तमिलनाडु बजट 5 अगस्त: टीवीके सरकार का पहला पूर्ण बजट, ₹13.18 लाख करोड़ के कर्ज के बीच वित्त मंत्री मैरी विल्सन पेश करेंगी रोडमैप
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु की टीवीके सरकार अपना पहला पूर्ण संशोधित बजट 5 अगस्त 2026 को विधानसभा में पेश करेगी। राज्य के वित्त मंत्री एन. मैरी विल्सन सुबह 10 बजे वित्त वर्ष 2026-27 का संशोधित बजट प्रस्तुत करेंगे, जबकि कृषि मंत्री विनोथ 6 अगस्त को कृषि बजट सदन के पटल पर रखेंगे। सत्ता संभालने के बाद यह नई सरकार की पहली पूर्ण वित्तीय प्रस्तुति है, जो ₹13.18 लाख करोड़ के संचित ऋण और बढ़ते राजकोषीय दबाव की पृष्ठभूमि में आ रही है।
बजट की घोषणा कैसे हुई
इस बजट सत्र की घोषणा मंगलवार, 21 जुलाई 2026 को विधानसभा अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर ने की। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्य बजट और कृषि बजट क्रमशः दो अलग-अलग दिनों में प्रस्तुत किए जाएंगे। यह बजट सत्र इसलिए विशेष माना जा रहा है क्योंकि यह टीवीके के सत्ता में आने के बाद पहली बार विधानसभा में अपनी वित्तीय नीति की औपचारिक रूपरेखा रखेगी।
विरासत में मिली वित्तीय चुनौतियाँ
सत्ता संभालने के तुरंत बाद टीवीके सरकार ने राज्य की आर्थिक स्थिति पर एक श्वेत पत्र जारी किया, जिसमें वित्तीय हालात को पूर्ववर्ती सरकार के अनुमानों से कहीं अधिक गंभीर बताया गया। श्वेत पत्र के अनुसार, तमिलनाडु पर कुल बकाया कर्ज बढ़कर ₹13.18 लाख करोड़ हो गया है।
पूर्व डीएमके सरकार ने विधानसभा चुनाव से पहले 2026-27 के लिए अंतरिम बजट पेश किया था, जिसमें ₹3.44 लाख करोड़ की राजस्व प्राप्ति और ₹3.93 लाख करोड़ के राजस्व व्यय का अनुमान था। उस बजट में ₹48,697 करोड़ के राजस्व घाटे और ₹1.22 लाख करोड़ के राजकोषीय घाटे का अनुमान लगाया गया था।
हालाँकि, टीवीके सरकार के श्वेत पत्र में कहा गया है कि वास्तविक राजस्व घाटा बढ़कर लगभग ₹90,500 करोड़ तक पहुँच सकता है — अनुमान से करीब दोगुना। राजकोषीय घाटा भी बढ़कर लगभग ₹1.64 लाख करोड़ होने की आशंका जताई गई है।
उधार क्षमता और वित्तीय कमी
श्वेत पत्र के अनुसार, राज्य की अधिकतम उधार लेने की क्षमता ₹1.52 लाख करोड़ आंकी गई है। इस सीमा और अनुमानित राजकोषीय घाटे के बीच लगभग ₹11,600 करोड़ की वित्तीय कमी बनती है। यह ऐसे समय में है जब राज्य को कल्याणकारी योजनाओं, बुनियादी ढाँचे और पूंजीगत खर्च को एक साथ बनाए रखना है।
बजट से क्या उम्मीदें हैं
विश्लेषकों का मानना है कि इस संशोधित बजट से कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है — सरकार राजकोषीय घाटे को किस तरह नियंत्रित करेगी, क्या कल्याणकारी योजनाओं में कटौती होगी, और बुनियादी ढाँचे व पूंजीगत निवेश की क्या प्राथमिकता रहेगी। गौरतलब है कि यह बजट केवल शेष वित्त वर्ष के लिए है, इसलिए यह नई सरकार की आर्थिक दिशा का पहला संकेत होगा। आने वाले महीनों में सरकार की राजकोषीय विश्वसनीयता इसी बजट की बुनियाद पर परखी जाएगी।