन भारत में ईंधन मूल्य निर्धारण पर सरकार का पर्याप्त नियंत्रण है कि वह राहत दे सके — अगर राजनीतिक इच्छाशक्ति हो। महंगाई की यह लहर यदि जारी रही, तो यह आगामी चुनावी राज्यों में सत्तारूढ़ दल के लिए असुविधाजनक साबित हो सकती है।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मध्य-पूर्व संकट से भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?
मध्य-पूर्व में ईरान-अमेरिका तनाव और खाड़ी क्षेत्र की अस्थिरता से वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ा है, जिसका सीधा असर भारत के ईंधन मूल्य निर्धारण पर पड़ता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतें बढ़ने पर घरेलू दाम भी बढ़ते हैं।
विपक्ष का केंद्र सरकार पर क्या आरोप है?
कांग्रेस, AAP, TMC और SP का आरोप है कि सरकार विधानसभा चुनावों के दौरान जानबूझकर ईंधन की कीमतें नियंत्रित रखती है और चुनाव खत्म होते ही बढ़ोतरी शुरू कर देती है। कांग्रेस नेता सचिन पायलट और AAP के सौरभ भारद्वाज दोनों ने इस 'चुनाव-कैलेंडर' रणनीति का आरोप लगाया है।
पेट्रोल-डीजल महंगा होने से आम जनता पर क्या असर पड़ता है?
ईंधन की ऊँची कीमतें परिवहन लागत बढ़ाती हैं, जिससे खाद्य पदार्थों से लेकर दैनिक उपभोग की हर वस्तु महंगी हो जाती है। TMC नेता कुणाल घोष के अनुसार पेट्रोल के अलावा एलपीजी और कमर्शियल गैस की कीमतें भी बढ़ी हैं, जिससे पूरे बाजार पर दबाव है।
AAP और TMC ने इस मुद्दे पर क्या कदम उठाए हैं?
TMC नेता कुणाल घोष ने बताया कि उनकी पार्टी बढ़ती कीमतों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रही है। AAP के सौरभ भारद्वाज ने भी हर पाँच-छह दिन में होने वाली बढ़ोतरी पर आपत्ति जताते हुए केंद्र सरकार से राहत की माँग की है।
उत्तर प्रदेश में ईंधन महंगाई के अलावा और क्या मुद्दे उठाए गए?
SP के पूर्व विधायक पवन पांडे ने उत्तर प्रदेश में बिजली कटौती और थाने, अस्पताल व तहसील जैसे सरकारी दफ्तरों में बढ़ते भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया। उनके अनुसार इन समस्याओं के कारण जनता में व्यापक असंतोष है।
राष्ट्र प्रेस
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