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क्या भारत का पूंजीगत खर्च वित्त वर्ष 27 में 12 लाख करोड़ रुपए को पार करेगा? : एसबीआई

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क्या भारत का पूंजीगत खर्च वित्त वर्ष 27 में 12 लाख करोड़ रुपए को पार करेगा? : एसबीआई

सारांश

भारत का पूंजीगत खर्च वित्त वर्ष 27 में 10 प्रतिशत बढ़कर 12 लाख करोड़ रुपए को पार कर सकता है। इस रिपोर्ट में एसबीआई रिसर्च ने महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़ों का विश्लेषण किया है। क्या यह वृद्धि हमारे आर्थिक भविष्य को प्रभावित करेगी?

मुख्य बातें

पूंजीगत खर्च में 10 प्रतिशत वृद्धि संभव है।
नॉमिनल जीडीपी की वृद्धि दर 10.5 से 11 प्रतिशत हो सकती है।
राजकोषीय घाटा 4.2 प्रतिशत के आस-पास रहने की संभावना है।
राज्यों का सरकारी ऋण महत्वपूर्ण है।
उधारी की लागत 6.8 से 7.0 प्रतिशत के बीच रह सकती है।

नई दिल्ली, 26 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत का पूंजीगत खर्च वित्त वर्ष 27 में सालाना आधार पर 10 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 12 लाख करोड़ रुपए का आंकड़ा पार कर सकता है। यह जानकारी एसबीआई रिसर्च ने सोमवार को जारी की।

एसबीआई रिसर्च का अनुमान है कि इस अवधि में नॉमिनल जीडीपी की वृद्धि दर 10.5 प्रतिशत से 11 प्रतिशत के बीच रह सकती है, और वैश्विक स्तर पर धातुओं की कीमतों में बढ़ोतरी का असर थोक महंगाई दर पर देखने को मिल सकता है।

एसबीआई के मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. सौम्या कांति घोष ने कहा कि वित्त वर्ष 2027 में नॉमिनल जीडीपी की धीमी गति राजस्व को प्रभावित कर सकती है, जिसके लिए बेहतर व्यय नियोजन की आवश्यकता होगी।

उन्होंने यह भी बताया कि देश का राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 27 में लगभग 4.2 प्रतिशत रह सकता है। इस दौरान उधारी की लागत भी 6.8 प्रतिशत से 7.0 प्रतिशत के बीच रहने की उम्मीद है।

एसबीआई रिसर्च ने अनुमान लगाया है कि वित्त वर्ष 27 में देश की शुद्ध उधारी 11.7 लाख करोड़ रुपए हो सकती है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्रीय बजट 2026 एक नई उभरती राजनीतिक व्यवस्था के प्रभावों के बीच आ रहा है, जो अभी भी काफी हद तक अस्पष्ट है और वैश्विक वित्तीय बाजारों पर इसका गहरा असर पड़ रहा है। वैश्विक स्तर पर समन्वय की कमी शेयर और बॉंड बाजारों में भारी गिरावट का मुख्य कारण है।

इसके अलावा, रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि राज्यों का कुल सरकारी ऋण में महत्वपूर्ण योगदान है, इसलिए राज्य बजट में वार्षिक घाटे के लक्ष्यों पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय, वास्तविक विकास अनुमानों और विकास आवश्यकताओं के अनुसार, मध्यम अवधि के लिए ऋण-से-जीएसडीपी अनुपात को विशेष रूप से निर्धारित किया जाना चाहिए। इस पर केंद्रीय बजट में प्रकाश डाला जा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

भारत का वित्त वर्ष 27 में बढ़ता पूंजीगत खर्च हमारे आर्थिक विकास के लिए सकारात्मक संकेत है। यह न केवल बुनियादी ढांचे में सुधार लाएगा, बल्कि रोजगार के अवसर भी बढ़ाएगा। हालांकि, राजस्व की स्थिरता और बेहतर व्यय नियोजन की आवश्यकता है।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत का पूंजीगत खर्च कब बढ़ेगा?
भारत का पूंजीगत खर्च वित्त वर्ष 27 में सालाना आधार पर 10 प्रतिशत बढ़ने की संभावना है।
एसबीआई रिसर्च का अनुमान क्या है?
एसबीआई रिसर्च का अनुमान है कि नॉमिनल जीडीपी की वृद्धि दर 10.5 प्रतिशत से 11 प्रतिशत के बीच रह सकती है।
राजकोषीय घाटा क्या होगा?
वित्त वर्ष 27 में देश का राजकोषीय घाटा लगभग 4.2 प्रतिशत रहने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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