7.8% जीडीपी वृद्धि पर PM मोदी ने दी बधाई: 'दुनिया युद्ध में डूबी, भारत तेज़ गति से आगे'
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 सितंबर 2026 को वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की 7.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि पर देशवासियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि वैश्विक संकटों और युद्ध की छाया के बीच यह आँकड़ा 140 करोड़ भारतीयों की सामूहिक संकल्प-शक्ति का प्रमाण है। यह ऐसे समय में आया है जब अनेक प्रमुख अर्थव्यवस्थाएँ भू-राजनीतिक अनिश्चितता और आपूर्ति-शृंखला के व्यवधानों से जूझ रही हैं।
वैश्विक पृष्ठभूमि में भारत की उपलब्धि
मोदी ने कहा, 'दुनिया युद्ध में डूबी हुई है। चारों तरफ से युद्ध की खबरें आ रही हैं, विश्व संकटों से घिरा हुआ है और सप्लाई चेन पूरी तरह डिस्टर्ब है।' उन्होंने 2020 में शुरू हुए कोविड काल से लेकर अब तक के वैश्विक अस्थिरता के दौर का उल्लेख करते हुए कहा कि इन तमाम चुनौतियों के बावजूद भारत ने 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर हासिल की है। गौरतलब है कि यह वृद्धि दर भारत को प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज़ बढ़ने वाले देशों में बनाए रखती है।
आत्मनिर्भरता और स्वदेशी पर ज़ोर
प्रधानमंत्री ने इस गति को बनाए रखने के लिए आत्मनिर्भर भारत और 'वोकल फॉर लोकल' के मंत्र को जीवन में उतारने का आह्वान किया। उन्होंने नागरिकों से विदेश यात्राएँ और विदेश में विवाह-समारोह आयोजित करने से परहेज़ करने, 'मेड इन इंडिया' उत्पादों को प्राथमिकता देने और अनावश्यक सोने की खरीद से बचने की अपील की। मोदी ने कहा कि स्वदेशी पर जितना बल दिया जाएगा, देश उतनी ही तेज़ी से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ेगा।
विकसित भारत का संकल्प
मोदी ने कहा कि जब आज़ादी के 100 वर्ष पूरे होंगे, तब देश की युवा पीढ़ी को एक विकसित भारत सौंपना उनका लक्ष्य है। उन्होंने कहा, 'हमारी नीति सही है, नीयत साफ है और 140 करोड़ देशवासियों की शक्ति आज एकजुट होकर देश को नई ऊँचाइयों पर ले जा रही है।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब सरकार विकसित भारत @2047 के लक्ष्य की दिशा में नीतिगत प्रयासों को गति दे रही है।
देशवासियों से अपील
प्रधानमंत्री ने देशवासियों से खुशियाँ मनाने के साथ-साथ नए संकल्प लेने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी के सपनों को साकार करने के लिए परिश्रम में कोई कमी नहीं रखनी चाहिए। उनके अनुसार, 7.8 प्रतिशत की यह वृद्धि दर देश के भीतर निराशा फैलाने वाली आवाज़ों और 'झूठ की गूंज' को भी पार करते हुए हासिल की गई है — एक टिप्पणी जिसे राजनीतिक विश्लेषक विपक्षी आलोचनाओं के संदर्भ में देख रहे हैं।