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क्या महंगाई-समायोजित जीडीपी आंकड़े भ्रामक हैं? जयराम रमेश का आरोप!

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क्या महंगाई-समायोजित जीडीपी आंकड़े भ्रामक हैं? जयराम रमेश का आरोप!

सारांश

कांग्रेस ने जीडीपी आंकड़ों पर उठाए सवाल। जयराम रमेश ने कहा कि महंगाई समायोजित आंकड़े असली आर्थिक तस्वीर नहीं दिखाते। क्या ये आंकड़े जनता को गुमराह कर रहे हैं? जानिए इस विवाद के पीछे की सच्चाई।

मुख्य बातें

महंगाई समायोजित जीडीपी के आंकड़े भ्रामक हो सकते हैं।
कम प्राइस डिफ्लेटर्स उपभोक्ता मांग की कमजोरी का संकेत हैं।
सरकार की आर्थिक नीतियों में सुधार की आवश्यकता है।
कॉरपोरेट सेक्टर में निवेश में कमी चिंता का विषय है।
निवेश माहौल को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष कदम उठाने की जरूरत है।

नई दिल्ली, 15 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस ने गुरुवार को केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों और जीडीपी वृद्धि के आंकड़ों पर गंभीर सवाल उठाए। पार्टी का कहना है कि महंगाई समायोजित (इन्फ्लेशन-एडजस्टेड) जीडीपी ग्रोथ रेट के जो बड़े-बड़े आंकड़े प्रस्तुत किए जा रहे हैं, वे असल में देश की अर्थव्यवस्था की सही तस्वीर नहीं दर्शाते और आम जनता को गुमराह करते हैं।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पार्टी के संचार प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि महंगाई को ध्यान में रखते हुए जो जीडीपी ग्रोथ दर बताई जा रही है, वह भ्रामक है।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इन आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर इसलिए दिखाया जा रहा है क्योंकि जिन प्राइस डिफ्लेटर्स (कीमतों के समायोजन के आधार) का उपयोग किया गया है, वे असामान्य रूप से बहुत कम हैं।

जयराम रमेश ने कहा, "महंगाई समायोजित जीडीपी वृद्धि दर के मुख्य आंकड़े धोखा देने वाले हैं। जब प्राइस डिफ्लेटर्स बहुत कम रखे जाते हैं, तो स्वाभाविक रूप से वृद्धि दर अधिक दिखाई देती है।"

उनके मुताबिक, सरकार इसे अपनी उपलब्धि के तौर पर पेश कर सकती है, लेकिन हकीकत इसके ठीक उलट है।

उन्होंने दावा किया कि कम प्राइस डिफ्लेटर्स दरअसल कमजोर उपभोक्ता मांग का संकेत हैं।

रमेश ने कहा, "कम कीमतों का आंकड़ा सरकार के लिए खुशी की बात हो सकता है, लेकिन इसकी असली वजह यह है कि आम लोगों की आय नहीं बढ़ी है। आय में वृद्धि केवल समाज के सबसे ऊपरी तबके तक सीमित है, जबकि बाकी आबादी की आमदनी ठहरी हुई है।"

कांग्रेस नेता ने कॉरपोरेट सेक्टर की स्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश की बड़ी कंपनियों के पास इस समय भारी मात्रा में नकदी मौजूद है। कॉरपोरेट इंडिया के पास रिकॉर्ड स्तर का कैश है। मुनाफा भी रिकॉर्ड ऊंचाई पर है और कर्ज ऐतिहासिक रूप से सबसे कम है। इसके बावजूद कंपनियां नए निवेश और क्षमता विस्तार में रुचि नहीं दिखा रही हैं।

जयराम रमेश ने कहा कि आने वाले केंद्रीय बजट को इस सवाल का सीधा जवाब देना चाहिए कि कंपनियां उत्पादन बढ़ाने में निवेश करने के बजाय वित्तीय बाजारों में संपत्ति प्रबंधन पर ज्यादा ध्यान क्यों दे रही हैं।

उनके मुताबिक, देश के निवेश माहौल को एक बड़े 'बूस्टर डोज' की जरूरत है।

उन्होंने सरकार की नीति पर निशाना साधते हुए कहा कि कॉरपोरेट टैक्स में लगातार की गई कटौतियां भी मांग बढ़ाने में नाकाम रही हैं। टैक्स कट्स की पूरी श्रृंखला मांग को बढ़ाने में पूरी तरह विफल रही है।

जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि समस्या केवल बजट या कर नीति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकार के पूरे राजनीतिक-आर्थिक मॉडल से जुड़ी है।

उन्होंने कहा कि बढ़ता बाजार एकाधिकार और सरकार का संरक्षण निजी निवेश और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को हतोत्साहित कर रहा है, जिसका असर सीधे अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि सरकार को अपने आर्थिक नीतियों का पुनर्मूल्यांकन करने की आवश्यकता है। आंकड़ों के पीछे छिपी वास्तविकता को उजागर करना और आम जनता की चिंताओं को समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महंगाई समायोजित जीडीपी क्या है?
महंगाई समायोजित जीडीपी वह आंकड़ा है, जो सामान्य जीडीपी की तुलना में महंगाई को ध्यान में रखकर गणना की जाती है।
कांग्रेस का आरोप क्या है?
कांग्रेस का आरोप है कि सरकार द्वारा प्रस्तुत जीडीपी के आंकड़े भ्रामक हैं और असली आर्थिक स्थिति को छिपा रहे हैं।
जयराम रमेश ने क्या कहा?
जयराम रमेश ने कहा कि महंगाई समायोजित जीडीपी वृद्धि दर के आंकड़े धोखा देने वाले हैं।
राष्ट्र प्रेस
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