24 सितंबर 2026
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यूएनएससी 2028-29 के लिए भारत को मिला कैरिकॉम का समर्थन, न्यूयॉर्क में एफएमएम बैठक में वादा

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यूएनएससी 2028-29 के लिए भारत को मिला कैरिकॉम का समर्थन, न्यूयॉर्क में एफएमएम बैठक में वादा

सारांश

कैरिकॉम के 15 देशों ने यूएनएससी के 2028-29 कार्यकाल के लिए भारत की उम्मीदवारी का समर्थन करने का वादा किया — यह भारत की 'ग्लोबल साउथ' कूटनीति की बड़ी जीत है। न्यूयॉर्क में 81वीं यूएनजीए के इतर हुई एफएमएम बैठक में जयशंकर ने आर्थिक, डिजिटल और स्वास्थ्य सहयोग को और गहरा करने पर जोर दिया।

मुख्य बातें

कैरिकॉम के 15 सदस्य देशों ने यूएनएससी 2028-29 कार्यकाल के लिए भारत की उम्मीदवारी का समर्थन करने की घोषणा की।
बैठक 24 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में 81वीं यूएनजीए के इतर आयोजित की गई।
सह-अध्यक्षता विदेश मंत्री एस.
जयशंकर और सूरीनाम के मंत्री मेल्विन डब्ल्यू.
भारत ने कैरिकॉम देशों को हीमोडायलिसिस इकाइयाँ, भीष्म क्यूब चिकित्सा उपकरण और सौर ऊर्जा सहायता प्रदान की।
दोनों पक्ष आर्थिक, डिजिटल, जलवायु और ऊर्जा सहयोग को और गहरा करने पर सहमत हुए।
जयशंकर ने कैरिकॉम देशों से इंटरनेशनल सोलर अलायंस और ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस में शामिल होने का आग्रह किया।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर की अध्यक्षता में न्यूयॉर्क में 24 सितंबर 2026 को 81वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के इतर आयोजित भारत-कैरिकॉम विदेश मंत्रियों की बैठक (एफएमएम) में 15-सदस्यीय कैरिकॉम समूह ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के 2028-29 कार्यकाल के लिए भारत की उम्मीदवारी का समर्थन करने की आधिकारिक घोषणा की। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने गुरुवार को एक बयान जारी कर इसकी पुष्टि की।

बैठक की पृष्ठभूमि और संदर्भ

यह बैठक नवंबर 2024 में गुयाना में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कैरिकॉम साझेदारों के बीच हुए दूसरे भारत-कैरिकॉम शिखर सम्मेलन की अनुवर्ती (फॉलो-अप) बैठक थी। बैठक की सह-अध्यक्षता जयशंकर और सूरीनाम के विदेश, अंतरराष्ट्रीय व्यापार एवं सहयोग मंत्री मेल्विन डब्ल्यू. जे. बौवा ने संयुक्त रूप से की। यह ऐसे समय में आया है जब भारत 'ग्लोबल साउथ' की प्रमुख आवाज़ के रूप में अपनी स्थिति सुदृढ़ करने में जुटा है।

बैठक में कौन-कौन शामिल हुए

एफएमएम में बारबाडोस, डोमिनिका, बहामास, गुयाना, जमैका, सेंट विंसेंट और ग्रेनाडाइन्स, त्रिनिदाद और टोबैगो, सूरीनाम, हैती, सेंट लूसिया, सेंट किट्स एंड नेविस तथा एंटीगुआ और बारबुडा के विदेश मंत्री भाग लेने पहुँचे। इसके अलावा ग्रेनाडा के वित्त मंत्री, बेलीज के विदेश मामलों के मंत्रालय के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और कैरिकॉम की महासचिव कार्ला नताली बार्नेट भी उपस्थित रहीं।

सहयोग के मुख्य क्षेत्र

एमईए के बयान के अनुसार, दोनों पक्षों ने राजनीतिक जुड़ाव को गहरा करने, व्यापार एवं निवेश बढ़ाने तथा कृषि व खाद्य सुरक्षा, डिजिटल गवर्नेंस, जलवायु लचीलेपन और ऊर्जा सहयोग पर विचार-विमर्श किया। कैरिकॉम साझेदारों ने इस क्षेत्र में भारत की सहायता और दक्षिण-दक्षिण सहयोग को आगे बढ़ाने के प्रयासों की सराहना की।

जयशंकर ने बैठक के बाद एक्स पर पोस्ट कर बताया, 'भारत ने इस बात पर जोर दिया कि हमें खासकर आर्थिक, डिजिटल एवं आवागमन के क्षेत्रों में अपने संबंधों को और मजबूत करना चाहिए।' उन्होंने यह भी कहा कि जिन लघु एवं मध्यम उद्यमों (एसएमई) और त्वरित प्रभाव वाली परियोजनाओं के लिए भारत ने प्रतिबद्धता जताई थी, उनमें से कई कैरेबियाई देशों में पूरी हो चुकी हैं।

स्वास्थ्य और ऊर्जा क्षेत्र में भारत का योगदान

जयशंकर ने बताया कि भारत ने अंग प्रतिरोपण एवं कृत्रिम अंग लगाने के लिए शिविर आयोजित किए हैं और कुछ कैरिकॉम साझेदार देशों को 'हीमोडायलिसिस' इकाइयाँ उपहार में दी हैं। इसके साथ ही 'भीष्म क्यूब' जैसी कॉम्पैक्ट चिकित्सा उपकरण इकाइयाँ भी उपलब्ध कराई गई हैं। ऊर्जा क्षेत्र में भारत की मदद से इस क्षेत्र में सौर ऊर्जा को बढ़ावा मिला है। जयशंकर ने कैरिकॉम देशों से इंटरनेशनल सोलर अलायंस और ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस में शामिल होने पर विचार करने का आग्रह किया।

आगे की राह

गौरतलब है कि कैरिकॉम के तीन देशों — सूरीनाम, त्रिनिदाद और गुयाना — में भारतीय मूल के लोगों की उल्लेखनीय आबादी है, जो इस साझेदारी को सांस्कृतिक आधार भी प्रदान करती है। दोनों पक्ष संयुक्त राष्ट्र में सुधार, जलवायु परिवर्तन से निपटने तथा आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय अपराधों जैसे वैश्विक मुद्दों पर मिलकर काम जारी रखने पर सहमत हुए। कैरिकॉम के समर्थन से यूएनएससी में भारत की दावेदारी को नई मजबूती मिली है, और यह भारत की बहुपक्षीय कूटनीति का एक अहम पड़ाव माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो 'ग्लोबल साउथ' को एकजुट कर सुरक्षा परिषद में स्थायी या अस्थायी उपस्थिति के लिए वोट जुटाने पर केंद्रित है। हालाँकि 15 छोटे कैरेबियाई देशों का समर्थन प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण है, असली जंग अफ्रीकी और एशियाई मतदाता ब्लॉकों में लड़ी जाएगी। जयशंकर की व्यक्तिगत उपस्थिति और स्वास्थ्य-सहायता जैसे ठोस योगदानों का उल्लेख यह दिखाता है कि भारत कूटनीति को केवल वक्तव्यों तक सीमित नहीं रखना चाहता — लेकिन इन प्रयासों की दीर्घकालिक निरंतरता ही तय करेगी कि 2028-29 की सीट वास्तव में मिलती है या नहीं।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कैरिकॉम ने यूएनएससी के लिए भारत का समर्थन कब और कहाँ किया?
कैरिकॉम ने 24 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में 81वीं यूएनजीए के इतर आयोजित भारत-कैरिकॉम विदेश मंत्रियों की बैठक (एफएमएम) में यूएनएससी के 2028-29 कार्यकाल के लिए भारत की उम्मीदवारी का समर्थन करने की घोषणा की।
भारत यूएनएससी में किस कार्यकाल के लिए उम्मीदवार है?
भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के 2028-29 कार्यकाल के लिए अस्थायी सदस्यता की उम्मीदवारी कर रहा है। कैरिकॉम के 15 सदस्य देशों ने इस उम्मीदवारी को समर्थन देने का वादा किया है।
भारत-कैरिकॉम एफएमएम बैठक में किन विषयों पर चर्चा हुई?
बैठक में व्यापार, निवेश, कृषि एवं खाद्य सुरक्षा, डिजिटल गवर्नेंस, जलवायु लचीलेपन और ऊर्जा सहयोग पर विचार-विमर्श हुआ। दोनों पक्ष संयुक्त राष्ट्र सुधार और आतंकवाद जैसे वैश्विक मुद्दों पर मिलकर काम करने पर भी सहमत हुए।
कैरिकॉम क्या है और इससे भारत के संबंध क्यों महत्वपूर्ण हैं?
कैरिकॉम (कैरिबियन कम्युनिटी) 15 कैरेबियाई देशों का एक क्षेत्रीय संगठन है। इसके तीन सदस्य देशों — सूरीनाम, त्रिनिदाद और गुयाना — में भारतीय मूल के लोगों की उल्लेखनीय आबादी है, जो इस साझेदारी को सांस्कृतिक और कूटनीतिक दोनों आधार देती है।
भारत ने कैरिकॉम देशों को कौन-सी व्यावहारिक सहायता प्रदान की है?
भारत ने कैरिकॉम देशों को हीमोडायलिसिस इकाइयाँ, भीष्म क्यूब चिकित्सा उपकरण और अंग प्रतिरोपण शिविरों जैसी स्वास्थ्य सुविधाएँ दी हैं। इसके अलावा सौर ऊर्जा प्रसार में भी सहायता की गई है और कई एसएमई एवं त्वरित प्रभाव परियोजनाएँ पूरी की गई हैं।
राष्ट्र प्रेस
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