तमिलनाडु सरकार ने जुलाई में ₹12,044 करोड़ का कर्ज लिया, अप्रैल-जुलाई में राजस्व घाटा ₹25,267 करोड़
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु सरकार ने जुलाई 2026 में बॉन्ड जारी कर बाज़ार से ₹12,044 करोड़ का कर्ज लिया, क्योंकि राज्य का खर्च लगातार कमाई से अधिक बना हुआ है। राजकोषीय आँकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीनों — अप्रैल से जुलाई — में कुल राजस्व घाटा ₹25,267 करोड़ तक पहुँच गया। ये आँकड़े तमिलनाडु वेलाई वाइप्पु कझगम (TVK) सरकार द्वारा अपना पहला बजट पेश करने के 100 दिनों से अधिक समय बाद सामने आए हैं।
राजस्व और व्यय का ब्यौरा
राजकोषीय आँकड़ों के अनुसार, अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच तमिलनाडु की कुल कमाई ₹89,718 करोड़ रही। इसमें कर-राजस्व का हिस्सा सर्वाधिक ₹82,566 करोड़ रहा, जबकि गैर-कर राजस्व ₹4,070 करोड़ और केंद्र सरकार से प्राप्त अनुदान ₹3,082 करोड़ रहा।
राज्य के राजस्व स्रोतों में राज्य जीएसटी (GST), स्टांप ड्यूटी एवं पंजीकरण शुल्क, भूमि राजस्व, बिक्री एवं वाणिज्यिक कर, राज्य आबकारी शुल्क, केंद्रीय करों में राज्य का हिस्सा तथा अन्य शुल्क शामिल हैं। इसी अवधि में कुल व्यय ₹1.23 लाख करोड़ रहा, जिससे ₹25,267 करोड़ का राजस्व घाटा दर्ज हुआ।
ब्याज और पेंशन का बोझ
व्यय के सबसे बड़े मदों में मौजूदा ऋणों पर ब्याज भुगतान ₹21,176 करोड़ रहा। पेंशन भुगतान पर ₹17,237 करोड़ खर्च हुए। ये दोनों मिलकर राज्य के व्यय का एक बड़ा हिस्सा बनाते हैं और सरकार की वित्तीय लचीलेपन को सीमित करते हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार ने कल्याणकारी योजनाओं और विकास परियोजनाओं के लिए महत्वाकांक्षी वादे किए हैं। इन प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए सरकार सरकारी प्रतिभूतियाँ जारी कर और बैंकों तथा अन्य अधिकृत माध्यमों से उधार लेकर फंड जुटा रही है।
उधारी में साल-दर-साल वृद्धि
चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीनों में तमिलनाडु का कुल उधार ₹32,925 करोड़ रहा। जून 2026 तक यह आँकड़ा ₹20,881 करोड़ था, जिसका अर्थ है कि अकेले जुलाई में ₹12,044 करोड़ का अतिरिक्त कर्ज लिया गया।
गौरतलब है कि पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि — अप्रैल से जुलाई 2025 — में राज्य का राजस्व ₹85,876 करोड़, व्यय ₹1.09 लाख करोड़ और उधारी ₹30,956 करोड़ थी। इस तुलना से स्पष्ट है कि जहाँ राजस्व में वर्ष-दर-वर्ष सुधार हुआ है, वहीं व्यय और उधारी दोनों में भी वृद्धि हुई है।
वित्तीय रणनीति पर सवाल
आलोचकों का कहना है कि बढ़ते राजस्व घाटे और उधारी के मद्देनज़र TVK सरकार की वित्तीय रणनीति की जाँच और कड़ी होने की संभावना है। मुख्य चिंता यह है कि सरकार ब्याज देनदारियों और लगातार बने राजस्व घाटे को नियंत्रित करते हुए अपनी वादा की गई योजनाओं के लिए धन कैसे जुटाएगी।
आगे के महीनों में राज्य की वित्तीय स्थिति और उसके बजट लक्ष्यों के बीच का अंतर राज्य की आर्थिक प्रबंधन क्षमता की असली परीक्षा होगी।