निजी निवेश पर कांग्रेस के दावे भ्रामक: अमित मालवीय ने आंकड़ों से दिया जवाब
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता अमित मालवीय ने मंगलवार, 26 मई 2026 को कांग्रेस सांसद जयराम रमेश के उस दावे को सिरे से खारिज किया, जिसमें रमेश ने केंद्र सरकार पर निजी निवेश की गिरती दर की अनदेखी करने का आरोप लगाया था। मालवीय ने कई आर्थिक आंकड़े पेश करते हुए कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत है और कांग्रेस के तर्क 'एकतरफा और भ्रामक' हैं।
विवाद की जड़: जयराम रमेश का आरोप
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा था कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण तीन एफ — ईंधन (Fuel), खाद (Fertilizers) और विदेशी मुद्रा (Forex) — पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं, लेकिन चौथे और अधिक महत्वपूर्ण एफ यानी 'निजी निवेश की गिरती दर' (Falling Rates of Private Investment) की अनदेखी कर रही हैं। रमेश ने यह भी कहा कि शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (नेट एफडीआई) में गिरावट आई है और जीडीपी के प्रतिशत के रूप में निजी कॉरपोरेट निवेश 2014 से पहले के उच्चतम स्तर के आधे पर आ गया है।
मालवीय का पलटवार: आंकड़े क्या कहते हैं
मालवीय ने कहा, 'निजी निवेश को लेकर दिया गया तर्क एकतरफा है। निवेश चार चीजों — मांग, लाभप्रदता, ऋण उपलब्धता और नीतिगत भरोसे — से संचालित होता है। इन चारों मोर्चों पर मौजूदा आंकड़े अर्थव्यवस्था की मजबूत होती बुनियाद की ओर संकेत करते हैं।'
उन्होंने CMIE के डेटाबेस से लगभग 1,200 कंपनियों के विश्लेषण का हवाला देते हुए बताया कि निजी क्षेत्र का पूंजीगत व्यय पिछले वर्ष के ₹4.6 लाख करोड़ से बढ़कर सितंबर 2025 में ₹7.7 लाख करोड़ हो गया — यानी साल-दर-साल 67 प्रतिशत की वृद्धि। इस पूंजीगत व्यय में विनिर्माण क्षेत्र का हिस्सा लगभग आधा रहा, जबकि सेवा क्षेत्र का योगदान भी उल्लेखनीय बताया गया।
क्षमता उपयोग और बैंकिंग स्वास्थ्य
मालवीय के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में क्षमता उपयोग बढ़कर 75.6 प्रतिशत हो गया और नए ऑर्डर में सूचकांक आधार पर 10.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने वित्त वर्ष 2025-26 का समापन सकल एनपीए 1.93 प्रतिशत और शुद्ध एनपीए 0.39 प्रतिशत के साथ किया — जो ऐतिहासिक रूप से सबसे निचले स्तर हैं। उनके सकल अग्रिम 15.7 प्रतिशत बढ़कर ₹127 लाख करोड़ हो गए, जबकि खुदरा, कृषि और एमएसएमई ऋण क्रमशः 18.1 प्रतिशत, 15.5 प्रतिशत और 18.2 प्रतिशत बढ़े।
कॉरपोरेट मुनाफा और एफडीआई पर BJP का रुख
837 सूचीबद्ध कंपनियों के एक नमूने में वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में समायोजित शुद्ध लाभ बढ़कर ₹3.24 लाख करोड़ हो गया, जो एक साल पहले ₹2.81 लाख करोड़ था। राजस्व बढ़कर ₹28.65 लाख करोड़ पहुंचा और मार्जिन पाँच वर्षों के उच्चतम स्तर पर रहा।
नेट एफडीआई में गिरावट के रमेश के दावे पर मालवीय ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में सकल एफडीआई प्रवाह लगभग 94.5 अरब डॉलर तक पहुंचा, जबकि शुद्ध एफडीआई पिछले वित्त वर्ष की तुलना में छह गुना बढ़ा। उन्होंने कहा कि कम नेट एफडीआई का अर्थ विदेशी निवेशकों के भरोसे में कमी नहीं है।
2014 से पहले के निवेश को 'मानक' बनाना 'बेईमानी': मालवीय
मालवीय ने कांग्रेस के उस तर्क को भी खारिज किया जिसमें 2014 से पहले के निजी निवेश के उच्चतम दौर को आज के आंकड़ों से तुलना का आधार बनाया गया। उन्होंने कहा, 'वह दौर भारी कर्ज पर आधारित था और उसका अंत रुकी हुई परियोजनाओं, अत्यधिक कर्जग्रस्त कॉरपोरेट्स, दबाव में बैंकों और एनपीए संकट के रूप में हुआ। उस उच्चतम स्तर को मानक बनाकर उसकी वजह से हुए बैलेंस शीट नुकसान का जिक्र न करना बेईमानी भरा अर्थशास्त्र है।'
भारतीय कंपनियों के विदेशों में निवेश को 'भारत से पलायन' बताने के रमेश के निहितार्थ पर मालवीय ने कहा कि एक मजबूत भारतीय कॉरपोरेट क्षेत्र स्वाभाविक रूप से विदेशों में परिसंपत्तियाँ खरीदेगा और सप्लाई चेन विकसित करेगा — यह वैश्विक स्तर पर फैलते भारतीय उद्योग का संकेत है। गौरतलब है कि यह आर्थिक वाकयुद्ध ऐसे समय में आया है जब संसद के मानसून सत्र से पहले विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच आर्थिक नीति पर बहस तेज हो रही है।