भारत की 7.8% GDP वृद्धि पर कांग्रेस का हमला, जयराम रमेश बोले — 'समय से पहले का जश्न'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस पार्टी ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में भारत की 7.8 प्रतिशत GDP वृद्धि को 'अत्यंत विकृत तस्वीर' करार देते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस के संचार मामलों के महासचिव और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने सोमवार, 31 अगस्त को सोशल मीडिया पर यह आरोप लगाया कि ये आँकड़े जमीनी आर्थिक वास्तविकता को नहीं दर्शाते। यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के 7 प्रतिशत के अनुमान से भी अधिक वृद्धि दर्ज हुई है।
मुख्य आरोप और दावे
जयराम रमेश ने दावा किया कि तिमाही GDP आँकड़े घरेलू और विदेशी — दोनों क्षेत्रों में निजी निवेश की 'बेहद कमज़ोर भावना' को छुपाते हैं। उनके अनुसार, उपभोक्ता विश्वास नवंबर 2025 से लगातार नीचे जा रहा है और कोविड महामारी के बाद से अपने 'सबसे निचले स्तर' पर पहुँच गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भारत के शिक्षित युवाओं में बेरोज़गारी 'चिंताजनक स्तर' पर है।
असमानता और महँगाई पर चिंता
रमेश ने दावा किया कि भारत के पाँच सबसे धनी परिवारों की संपत्ति में 400 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि वेतनभोगी कर्मचारियों के वास्तविक वेतन में गिरावट आई है। उन्होंने यह भी कहा कि घरेलू आवश्यक वस्तुओं की कीमतें तेज़ी से बढ़ रही हैं, घरेलू बचत दरें घटी हैं और कर्ज रिकॉर्ड ऊँचाई पर पहुँच गया है।
व्यापार घाटे और एकाधिकार पर आरोप
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि चीन के साथ लगातार बढ़ता व्यापार घाटा अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुँचा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ बड़े समूहों द्वारा प्रमुख क्षेत्रों पर कब्ज़ा हानिकारक प्रभाव डाल रहा है। गौरतलब है कि ये आँकड़े पश्चिम एशिया संकट, कच्चे तेल की ऊँची कीमतों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान के बीच जारी हुए हैं।
सरकार का पक्ष और व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर RBI के अनुमान से अधिक है, जिसे सरकार समर्थक अर्थशास्त्री वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की आर्थिक मजबूती का प्रमाण मानते हैं। आलोचकों का कहना है कि शीर्षक के आँकड़े और आम नागरिक की क्रय शक्ति के बीच की खाई पर गंभीरता से ध्यान देने की ज़रूरत है।
आगे क्या
कांग्रेस की यह आक्रामक आर्थिक आलोचना संसद के आगामी सत्र से पहले विपक्ष की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। आने वाले महीनों में दूसरी तिमाही के आँकड़े यह तय करेंगे कि क्या यह वृद्धि टिकाऊ है या वैश्विक दबावों के आगे कमज़ोर पड़ती है।