क्या वित्त वर्ष 2027 में भारत की जीडीपी ग्रोथ 11 प्रतिशत तक पहुंचेगी?
सारांश
Key Takeaways
- भारत की नॉमिनल जीडीपी वृद्धि दर वित्त वर्ष 2026-27 में 11 प्रतिशत की उम्मीद।
- महंगाई दर घटकर 4 प्रतिशत हो सकती है।
- सरकार के सुधार और बढ़ती खपत का सकारात्मक प्रभाव।
- वैश्विक मंदी और भू-राजनीति की चुनौतियाँ बनी रहेंगी।
- राजकोषीय घाटा 4.2 प्रतिशत तक घट सकता है।
नई दिल्ली, 2 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत की नॉमिनल जीडीपी वृद्धि दर वित्त वर्ष 2026-27 में करीब 11 प्रतिशत तक बढ़ने का अनुमान है, जबकि वास्तविक वृद्धि लगभग 7.2 प्रतिशत रहने की संभावना है। यह वृद्धि देश में कर्ज के माध्यम से बढ़ती खपत और सरकार की नीतियों के समर्थन से हो सकती है। एसबीआई म्यूचुअल फंड की शुक्रवार को जारी रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।
रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि भविष्य में भारत की अर्थव्यवस्था की स्थिति सकारात्मक रह सकती है। इसका मुख्य कारण सरकार द्वारा किए गए सुधार और लोगों की महंगे उत्पादों को खरीदने की बढ़ती आदतें हैं। हालांकि, वैश्विक मंदी और भू-राजनीति जैसे मुद्दे अभी भी एक बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही में देश की वास्तविक जीडीपी वृद्धि औसतन 8 प्रतिशत रही, जबकि नॉमिनल जीडीपी वृद्धि 8.8 प्रतिशत दर्ज की गई।
एसबीआई म्यूचुअल फंड ने यह भी बताया कि वित्त वर्ष 2027 में महंगाई दर घटकर लगभग 4 प्रतिशत तक आ सकती है। यदि विश्व की अर्थव्यवस्था में कोई बड़ी गिरावट नहीं आती, तो भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) अपनी मौद्रिक नीति में कोई बड़ा बदलाव नहीं करेगा।
रिपोर्ट में हाल ही में उठाए गए कुछ कदमों का उल्लेख भी किया गया है, जैसे कि सरकार द्वारा 2 लाख करोड़ रुपए की ओपन मार्केट ऑपरेशन्स (ओएमओ) और जनवरी के मध्य में 10 अरब डॉलर का बाय-सेल स्वैप।
गांवों में खर्च की स्थिति में सुधार होने की उम्मीद है, क्योंकि सरकारी योजनाएं और कम महंगाई किसानों की सहायता कर रही हैं। हालांकि, खरीफ फसल से हुई आय में कमी का प्रभाव अभी भी महसूस किया जा रहा है। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता होने से विकास पर बहुत कम प्रभाव पड़ने की संभावना है, क्योंकि भारत को चीनी निर्यात से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है।
सरकार का राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 2026 में 4.4 प्रतिशत रहने की संभावना है, जो वित्त वर्ष 2027 में घटकर 4.2 प्रतिशत हो सकता है। हालांकि, राज्यों का घाटा अभी भी अधिक है। सरकार के बॉन्ड की आपूर्ति 29 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचने की संभावना है, जिससे मांग और आपूर्ति पर दबाव बना रहेगा।
रिपोर्ट में बताया गया है कि साल 2025 में रुपए की कीमत में करीब 5 प्रतिशत की गिरावट आई थी। इसकी मुख्य वजह विदेशी लेनदेन से जुड़ी मांग और बॉंड की ब्याज दरों में बढ़ोत्तरी है।
आमतौर पर, भारत में महंगाई का स्तर कम, कच्चे तेल की कीमतें स्थिर, वित्तीय अनुशासन और जीडीपी के 1 प्रतिशत से कम चालू खाता घाटा (सीएडी) देश की अर्थव्यवस्था और रुपए को मजबूत बनाए रखते हैं।
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि निवेश के लिए खपत, वित्तीय क्षेत्र और कुछ औद्योगिक क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करना फायदेमंद हो सकता है।