तास्माक राजस्व ₹50,845 करोड़ के पार: तमिलनाडु के कुल कर राजस्व का 26% शराब से
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु राज्य विपणन निगम (तास्माक) ने वित्त वर्ष 2025-26 में पहली बार ₹50,000 करोड़ का राजस्व आँकड़ा पार कर लिया है — निगम ने ₹50,845 करोड़ की कमाई दर्ज की, जो राज्य के कुल कर राजस्व का लगभग 26 प्रतिशत है। गृह, निषेध और उत्पाद शुल्क विभाग की 2026-27 नीति में उद्धृत इन आँकड़ों के अनुसार, शराब व्यापार अब तमिलनाडु के राजकोष के लिए सबसे बड़े एकल राजस्व स्रोतों में से एक बन चुका है।
राजस्व वृद्धि का ब्यौरा
विभागीय आँकड़ों के अनुसार, 2024-25 में तास्माक का राजस्व ₹48,381 करोड़ था। 2025-26 में यह बढ़कर ₹50,845 करोड़ हो गया — यानी एक वर्ष में ₹2,464 करोड़ या लगभग 5 प्रतिशत की वृद्धि। राजस्व के स्रोतों में मूल्यवर्धित कर (VAT) सबसे बड़ा हिस्सेदार रहा, जिससे ₹39,010 करोड़ प्राप्त हुए, जबकि उत्पाद शुल्क से ₹11,836 करोड़ की आय हुई।
चालू वित्त वर्ष में भी तेज़ रफ़्तार
नवीनतम आँकड़े बताते हैं कि 2026-27 के पहले चार महीनों में ही तास्माक ने ₹17,855 करोड़ का राजस्व अर्जित कर लिया है, जो औसतन ₹4,460 करोड़ प्रति माह से अधिक बैठता है। विभागीय अनुमानों के आधार पर इस वित्त वर्ष में 5.3 प्रतिशत की अतिरिक्त वृद्धि संभावित है, जिससे वार्षिक संग्रह एक नए उच्च स्तर पर पहुँच सकता है।
तास्माक की भूमिका और विवाद
तास्माक तमिलनाडु भर में भारतीय निर्मित विदेशी शराब (IMFL) की खुदरा बिक्री का एकमात्र अधिकृत संचालक है। यह ऐसे समय में आया है जब निगम की शराब दुकानों और बारों के संचालन को लेकर आलोचना लगातार जारी है। राजनीतिक दलों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिक समाज के कुछ वर्गों ने शराब की सुलभता और उसके सामाजिक दुष्प्रभावों पर बार-बार चिंता जताई है।
राजकोषीय निर्भरता की चुनौती
राज्य के कुल कर राजस्व का एक चौथाई से अधिक हिस्सा अब तास्माक के संग्रह से जुड़ा है। आलोचकों का कहना है कि इस स्तर की निर्भरता राज्य सरकार के लिए शराब नीति में सुधार की गुंजाइश को सीमित करती है, क्योंकि शराब की बिक्री या कर दरों में मामूली बदलाव भी राज्य की कुल आय पर बड़ा असर डाल सकता है। यह ऐसे समय में और भी प्रासंगिक हो जाता है जब कई राज्य सरकारें राजस्व विविधीकरण की दिशा में कदम उठा रही हैं।
आगे क्या
यदि 2026-27 में अनुमानित 5.3 प्रतिशत की वृद्धि हासिल होती है, तो तास्माक का वार्षिक राजस्व ₹53,500 करोड़ के करीब पहुँच सकता है। इससे एक ओर राज्य के वित्त को मज़बूती मिलेगी, वहीं दूसरी ओर नियमन, सामाजिक लागत और राजस्व निर्भरता पर बहस और तेज़ होने की संभावना है।