अमिताभ बच्चन ने रात की खामोशी का जिक्र करते हुए साझा की अपनी भावनाएं
सारांश
Key Takeaways
- मुंबई की रात में छाई शांति का अनुभव
- प्रकृति की दवा के रूप में महत्व
- रात का सन्नाटा और उसकी सुंदरता
- बड़े शहरों में भी शांति की तलाश संभव है
- प्रदूषण में कमी और ताजगी का अहसास
मुंबई, 7 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। अभिनेता अमिताभ बच्चन अक्सर अपने पिता हरिवंश राय बच्चन की कविताओं को अपने अनूठे अंदाज में अपने ब्लॉग पर प्रस्तुत करते हैं, लेकिन इस बार उन्होंने अपने पिता से प्रेरित होकर अपने विचार साझा किए हैं।
अमिताभ बच्चन ने रात के खामोश वातावरण की खूबसूरती का बखान किया है। उन्होंने अपने ब्लॉग में मुंबई की रात की अद्भुत शांति के बारे में लिखा। उन्होंने कहा कि मुंबई जैसे व्यस्त शहर में रात के समय एक अजीब-सी शांति छा जाती है। दिनभर की भागदौड़ के बाद रात में सड़कों पर सुनसान हो जाती हैं और चारों ओर गहरा सन्नाटा होता है। उन्होंने लिखा, "मुंबई की यह शांति कई लोगों को डरावनी लगती है, लेकिन मेरे लिए इसमें एक अलग तरह की आश्चर्यजनक खूबसूरती है।"
देर रात का एक अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा, "जब मैं यह सब लिख रहा था, तभी एक गाड़ी सड़क के गड्ढे से टकराई और सन्नाटा टूट गया। रात 1 बजे अक्सर तेज बाइक की आवाज सुनाई देती है। शायद कोई व्यक्ति काम से लौट रहा हो या नई शिफ्ट के लिए जा रहा हो। ये छोटी आवाजें रात की खामोशी को और गहराई देती हैं।"
उन्होंने आसमान के रंग की सुंदरता का भी जिक्र किया। उन्होंने लिखा, "इन दिनों मुंबई का आसमान पहले से ज्यादा नीला और साफ नजर आ रहा है। यह स्थिति कई दिनों से बनी हुई है। निर्माण कार्य के दौरान पानी का छिड़काव किया जाता है, जिससे धूल कम होती है और हवा साफ रहती है। बारिश के दौरान भी प्रदूषण घटता है क्योंकि बारिश धूल-मिट्टी को धोकर साफ कर देती है। साथ ही, मुंबई समुद्र के किनारे बसी होने के कारण समुद्री हवाएं वातावरण को ताजगी देती हैं।"
उन्होंने कहा कि प्रकृति सबसे बेहतरीन दवा है। आखिरकार, दवाइयां और रसायन भी हमें प्रकृति से ही मिले हैं। जीवन में सब कुछ चलता रहता है—कभी लेना-देना, कभी व्यवस्था, कभी अव्यवस्था, कभी शोर और कभी सन्नाटा। उन्होंने अपनी बात को समाप्त करते हुए लिखा, "जिंदगी से जिंदगी ही है निजात"……।