टीएएसएमएसी खरीद नीति में बड़ा बदलाव: तमिलनाडु ने सभी शराब निर्माताओं से समान खरीद का आदेश दिया
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु सरकार ने तमिलनाडु राज्य मार्केटिंग कॉर्पोरेशन (टीएएसएमएसी) की शराब खरीद नीति में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए निर्देश दिया है कि निगम अब सभी वैध निर्माताओं से समान अनुपात में शराब खरीदे, न कि कुछ चुनिंदा कंपनियों पर निर्भर रहे। 6 जुलाई 2026 को हुई टीएएसएमएसी बोर्ड बैठक में यह निर्णय लिया गया, जो राज्य के शराब वितरण तंत्र में पारदर्शिता की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
टीएएसएमएसी पूरे तमिलनाडु में 4,000 से अधिक शराब की दुकानें संचालित करता है और राज्य में शराब के खुदरा वितरण पर उसका एकाधिकार है। अब तक निगम 11 इंडियन मेड फॉरेन लिकर (आईएमएफएल) निर्माताओं और 6 बीयर कंपनियों से खरीद करता था। पहले की व्यवस्था में ग्राहकों की माँग के आधार पर खरीद होती थी, जिसके चलते कुल आपूर्ति का 60 से 70 प्रतिशत केवल कुछ सबसे लोकप्रिय ब्रांडों से आता था।
रिपोर्टों के अनुसार, इन निर्माताओं में से कुछ को बड़ी राजनीतिक पार्टियों से जुड़े लोग प्रमोट करते हैं, जिससे खरीद प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठते रहे हैं।
नई नीति की मुख्य विशेषताएँ
टीएएसएमएसी बोर्ड ने नई संतुलित खरीद रणनीति के तहत सभी वैध निर्माताओं को एकसमान खरीद ऑर्डर जारी करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही, निगम के प्रीमियम 'एलीट' आउटलेट्स को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे प्रत्येक वैध निर्माता के प्रीमियम और मीडियम-ग्रेड उत्पादों का कम से कम एक केस अनिवार्य रूप से स्टॉक में रखें। इसका उद्देश्य ग्राहकों को ब्रांडों की व्यापक विविधता उपलब्ध कराना है।
यह ऐसे समय में आया है जब टीवीके के नेतृत्व वाली नई सरकार के गठन के बाद टीएएसएमएसी में पारदर्शिता और परिचालन सुधारों की एक श्रृंखला लागू की जा रही है।
कर्मचारियों की मिली-जुली प्रतिक्रिया
बदली हुई नीति पर टीएएसएमएसी कर्मचारियों की प्रतिक्रिया मिली-जुली रही है। कर्मचारियों का कहना है कि समान मात्रा में खरीद से ग्राहकों की वास्तविक पसंद का सही आकलन नहीं हो सकता। उनकी चिंता है कि यदि सभी निर्माताओं से एकसमान मात्रा में खरीद की जाती है, तो लोकप्रिय ब्रांडों का स्टॉक समय से पहले समाप्त हो सकता है, जबकि कम बिकने वाले उत्पाद शेल्फ पर बिना बिके पड़े रह सकते हैं। इससे इन्वेंट्री प्रबंधन की चुनौतियाँ बढ़ सकती हैं।
आम जनता पर असर
उपभोक्ताओं के दृष्टिकोण से यह नीति ब्रांड विविधता बढ़ा सकती है, लेकिन पसंदीदा ब्रांडों की अनुपलब्धता की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है। इस बीच, शराब उपभोक्ताओं के एक वर्ग ने सरकार से टीएएसएमएसी आउटलेट्स में उपलब्ध उत्पादों की रेंज और विस्तृत करने का आग्रह किया है। वे चाहते हैं कि प्रसिद्ध आयातित और अंतरराष्ट्रीय शराब ब्रांड भी शामिल किए जाएँ, जो फिलहाल पड़ोसी केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी और आस-पास के राज्यों में उपलब्ध हैं।
क्या होगा आगे
गौरतलब है कि यह नीति परिवर्तन तमिलनाडु के शराब वितरण क्षेत्र में एकाधिकार की पुरानी संरचना को चुनौती देता है। नई खरीद व्यवस्था से छोटे और मझोले निर्माताओं को बाज़ार में प्रवेश का अवसर मिल सकता है। हालाँकि, इस नीति की व्यावहारिक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि टीएएसएमएसी माँग और आपूर्ति के बीच संतुलन कैसे बनाए रखता है।