अमित मालवीय का दावा: वैश्विक झटकों के बीच भारत की GDP वृद्धि 7.6%, महंगाई 3.48% पर
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रभारी अमित मालवीय ने 22 मई 2026 को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए दावा किया कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की आर्थिक स्थिति ठोस बनी हुई है। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि मौजूदा भारत की तुलना 2013 के 'फ्रैजाइल फाइव' दौर से करना ऐतिहासिक और सांख्यिकीय रूप से गलत है।
2013 बनाम 2026: आंकड़ों का तुलनात्मक विश्लेषण
मालवीय के अनुसार, 2012-13 में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर घटकर 5 प्रतिशत पर आ गई थी, महंगाई दोहरे अंक में थी और देश नीति पक्षाघात तथा भ्रष्टाचार की चुनौतियों से जूझ रहा था। उस दौर में चालू खाता घाटा जीडीपी के 4.8 प्रतिशत तक पहुँच गया था, जो बाहरी आर्थिक कमज़ोरी का प्रमुख कारण बना।
इसके विपरीत, उन्होंने कहा कि विश्व बैंक के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तीन तिमाहियों में भारत का चालू खाता घाटा केवल 1 प्रतिशत रहा। ओईसीडी ने भारत की विकास दर 7.6 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है, जबकि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने कहा है कि भारत 2026 और 2027 में भी चीन समेत दुनिया की अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से तेज़ गति से बढ़ेगा।
महंगाई और विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिति
मालवीय ने महंगाई के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 2012-13 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई लगभग 10 प्रतिशत थी, जबकि अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच औसत महंगाई केवल 1.7 प्रतिशत रही — जो CPI शृंखला शुरू होने के बाद का सबसे निम्न स्तर बताया गया है। अप्रैल 2026 में महंगाई दर 3.48 प्रतिशत दर्ज की गई।
विदेशी मुद्रा भंडार के संदर्भ में उन्होंने बताया कि मार्च 2013 में यह करीब 292 अरब डॉलर था, जो 8 मई 2026 तक बढ़कर लगभग 697 अरब डॉलर हो गया। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के अनुसार, यह भंडार कम से कम 11 महीनों के आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त है।
बैंकिंग क्षेत्र और जीएसटी संग्रह में सुधार
मालवीय के अनुसार, बैंकिंग क्षेत्र जो 2013 में बड़ी चुनौती था, अब काफी मज़बूत हो चुका है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का सकल एनपीए मार्च 2021 के 9.11 प्रतिशत से घटकर मार्च 2025 में 2.58 प्रतिशत रह गया है। वित्त वर्ष 2025-26 में गैर-खाद्य ऋण वृद्धि दर 15.9 प्रतिशत रही।
जीएसटी संग्रह के मोर्चे पर उन्होंने बताया कि अप्रैल 2026 में यह रिकॉर्ड ₹2.42 लाख करोड़ तक पहुँच गया। आर्थिक सर्वेक्षण में औद्योगिक क्षेत्र की वृद्धि दर 6.2 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है, जिसे उन्होंने औपचारिक अर्थव्यवस्था, मैन्युफैक्चरिंग और टैक्स संग्रह में मज़बूती का संकेत बताया।
पीएलआई योजना, व्यापार समझौते और निवेश
मालवीय ने कहा कि सरकार की पीएलआई योजना के तहत 14 क्षेत्रों में ₹1.97 लाख करोड़ का प्रावधान किया गया है और अगस्त 2024 तक इस योजना के तहत ₹1.46 लाख करोड़ का निवेश आ चुका है। इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन बढ़कर ₹11.3 लाख करोड़ तक पहुँच गया है, जबकि फार्मा निर्यात 30.5 अरब डॉलर रहा।
उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने यूरोपीय संघ के साथ एफटीए वार्ता पूरी की है। ओमान सीईपीए और यूएई बीआईटी जैसे समझौते भी भारत की वैश्विक व्यापार स्थिति को मज़बूत कर रहे हैं। बीमा क्षेत्र में एफडीआई सीमा 74 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत कर दी गई है।
विपक्ष पर पलटवार और आगे की राह
मालवीय ने विपक्ष के आर्थिक संकट के दावों को खारिज करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया संकट, ऊर्जा चुनौतियों और वैश्विक सप्लाई चेन बाधाओं के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है। उन्होंने कहा कि इसे 'अर्थव्यवस्था का पतन' कहना वैश्विक आंकड़ों को नज़रअंदाज़ करने के समान है।
उन्होंने नई अनुसंधान, विकास और नवाचार (RDI) योजना का भी उल्लेख किया, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स, क्लाइमेट टेक और बायोटेक जैसे क्षेत्रों में निजी निवेश को बढ़ावा देगी। यह दीर्घकालिक औद्योगिक नीति का हिस्सा है, जो आने वाले वर्षों में भारत की विकास गाथा को और मज़बूत करने की दिशा में काम करेगी।