ट्रंप बोले — ईरान की अर्थव्यवस्था 'बहुत खराब', होर्मुज स्ट्रेट पर बातचीत 'आधी-अधूरी'
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 10 अगस्त 2026 को स्वीकार किया कि ईरान के साथ उनकी बातचीत केवल 'आधे-अधूरे तरीके से' चल रही है और देश की आर्थिक स्थिति 'बहुत खराब' है। एक्सियोस को दी गई एक संक्षिप्त फोन बातचीत में ट्रंप ने संकेत दिया कि वह फिलहाल कोई नया सैन्य अभियान शुरू करने की बजाय ईरान पर आर्थिक दबाव जारी रखने के पक्ष में हैं।
ट्रंप के बयान और उनका संदर्भ
ट्रंप ने एक्सियोस से बातचीत में कहा, 'हम इसे ज़्यादा तूल नहीं दे रहे हैं।' इससे पहले मंगलवार को उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि होर्मुज स्ट्रेट को 'बहुत जल्द' नहीं खोला गया, तो ईरान को 'कड़े परिणाम' भुगतने होंगे। फॉक्स न्यूज़ को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने दावा किया था कि दोनों देशों के बीच 'बहुत अच्छी बातचीत' चल रही है और स्ट्रेट 'शायद अगले ही दिन' खुल सकता है।
ओवल ऑफिस में सोमवार को ट्रंप ने कहा, 'यह मामला एक न एक तरह से जल्दी सुलझ जाएगा। यह कोई बहुत जटिल मुद्दा नहीं है।' यह ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संचार को लेकर परस्पर विरोधी संकेत सामने आ रहे हैं।
ईरान का रुख — बातचीत से इनकार
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने तेहरान में पत्रकारों से स्पष्ट कहा कि इस समय दोनों देशों के बीच कोई बातचीत नहीं चल रही है। उन्होंने रविवार को यह भी कहा कि जब तक अमेरिका हाल ही में हुए समझौता ज्ञापन (MoU) के उल्लंघन को बंद नहीं करता, तब तक बातचीत दोबारा शुरू नहीं हो सकती। ट्रंप के 'बहुत अच्छी बातचीत' वाले दावे को तेहरान ने सिरे से खारिज किया।
होर्मुज स्ट्रेट समझौते की स्थिति
रिपोर्टों के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री यातायात को लेकर ईरान, ओमान और अमेरिका के बीच एक समझौता तैयार किया गया है, जो पिछले कुछ दिनों से लंबित है। ईरानी सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के हवाले से बताया गया कि अराघची ने शनिवार को कहा कि ईरान और ओमान होर्मुज स्ट्रेट में एक अस्थायी समुद्री मार्ग तय करने को लेकर किसी समझौते के 'काफी करीब' हैं।
गौरतलब है कि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत जीवाश्म ईंधन के आवागमन का प्रमुख मार्ग है। इस जलमार्ग पर किसी भी व्यवधान का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों पर पड़ता है।
परस्पर विरोधी दावों का असर
ट्रंप के बयानों और तेहरान के खंडन के बीच की यह खाई कूटनीतिक अनिश्चितता को और गहरा कर रही है। एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति बातचीत के संकेत दे रहे हैं, दूसरी तरफ ईरान के विदेश मंत्री किसी भी संवाद से इनकार कर रहे हैं। इन परस्पर विरोधी दावों के कारण इस रणनीतिक जलमार्ग का भविष्य फिलहाल अनिश्चित बना हुआ है।
आगे क्या
विश्लेषकों के अनुसार, ट्रंप की 'आर्थिक दबाव' वाली रणनीति यह संकेत देती है कि निकट भविष्य में सैन्य विकल्प को टाला जा सकता है। हालाँकि, होर्मुज स्ट्रेट पर ओमान की मध्यस्थता में हो रही बातचीत की सफलता ही इस संकट के हल की कुंजी मानी जा रही है।