10 अगस्त 2026
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तमिलनाडु पर ₹13.18 लाख करोड़ का कर्ज: टीवीके सरकार का श्वेत पत्र जारी, विपक्ष ने उठाए सवाल

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तमिलनाडु पर ₹13.18 लाख करोड़ का कर्ज: टीवीके सरकार का श्वेत पत्र जारी, विपक्ष ने उठाए सवाल

सारांश

तमिलनाडु की नई टीवीके सरकार ने श्वेत पत्र में ₹13.18 लाख करोड़ की देनदारी उजागर की — BJP ने इसे पिछली DMK सरकार के कुप्रबंधन का सबूत बताया, जबकि DMK ने आँकड़ों को गलत करार दिया और सरकार पर अपनी विफलताएँ छिपाने का आरोप लगाया।

मुख्य बातें

तमिलनाडु की टीवीके सरकार ने 17 जून 2026 को राज्य की वित्तीय स्थिति पर श्वेत पत्र जारी किया।
वित्त मंत्री मैरी विल्सन के अनुसार राज्य की कुल देनदारियाँ ₹13.18 लाख करोड़ , जिसमें प्रत्यक्ष कर्ज ₹10 लाख करोड़ के करीब।
DMK शासनकाल में कर्ज ₹5 लाख करोड़ से बढ़कर ₹10 लाख करोड़ तक पहुँचा था।
BJP ने श्वेत पत्र का स्वागत किया, लेकिन सरकार से आर्थिक सुधार का रोडमैप माँगा।
DMK ने आँकड़ों को गलत बताया; पूर्व वित्त मंत्री थंगम थेनारासु ने जल्द खंडन जारी करने की बात कही।
महिला सहायता योजना के लिए ₹47,000 करोड़ और किसान नकद सहायता के लिए ₹11,910 करोड़ की आवश्यकता अनुमानित।

तमिलनाडु की नवनिर्वाचित टीवीके सरकार ने 17 जून 2026 को राज्य की वित्तीय स्थिति पर एक श्वेत पत्र जारी किया, जिसमें राज्य की कुल वित्तीय देनदारियाँ ₹13.18 लाख करोड़ बताई गई हैं। वित्त मंत्री मैरी विल्सन द्वारा जारी इस दस्तावेज़ के अनुसार, इसमें प्रत्यक्ष कर्ज (डायरेक्ट डेट) अकेले ₹10 लाख करोड़ के करीब पहुँच चुका है। इस श्वेत पत्र ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है — एक ओर सत्तापक्ष इसे पारदर्शिता का प्रतीक बता रहा है, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे राजनीतिक हथियार करार दे रहा है।

श्वेत पत्र में क्या है

वित्त मंत्री मैरी विल्सन द्वारा मंगलवार को प्रस्तुत इस दस्तावेज़ में राज्य की समग्र वित्तीय देनदारियाँ ₹13.18 लाख करोड़ दर्शाई गई हैं। इनमें प्रत्यक्ष उधारी ₹10 लाख करोड़ के आसपास है। यह श्वेत पत्र पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) सरकार के सत्ता से बाहर होने के बाद जारी किया गया है। गौरतलब है कि DMK के सत्ता में आने से पहले राज्य पर लगभग ₹5 लाख करोड़ का कर्ज था, जो उनके कार्यकाल के अंत तक ₹10 लाख करोड़ तक पहुँचने की बात स्वयं DMK ने स्वीकार की थी।

भाजपा की प्रतिक्रिया

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने श्वेत पत्र का स्वागत करते हुए इसे पिछली सरकारों के आर्थिक कुप्रबंधन का प्रमाण बताया। BJP नेता तमिलिसाई सुंदरराजन ने कहा, 'BJP शासित राज्यों ने कोविड के बाद भी आर्थिक चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया है, फिर तमिलनाडु ऐसा क्यों नहीं कर सका? इसके अलावा, जब सरकार श्वेत पत्र जारी कर रही है, तो उसे यह भी बताना चाहिए कि अर्थव्यवस्था सुधारने के लिए वह कौन से कदम उठाने जा रही है।'

सुंदरराजन ने यह भी रेखांकित किया कि सरकार ने महिलाओं को सहायता देने का वादा किया है, जिसके लिए 1.57 करोड़ लाभार्थियों को लगभग ₹47,000 करोड़ की आवश्यकता होगी। किसानों को नकद सहायता के लिए अलग से ₹11,910 करोड़ की ज़रूरत बताई गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार को राज्य की वित्तीय स्थिति पहले से ज्ञात थी, तो इतने बड़े चुनावी वादे क्यों किए गए।

BJP नेता नारायणन तिरुपति ने भी सवाल उठाया कि जब कर्ज के आँकड़े पहले से सार्वजनिक थे, तो श्वेत पत्र जारी करने का वास्तविक उद्देश्य क्या है।

DMK का पलटवार

DMK ने इस श्वेत पत्र की कड़ी आलोचना करते हुए इसे सरकार की अपनी विफलताओं से ध्यान भटकाने की कोशिश बताया। पूर्व वित्त मंत्री थंगम थेनारासु ने कहा कि राज्य की वित्तीय स्थिति बजट पेश करते समय पहले ही विस्तार से सार्वजनिक की जा चुकी है। उन्होंने इस दस्तावेज़ को चुनावी वादे पूरे न कर पाने की नाकामी छिपाने का एक राजनीतिक स्टंट करार दिया।

DMK प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने कहा, 'हमारे पूर्व वित्त मंत्री ने कहा है कि श्वेत पत्र में दिए गए आँकड़े गलत हैं। उन्होंने जल्द ही विस्तृत आँकड़े जारी कर इस सरकार द्वारा जारी श्वेत पत्र की खामियों और गलतियों को उजागर करने की बात कही है।'

आम जनता और राजकोषीय भविष्य पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु सरकार पर चुनावी वादों — महिला सहायता योजना और किसान नकद सहायता — को पूरा करने का दबाव है, जबकि राजकोषीय घाटा पहले से ही गहरा है। आलोचकों का कहना है कि बिना ठोस राजकोषीय सुधार रोडमैप के श्वेत पत्र महज एक दस्तावेज़ी कवायद बनकर रह सकता है। राज्य के वित्तीय स्वास्थ्य पर आगे की दिशा स्पष्ट करने के लिए सरकार पर दबाव बढ़ रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इसके साथ कोई ठोस राजकोषीय सुधार योजना क्यों नहीं आई। ₹13.18 लाख करोड़ की देनदारी उजागर करना और फिर ₹47,000 करोड़ की महिला सहायता तथा ₹11,910 करोड़ की किसान योजना का वादा एक साथ निभाना — यह अंतर्विरोध सरकार की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है। दूसरी ओर, DMK का यह तर्क कि आँकड़े गलत हैं, तब तक खोखला लगता है जब तक वे विस्तृत खंडन न पेश करें। तमिलनाडु का यह वित्तीय संकट राज्य-केंद्र राजकोषीय संबंधों और लोकलुभावन राजनीति की सीमाओं पर एक बड़े राष्ट्रीय विमर्श की माँग करता है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु के श्वेत पत्र में क्या खुलासा हुआ है?
वित्त मंत्री मैरी विल्सन द्वारा 17 जून 2026 को जारी श्वेत पत्र में राज्य की कुल वित्तीय देनदारियाँ ₹13.18 लाख करोड़ बताई गई हैं, जिसमें प्रत्यक्ष कर्ज अकेले ₹10 लाख करोड़ के करीब है। यह दस्तावेज़ DMK सरकार के सत्ता से बाहर होने के बाद टीवीके सरकार ने जारी किया है।
DMK ने श्वेत पत्र पर क्या कहा?
DMK ने श्वेत पत्र की कड़ी आलोचना की है और आँकड़ों को गलत बताया है। पूर्व वित्त मंत्री थंगम थेनारासु ने इसे सरकार की चुनावी विफलताएँ छिपाने का स्टंट करार दिया और जल्द ही विस्तृत खंडन जारी करने की बात कही है।
BJP ने तमिलनाडु के श्वेत पत्र पर क्या प्रतिक्रिया दी?
BJP ने श्वेत पत्र का स्वागत करते हुए इसे पिछली DMK सरकार के आर्थिक कुप्रबंधन का प्रमाण बताया। हालाँकि, BJP नेता तमिलिसाई सुंदरराजन ने टीवीके सरकार से यह भी पूछा कि राज्य की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए उसका अपना रोडमैप क्या है।
तमिलनाडु सरकार के चुनावी वादों पर कितना खर्च अनुमानित है?
महिला सहायता योजना के तहत 1.57 करोड़ लाभार्थियों के लिए लगभग ₹47,000 करोड़ और किसानों को नकद सहायता के लिए करीब ₹11,910 करोड़ की आवश्यकता बताई गई है। यह राशि राज्य की मौजूदा वित्तीय स्थिति के मद्देनज़र विपक्ष के लिए सवाल का विषय बनी हुई है।
DMK के कार्यकाल में तमिलनाडु का कर्ज कितना बढ़ा?
DMK के सत्ता में आने से पहले राज्य पर लगभग ₹5 लाख करोड़ का कर्ज था, जो उनके कार्यकाल के अंत तक ₹10 लाख करोड़ तक पहुँच गया — यह आँकड़ा स्वयं DMK ने स्वीकार किया था। नई सरकार के श्वेत पत्र में कुल देनदारियाँ ₹13.18 लाख करोड़ दर्शाई गई हैं।
राष्ट्र प्रेस
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