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निजी निवेश पर कांग्रेस के दावे भ्रामक: अमित मालवीय ने आंकड़ों से दिया जवाब

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निजी निवेश पर कांग्रेस के दावे भ्रामक: अमित मालवीय ने आंकड़ों से दिया जवाब

सारांश

BJP नेता अमित मालवीय ने कांग्रेस सांसद जयराम रमेश के निजी निवेश संबंधी दावों को CMIE डेटा और बैंकिंग आंकड़ों से चुनौती दी। उनके अनुसार निजी पूंजीगत व्यय साल-दर-साल 67% उछला, सकल एफडीआई 94.5 अरब डॉलर पहुंचा और बैंक एनपीए ऐतिहासिक निम्न स्तर पर है — यह आर्थिक आरोप-प्रत्यारोप का नया मोर्चा है।

मुख्य बातें

BJP नेता अमित मालवीय ने 26 मई 2026 को कांग्रेस सांसद जयराम रमेश के निजी निवेश दावों को 'एकतरफा और भ्रामक' करार दिया।
CMIE डेटाबेस के अनुसार, निजी क्षेत्र का पूंजीगत व्यय ₹4.6 लाख करोड़ से बढ़कर ₹7.7 लाख करोड़ हुआ — साल-दर-साल 67% की वृद्धि।
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का सकल एनपीए 1.93% और शुद्ध एनपीए 0.39% — ऐतिहासिक न्यूनतम स्तर पर।
वित्त वर्ष 2025-26 में सकल एफडीआई प्रवाह लगभग 94.5 अरब डॉलर ; शुद्ध एफडीआई पिछले वर्ष से छह गुना बढ़ा।
837 सूचीबद्ध कंपनियों का समायोजित शुद्ध लाभ Q4 FY26 में ₹3.24 लाख करोड़ , मार्जिन पाँच वर्षों के उच्चतम स्तर पर।
मालवीय ने कहा कि 2014 से पहले का निवेश उछाल भारी कर्ज पर आधारित था जो एनपीए संकट में समाप्त हुआ — उसे 'मानक' बनाना उचित नहीं।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता अमित मालवीय ने मंगलवार, 26 मई 2026 को कांग्रेस सांसद जयराम रमेश के उस दावे को सिरे से खारिज किया, जिसमें रमेश ने केंद्र सरकार पर निजी निवेश की गिरती दर की अनदेखी करने का आरोप लगाया था। मालवीय ने कई आर्थिक आंकड़े पेश करते हुए कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत है और कांग्रेस के तर्क 'एकतरफा और भ्रामक' हैं।

विवाद की जड़: जयराम रमेश का आरोप

कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा था कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण तीन एफ — ईंधन (Fuel), खाद (Fertilizers) और विदेशी मुद्रा (Forex) — पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं, लेकिन चौथे और अधिक महत्वपूर्ण एफ यानी 'निजी निवेश की गिरती दर' (Falling Rates of Private Investment) की अनदेखी कर रही हैं। रमेश ने यह भी कहा कि शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (नेट एफडीआई) में गिरावट आई है और जीडीपी के प्रतिशत के रूप में निजी कॉरपोरेट निवेश 2014 से पहले के उच्चतम स्तर के आधे पर आ गया है।

मालवीय का पलटवार: आंकड़े क्या कहते हैं

मालवीय ने कहा, 'निजी निवेश को लेकर दिया गया तर्क एकतरफा है। निवेश चार चीजों — मांग, लाभप्रदता, ऋण उपलब्धता और नीतिगत भरोसे — से संचालित होता है। इन चारों मोर्चों पर मौजूदा आंकड़े अर्थव्यवस्था की मजबूत होती बुनियाद की ओर संकेत करते हैं।'

उन्होंने CMIE के डेटाबेस से लगभग 1,200 कंपनियों के विश्लेषण का हवाला देते हुए बताया कि निजी क्षेत्र का पूंजीगत व्यय पिछले वर्ष के ₹4.6 लाख करोड़ से बढ़कर सितंबर 2025 में ₹7.7 लाख करोड़ हो गया — यानी साल-दर-साल 67 प्रतिशत की वृद्धि। इस पूंजीगत व्यय में विनिर्माण क्षेत्र का हिस्सा लगभग आधा रहा, जबकि सेवा क्षेत्र का योगदान भी उल्लेखनीय बताया गया।

क्षमता उपयोग और बैंकिंग स्वास्थ्य

मालवीय के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में क्षमता उपयोग बढ़कर 75.6 प्रतिशत हो गया और नए ऑर्डर में सूचकांक आधार पर 10.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने वित्त वर्ष 2025-26 का समापन सकल एनपीए 1.93 प्रतिशत और शुद्ध एनपीए 0.39 प्रतिशत के साथ किया — जो ऐतिहासिक रूप से सबसे निचले स्तर हैं। उनके सकल अग्रिम 15.7 प्रतिशत बढ़कर ₹127 लाख करोड़ हो गए, जबकि खुदरा, कृषि और एमएसएमई ऋण क्रमशः 18.1 प्रतिशत, 15.5 प्रतिशत और 18.2 प्रतिशत बढ़े।

कॉरपोरेट मुनाफा और एफडीआई पर BJP का रुख

837 सूचीबद्ध कंपनियों के एक नमूने में वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में समायोजित शुद्ध लाभ बढ़कर ₹3.24 लाख करोड़ हो गया, जो एक साल पहले ₹2.81 लाख करोड़ था। राजस्व बढ़कर ₹28.65 लाख करोड़ पहुंचा और मार्जिन पाँच वर्षों के उच्चतम स्तर पर रहा।

नेट एफडीआई में गिरावट के रमेश के दावे पर मालवीय ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में सकल एफडीआई प्रवाह लगभग 94.5 अरब डॉलर तक पहुंचा, जबकि शुद्ध एफडीआई पिछले वित्त वर्ष की तुलना में छह गुना बढ़ा। उन्होंने कहा कि कम नेट एफडीआई का अर्थ विदेशी निवेशकों के भरोसे में कमी नहीं है।

2014 से पहले के निवेश को 'मानक' बनाना 'बेईमानी': मालवीय

मालवीय ने कांग्रेस के उस तर्क को भी खारिज किया जिसमें 2014 से पहले के निजी निवेश के उच्चतम दौर को आज के आंकड़ों से तुलना का आधार बनाया गया। उन्होंने कहा, 'वह दौर भारी कर्ज पर आधारित था और उसका अंत रुकी हुई परियोजनाओं, अत्यधिक कर्जग्रस्त कॉरपोरेट्स, दबाव में बैंकों और एनपीए संकट के रूप में हुआ। उस उच्चतम स्तर को मानक बनाकर उसकी वजह से हुए बैलेंस शीट नुकसान का जिक्र न करना बेईमानी भरा अर्थशास्त्र है।'

भारतीय कंपनियों के विदेशों में निवेश को 'भारत से पलायन' बताने के रमेश के निहितार्थ पर मालवीय ने कहा कि एक मजबूत भारतीय कॉरपोरेट क्षेत्र स्वाभाविक रूप से विदेशों में परिसंपत्तियाँ खरीदेगा और सप्लाई चेन विकसित करेगा — यह वैश्विक स्तर पर फैलते भारतीय उद्योग का संकेत है। गौरतलब है कि यह आर्थिक वाकयुद्ध ऐसे समय में आया है जब संसद के मानसून सत्र से पहले विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच आर्थिक नीति पर बहस तेज हो रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन वे उस बड़े सवाल का जवाब नहीं देते जो रमेश ने उठाया — कि जीडीपी के अनुपात में निजी कॉरपोरेट निवेश अभी भी 2014 से पहले के शिखर से काफी नीचे है। पूंजीगत व्यय में 67% की वृद्धि प्रभावशाली है, लेकिन यह एक छोटे आधार वर्ष से है और इसका सत्यापन व्यापक राष्ट्रीय लेखा आंकड़ों से अभी बाकी है। दोनों पक्ष एक ही अर्थव्यवस्था के अलग-अलग कोण दिखा रहे हैं — असली बहस यह होनी चाहिए कि क्या मौजूदा निवेश वृद्धि रोजगार सृजन में तब्दील हो रही है, जो न मालवीय के आंकड़ों में है, न रमेश के सवालों में।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जयराम रमेश ने निजी निवेश पर क्या दावा किया था?
जयराम रमेश ने कहा था कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ईंधन, खाद और विदेशी मुद्रा पर ध्यान दे रही हैं, लेकिन निजी निवेश की गिरती दर की अनदेखी हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि जीडीपी के प्रतिशत के रूप में निजी कॉरपोरेट निवेश 2014 से पहले के उच्चतम स्तर के आधे पर आ गया है।
अमित मालवीय ने निजी निवेश वृद्धि के क्या आंकड़े पेश किए?
मालवीय ने CMIE डेटाबेस की लगभग 1,200 कंपनियों के विश्लेषण का हवाला दिया, जिसके अनुसार निजी पूंजीगत व्यय ₹4.6 लाख करोड़ से बढ़कर सितंबर 2025 में ₹7.7 लाख करोड़ हो गया — साल-दर-साल 67% की वृद्धि। इसके अलावा वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में क्षमता उपयोग 75.6% और नए ऑर्डर में 10.3% की वृद्धि भी बताई।
भारत के सकल एफडीआई और शुद्ध एफडीआई में क्या अंतर है?
सकल एफडीआई देश में आने वाले कुल विदेशी निवेश को दर्शाता है, जबकि शुद्ध एफडीआई में से बाहर जाने वाला निवेश घटाया जाता है। मालवीय के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में सकल एफडीआई लगभग 94.5 अरब डॉलर रहा और शुद्ध एफडीआई पिछले वर्ष से छह गुना बढ़ा।
2014 से पहले के निवेश उछाल को मानक क्यों नहीं माना जाना चाहिए?
मालवीय के अनुसार 2014 से पहले का निजी निवेश उछाल भारी कर्ज पर आधारित था, जिसका अंत रुकी हुई परियोजनाओं, अत्यधिक कर्जग्रस्त कॉरपोरेट्स और एनपीए संकट के रूप में हुआ। उन्होंने कहा कि उस दौर को मानक बनाकर उससे हुए बैलेंस शीट नुकसान का जिक्र न करना उचित नहीं है।
भारतीय बैंकिंग क्षेत्र की मौजूदा स्थिति कैसी है?
मालवीय के अनुसार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने वित्त वर्ष 2025-26 का समापन सकल एनपीए 1.93% और शुद्ध एनपीए 0.39% के साथ किया — ऐतिहासिक रूप से सबसे निचले स्तर। उनके सकल अग्रिम 15.7% बढ़कर ₹127 लाख करोड़ हो गए और खुदरा, कृषि व एमएसएमई ऋण में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।
राष्ट्र प्रेस
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