भारत की GDP वृद्धि दर 7.7%, PM मोदी बोले — सुधारों की सफलता और 140 करोड़ भारतीयों की मेहनत का नतीजा
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 जून 2026 को कहा कि भारत की आर्थिक विकास की रफ्तार मज़बूत बनी हुई है और सरकार जीवन-सुगमता, व्यापार-सुगमता तथा युवाओं के लिए अवसर बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी। उन्होंने वित्त वर्ष 2025-26 में 7.7 प्रतिशत की वार्षिक GDP वृद्धि दर को देश की आर्थिक मज़बूती और नीतिगत सुधारों का प्रतिबिंब बताया।
जीडीपी के प्रमुख आँकड़े
सरकार द्वारा जारी आँकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में भारत की वास्तविक GDP वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही। पूरे वित्त वर्ष के लिए नॉमिनल GDP वृद्धि दर 8.9 प्रतिशत दर्ज की गई। इसके अलावा, रियल ग्रॉस वैल्यू एडेड (GVA) में 7.9 प्रतिशत और नॉमिनल GVA में 9.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
सरकारी डेटा के मुताबिक, द्वितीयक क्षेत्र (उद्योग) की वृद्धि दर स्थिर कीमतों पर 8.8 प्रतिशत और तृतीयक क्षेत्र (सेवाएँ) की 9.3 प्रतिशत रही। मैन्युफैक्चरिंग, व्यापार, परिवहन, वित्तीय सेवाएँ और रियल एस्टेट — सभी प्रमुख क्षेत्रों की वृद्धि दर स्थिर एवं मौजूदा दोनों कीमतों पर दोहरे अंकों में रही।
PM मोदी का एक्स पर बयान
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'भारत की विकास की गति मजबूत बनी हुई है। वित्त वर्ष 2025-26 में 7.7 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में 7.8 प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि दर हमारी अर्थव्यवस्था की मजबूती, सुधारों की सफलता और 140 करोड़ भारतीयों की कड़ी मेहनत को दर्शाती है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि सरकार युवाओं के लिए अवसर बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी।
वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भारत की स्थिति
यह आँकड़े ऐसे समय में आए हैं जब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बना हुआ है। तुलनात्मक रूप से, जर्मनी की वृद्धि दर 0.4 प्रतिशत, जापान की 0.8 प्रतिशत, यूरो क्षेत्र की 1.3 प्रतिशत और G7 की औसत वृद्धि दर 1.6 प्रतिशत रही। इन आँकड़ों के आधार पर भारत दुनिया की सबसे तेज़ बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है।
गौरतलब है कि यह प्रदर्शन ऐसे माहौल में आया है जब अमेरिका-ईरान तनाव के चलते वैश्विक बाज़ारों में अस्थिरता बनी हुई है, जिसने कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं की रफ्तार को प्रभावित किया है।
आगे की राह
सरकारी आँकड़ों में सेवा और उद्योग क्षेत्र का मज़बूत प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि घरेलू माँग और निवेश दोनों की गति बनी हुई है। आर्थिक विश्लेषकों की नज़र अब अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही के आँकड़ों पर होगी, जो यह बताएंगे कि यह गति टिकाऊ है या नहीं।