मध्य-पूर्व संकट से पेट्रोल-डीजल की मार, विपक्ष का केंद्र पर हमला — 'चुनाव बाद बढ़ाई कीमतें'
सारांश
मुख्य बातें
मध्य-पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने नई दिल्ली समेत देशभर में आम जनता की परेशानी बढ़ा दी है। 26 मई 2026 को विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर एकजुट होकर निशाना साधा और आरोप लगाया कि हाल के विधानसभा चुनावों के दौरान ईंधन की कीमतें जानबूझकर नियंत्रित रखी गईं और नतीजे आते ही बढ़ोतरी का सिलसिला शुरू हो गया।
कांग्रेस का आरोप: चुनाव बाद बदली नीति
कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने मीडिया से बातचीत में कहा कि जब हाल के विधानसभा चुनाव चल रहे थे, तब सरकार ने महंगाई या ईंधन मूल्यवृद्धि पर कोई खुली चर्चा नहीं की। उनके अनुसार, 'चुनाव खत्म होते ही सरकार ने धीरे-धीरे ईंधन की कीमतें बढ़ानी शुरू कर दीं।' पायलट ने कहा कि सरकार कभी खाड़ी क्षेत्र, ईरान और अमेरिका के बीच तनाव का हवाला देती है और कभी किसी अन्य कारण का, लेकिन इसका सीधा बोझ आम जनता पर पड़ रहा है।
पायलट ने यह भी कहा कि पेट्रोल-डीजल महंगे होने से केवल वाहन चलाना नहीं, बल्कि परिवहन खर्च बढ़ने के कारण हर वस्तु और सेवा की कीमत बढ़ जाती है। उन्होंने सरकार पर महंगाई नियंत्रण की कोई ठोस योजना न होने का आरोप लगाया।
AAP का निशाना: हर पाँच-छह दिन में बढ़ोतरी
आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता और दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि पिछले कुछ समय से हर पाँच-छह दिन में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी हो रही है, जिससे आम लोगों पर वित्तीय दबाव बढ़ता जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी पहले से यह कहती आई है कि 'सरकार चुनावों के समय कीमतें काबू में रखती है और जैसे ही चुनाव समाप्त होते हैं, बढ़ोतरी का सिलसिला शुरू हो जाता है।'
TMC और SP की प्रतिक्रिया
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेता कुणाल घोष ने बढ़ती कीमतों को 'बेहद गंभीर स्थिति' बताया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में कई चरणों में मूल्यवृद्धि हुई है — कभी पेट्रोल, कभी एलपीजी और कभी कमर्शियल गैस। घोष के अनुसार ट्रांसपोर्ट महंगा होने से पूरे बाजार पर असर पड़ रहा है और उनकी पार्टी इस बढ़ोतरी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रही है।
समाजवादी पार्टी (SP) के पूर्व विधायक पवन पांडे ने कहा कि उत्तर प्रदेश में लगातार बिजली कटौती, पेट्रोल-डीजल और गैस की बढ़ती कीमतों ने आम जीवन कठिन कर दिया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि थाने, अस्पताल और तहसील जैसे सरकारी दफ्तरों में भ्रष्टाचार और शोषण बढ़ा है, जिससे जनता में असंतोष है।
आम जनता पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब खुदरा महंगाई पहले से ही दबाव में है। ईंधन की ऊँची कीमतें परिवहन लागत के जरिए खाद्य पदार्थों से लेकर दैनिक उपभोग की वस्तुओं तक — हर चीज को महंगा करती हैं। गौरतलब है कि मध्य-पूर्व में ईरान-अमेरिका तनाव और खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता के चलते वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है, जिसका सीधा असर भारत के ईंधन मूल्य निर्धारण पर पड़ता है।
आगे क्या
विपक्षी दलों ने संसद और सड़क — दोनों मोर्चों पर दबाव बनाने के संकेत दिए हैं। केंद्र सरकार की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यदि कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें ऊँची बनी रहीं, तो आने वाले हफ्तों में और बढ़ोतरी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।