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तमिलनाडु बिजली क्षेत्र पर ₹2.47 लाख करोड़ का कर्ज, मंत्री निर्मल कुमार का आश्वासन — इस साल नहीं बढ़ेंगी दरें

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तमिलनाडु बिजली क्षेत्र पर ₹2.47 लाख करोड़ का कर्ज, मंत्री निर्मल कुमार का आश्वासन — इस साल नहीं बढ़ेंगी दरें

सारांश

तमिलनाडु के बिजली क्षेत्र पर ₹2.47 लाख करोड़ का कर्ज — और दशकों से जारी घाटे का बोझ। मंत्री निर्मल कुमार ने श्वेत पत्र जारी कर पारदर्शिता दिखाई, लेकिन असली सवाल यह है कि बिना दर बढ़ाए यह संरचनात्मक संकट कैसे सुलझेगा।

मुख्य बातें

तमिलनाडु बिजली क्षेत्र पर कुल ₹2.47 लाख करोड़ का बकाया कर्ज; राज्य के सभी सार्वजनिक उपक्रमों के कर्ज का 77.6% हिस्सा।
बिजली मंत्री सीटीआर निर्मल कुमार ने 25 वर्षों के वित्तीय प्रदर्शन की समीक्षा वाला श्वेत पत्र जारी किया।
2021-26 के बीच ₹34,447 करोड़ का घाटा; खर्च ₹5.32 लाख करोड़ , आय ₹4.97 लाख करोड़ ।
घाटे का सिलसिला पुराना — 2006-11 में ₹35,463 करोड़ , 2011-16 में ₹56,361 करोड़ , 2016-21 में ₹58,534 करोड़ ।
सरकार दीर्घकालिक बिजली अनुबंधों से हर माह ₹215 करोड़ बचाने का लक्ष्य रखती है; नौ स्थानों पर खरीद अनियमितताओं की जाँच होगी।
मंत्री ने स्पष्ट किया — इस वर्ष बिजली दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं ।

तमिलनाडु के बिजली मंत्री सीटीआर निर्मल कुमार ने 26 जून 2025 को चेन्नई स्थित तमिलनाडु बिजली बोर्ड मुख्यालय में एक श्वेत पत्र जारी कर खुलासा किया कि राज्य के बिजली क्षेत्र पर कुल ₹2.47 लाख करोड़ का बकाया कर्ज है। इस भारी वित्तीय बोझ के बावजूद मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस वर्ष बिजली दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की जाएगी।

श्वेत पत्र में क्या सामने आया

यह श्वेत पत्र पिछले 25 वर्षों के बिजली क्षेत्र के वित्तीय प्रदर्शन की विस्तृत समीक्षा प्रस्तुत करता है। दस्तावेज़ के अनुसार, 2021 से 2026 के बीच तमिलनाडु बिजली बोर्ड का कुल खर्च ₹5.32 लाख करोड़ रहा, जबकि इसी अवधि में आय केवल ₹4.97 लाख करोड़ रही — जिसके परिणामस्वरूप ₹34,447 करोड़ का घाटा दर्ज हुआ।

गौरतलब है कि यह श्वेत पत्र ऐसे समय जारी हुआ है जब तमिलनाडु सरकार ने हाल ही में राज्य के समग्र वित्त पर एक अलग श्वेत पत्र जारी किया था, जिसमें राज्य का कुल कर्ज ₹13.18 लाख करोड़ और बिजली क्षेत्र की देनदारी ₹2,47,130 करोड़ आंकी गई थी।

दशकों से जारी घाटे का सिलसिला

श्वेत पत्र के आँकड़ों के अनुसार, बिजली बोर्ड कई सरकारों के कार्यकाल में लगातार घाटे में रहा है। 2006-11 के दौरान ₹35,463 करोड़ का घाटा हुआ, जो 2011-16 में बढ़कर ₹56,361 करोड़ और 2016-21 में ₹58,534 करोड़ तक पहुँच गया। यह आँकड़े दर्शाते हैं कि वित्तीय संकट किसी एक दल या सरकार की देन नहीं, बल्कि संरचनात्मक समस्या है।

मंत्री निर्मल कुमार ने आरोप लगाया कि भारी खर्च और उधारी के बावजूद बिजली ढाँचे का अपेक्षित विकास नहीं हो पाया। उन्होंने कहा कि बिजली क्षेत्र अब राज्य के सभी सार्वजनिक उपक्रमों के कुल कर्ज का 77.6 प्रतिशत हिस्सा है, जो वित्तीय सुधारों की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करता है।

बिजली माँग और आपूर्ति की स्थिति

मंत्री ने बताया कि तमिलनाडु की अधिकतम बिजली माँग 21,307 मेगावाट तक पहुँच चुकी है। राज्य अपनी ज़रूरतें हाइड्रो, थर्मल और गैस आधारित उत्पादन के साथ-साथ केंद्रीय संयंत्रों, निजी उत्पादकों और अन्य राज्यों से खरीद कर पूरी करता है। सरकार अब महँगे अल्पकालिक बिजली खरीद समझौतों की जगह दीर्घकालिक अनुबंधों पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जिससे हर महीने लगभग ₹215 करोड़ की बचत होने की उम्मीद है।

जाँच और सुधार की राह

मंत्री ने घोषणा की कि नौ स्थानों पर बिजली कंडक्टरों की खरीद में कथित अनियमितताओं की जाँच की जाएगी। सरकार का तात्कालिक फोकस वित्तीय प्रबंधन और कार्यकुशलता में सुधार कर बिजली बोर्ड को मज़बूत करने पर है।

आगे चलकर यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार दीर्घकालिक अनुबंधों और सुधार उपायों के ज़रिए इस संरचनात्मक घाटे को किस हद तक नियंत्रित कर पाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि गहरी संरचनात्मक विफलता है। दरें न बढ़ाने का आश्वासन राजनीतिक दृष्टि से समझ में आता है, लेकिन बिना राजस्व सुधार के केवल दीर्घकालिक अनुबंधों और कुशलता उपायों से ₹34,447 करोड़ के ताज़ा घाटे की भरपाई कठिन है। कंडक्टर खरीद में कथित अनियमितताओं की जाँच की घोषणा स्वागत योग्य है, पर यह देखना होगा कि यह जवाबदेही तक पहुँचती है या केवल कागज़ों तक सिमट जाती है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु बिजली क्षेत्र पर कितना कर्ज है?
श्वेत पत्र के अनुसार तमिलनाडु के बिजली क्षेत्र पर कुल ₹2,47,130 करोड़ (लगभग ₹2.47 लाख करोड़) का बकाया कर्ज है। यह राज्य के सभी सार्वजनिक उपक्रमों के कुल कर्ज का 77.6 प्रतिशत है।
क्या तमिलनाडु में इस साल बिजली दरें बढ़ेंगी?
नहीं। बिजली मंत्री सीटीआर निर्मल कुमार ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इस वर्ष बिजली दरों में कोई संशोधन नहीं किया जाएगा। सरकार का ध्यान दरें बढ़ाने के बजाय वित्तीय प्रबंधन और कुशलता सुधार पर है।
तमिलनाडु बिजली बोर्ड का हालिया घाटा कितना है?
2021 से 2026 के बीच बिजली बोर्ड का कुल खर्च ₹5.32 लाख करोड़ और आय ₹4.97 लाख करोड़ रही, जिससे ₹34,447 करोड़ का घाटा हुआ। इससे पहले 2016-21 में ₹58,534 करोड़ और 2011-16 में ₹56,361 करोड़ का घाटा दर्ज किया गया था।
तमिलनाडु सरकार बिजली क्षेत्र को सुधारने के लिए क्या कदम उठा रही है?
सरकार महँगे अल्पकालिक बिजली खरीद समझौतों की जगह दीर्घकालिक अनुबंधों पर काम कर रही है, जिससे हर महीने लगभग ₹215 करोड़ की बचत का अनुमान है। इसके अलावा नौ स्थानों पर बिजली कंडक्टर खरीद में कथित अनियमितताओं की जाँच भी की जाएगी।
तमिलनाडु की अधिकतम बिजली माँग कितनी है?
श्वेत पत्र के अनुसार तमिलनाडु की अधिकतम बिजली माँग 21,307 मेगावाट तक पहुँच चुकी है। राज्य हाइड्रो, थर्मल, गैस, केंद्रीय संयंत्रों, निजी उत्पादकों और अन्य राज्यों से खरीद के ज़रिए इस माँग को पूरा करता है।
राष्ट्र प्रेस
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