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टीएएसएमएसी निजीकरण नहीं होगा: तमिलनाडु सरकार का स्पष्ट इनकार, 717 दुकानें बंद करने पर ₹7,000-8,000 करोड़ राजस्व नुकसान स्वीकारा

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टीएएसएमएसी निजीकरण नहीं होगा: तमिलनाडु सरकार का स्पष्ट इनकार, 717 दुकानें बंद करने पर ₹7,000-8,000 करोड़ राजस्व नुकसान स्वीकारा

सारांश

तमिलनाडु की विजय सरकार ने टीएएसएमएसी निजीकरण के आरोपों को खारिज किया और ₹7,000-8,000 करोड़ के सालाना राजस्व नुकसान के बावजूद 717 शराब दुकानें बंद करने के फैसले पर अडिग रही। सत्ता में आए महज 20 दिन में यह सरकार की सबसे बड़ी नीतिगत परीक्षा बन चुकी है।

मुख्य बातें

तमिलनाडु के आबकारी मंत्री विग्नेश ने टीएएसएमएसी के निजीकरण की किसी भी योजना से स्पष्ट इनकार किया।
717 टीएएसएमएसी दुकानें बंद की गई हैं, जिनमें कुछ की प्रतिदिन बिक्री ₹25 लाख तक थी।
दुकानें बंद होने से सरकार को सालाना ₹7,000 से ₹8,000 करोड़ के राजस्व का नुकसान होने का अनुमान।
विजय सरकार ने यह कदम चरणबद्ध तरीके से शराब पर निर्भरता घटाने की सामाजिक नीति का हिस्सा बताया।
मंत्री ने पूर्ववर्ती सरकार पर टीएएसएमएसी संचालन में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाया और आगे और खुलासों के संकेत दिए।

तमिलनाडु के निषेध एवं आबकारी मंत्री विग्नेश ने 7 जून 2026 को मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन (टीएएसएमएसी) के निजीकरण की कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि 717 टीएएसएमएसी शराब दुकानों को बंद करने के फैसले से सरकार को सालाना ₹7,000 से ₹8,000 करोड़ के राजस्व का नुकसान होगा, फिर भी सरकार इस सामाजिक नीति से पीछे नहीं हटेगी।

निजीकरण के आरोप खारिज

विपक्ष की ओर से लगातार यह आरोप लगाए जा रहे थे कि विजय सरकार टीएएसएमएसी के संचालन को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी कर रही है। मंत्री विग्नेश ने इन आरोपों को सिरे से नकारते हुए कहा, 'टीएएसएमएसी के निजीकरण का कोई प्रस्ताव नहीं है। राज्य सरकार शराब बिक्री को सरकारी नियंत्रण में संचालित करने की अपनी नीति पर कायम है।'

यह ऐसे समय में आया है जब सरकार को सत्ता में आए अभी केवल लगभग 20 दिन ही हुए हैं और टीएएसएमएसी से जुड़े फैसलों को लेकर राजनीतिक विवाद तेज़ हो गया है।

717 दुकानें बंद करने का बचाव

मंत्री ने स्पष्ट किया कि बंद की गई 717 दुकानें कम बिक्री वाली नहीं, बल्कि अच्छी आय देने वाली दुकानें थीं। उनके अनुसार, इनमें से कुछ दुकानों की प्रतिदिन बिक्री ₹25 लाख तक थी, जबकि सबसे कम बिक्री वाली दुकान भी रोज़ाना लगभग ₹5 लाख का कारोबार करती थी।

गौरतलब है कि पिछली सरकारों ने भी दुकानें बंद की थीं, लेकिन विग्नेश के अनुसार वे अधिकतर कम बिक्री वाली या बार सुविधा-रहित दुकानें थीं, जिससे राजस्व पर ज़्यादा असर नहीं पड़ा था। वर्तमान सरकार का यह कदम उस तुलना में कहीं अधिक वित्तीय बोझ उठाने वाला है।

सामाजिक नीति बनाम राजस्व

मंत्री ने माना कि ₹7,000 से ₹8,000 करोड़ के वार्षिक राजस्व नुकसान के बावजूद सरकार अपने सामाजिक उद्देश्य से नहीं हटेगी। सरकार इसे राज्य में शराब की दुकानों की संख्या चरणबद्ध तरीके से घटाने और शराब सेवन से जुड़ी सामाजिक समस्याओं को नियंत्रित करने की दिशा में पहला कदम मानती है।

यह विजय सरकार की सत्ता में आने के बाद की शुरुआती बड़ी घोषणाओं में से एक थी, जो उनके चुनावी वादों से सीधे जुड़ी है।

पिछली सरकार पर अनियमितताओं के आरोप

विग्नेश ने पूर्ववर्ती सरकार पर टीएएसएमएसी के संचालन में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार को कई गंभीर गड़बड़ियाँ मिली हैं और आने वाले समय में इस संबंध में और खुलासे हो सकते हैं।

मंत्री ने कहा, 'जिन लोगों ने गलत काम किए हैं, उन्हें लोगों को गुमराह करने के बजाय चुप रहना चाहिए।' उन्होंने यह भी संकेत दिया कि टीएएसएमएसी के संचालन की लगातार समीक्षा जारी है और राजस्व, नियमों के पालन तथा नीति संबंधी प्राथमिकताओं के आधार पर भविष्य में अन्य शराब दुकानों पर भी कार्रवाई की जा सकती है।

आगे की राह

टीएएसएमएसी तमिलनाडु सरकार के राजस्व का एक प्रमुख स्रोत है और इसके संचालन में किसी भी बदलाव का राज्य के बजट पर सीधा असर पड़ता है। सरकार की यह नीति एक ओर सामाजिक सुधार का संकेत देती है, तो दूसरी ओर राजकोषीय दबाव का सवाल भी खड़ा करती है। आने वाले महीनों में टीएएसएमएसी की समीक्षा रिपोर्ट और संभावित अतिरिक्त कार्रवाइयाँ इस नीति की दिशा तय करेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

000-8,000 करोड़ का स्वैच्छिक राजस्व त्याग किसी भी राज्य सरकार के लिए असामान्य है। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह सामाजिक नीति दीर्घकालिक है या चुनावी वादे की प्रतीकात्मक पूर्ति। पिछली सरकारों पर अनियमितताओं के आरोप राजनीतिक रूप से सुविधाजनक हैं, परंतु इनके साथ ठोस साक्ष्य और जवाबदेही की माँग भी उठेगी। टीएएसएमएसी की आय पर निर्भर राज्य के बजट में यह रिक्तता कहाँ से भरी जाएगी — यह प्रश्न अभी अनुत्तरित है।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या तमिलनाडु सरकार टीएएसएमएसी का निजीकरण करने वाली है?
नहीं। आबकारी मंत्री विग्नेश ने स्पष्ट किया है कि टीएएसएमएसी के निजीकरण का कोई प्रस्ताव नहीं है और शराब बिक्री सरकारी नियंत्रण में ही रहेगी। विपक्ष के इस संबंध में लगाए गए आरोपों को सरकार ने सिरे से खारिज किया है।
तमिलनाडु में 717 टीएएसएमएसी दुकानें क्यों बंद की गईं?
विजय सरकार ने इन दुकानों को बंद करने का फैसला शराब पर सामाजिक निर्भरता चरणबद्ध तरीके से घटाने की नीति के तहत किया है। यह सरकार की सत्ता में आने के बाद की प्रमुख घोषणाओं में से एक थी।
717 दुकानें बंद होने से तमिलनाडु सरकार को कितना राजस्व नुकसान होगा?
आबकारी मंत्री विग्नेश के अनुसार, इन दुकानों को बंद करने से सरकार को हर साल ₹7,000 से ₹8,000 करोड़ के राजस्व का नुकसान होगा। बंद की गई दुकानों में से कुछ की प्रतिदिन बिक्री ₹25 लाख तक थी।
क्या भविष्य में और टीएएसएमएसी दुकानें बंद हो सकती हैं?
मंत्री विग्नेश ने संकेत दिया है कि सरकार टीएएसएमएसी के संचालन की लगातार समीक्षा कर रही है। राजस्व, नियमों के पालन और नीति संबंधी प्राथमिकताओं के आधार पर भविष्य में अन्य दुकानों पर भी कार्रवाई संभव है।
पिछली सरकार पर टीएएसएमएसी में क्या आरोप लगाए गए हैं?
आबकारी मंत्री ने पूर्ववर्ती सरकार पर टीएएसएमएसी के संचालन में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सरकार को कई गंभीर गड़बड़ियाँ मिली हैं और आने वाले समय में और खुलासे हो सकते हैं, हालाँकि अभी तक विस्तृत साक्ष्य सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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